jump to navigation

कुछ मेरे बारे मे…. August 16, 2006

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
trackback

नमस्कार!! मै रचना बजाज…मूलत: मध्यप्रदेश की हूँ. अभी नासिक (महा.) मे रहती हूँ.शिक्षा के बारे मे यह कहुँगी..
“निर्बल को अनदेखा कर जो कई कई मन्दिर बनवाए,
मेरी तुमसे ये विनती हे दानी उसको न कहा जाए.”
“अपनी शिक्षा  को बाँटे ना और खुद मे ही जो खो जाए,
मेरी तुमसे ये विनती हे ज्ञानी उसको ना कहा  जाए.”
“जो धनी बनुँ तो दान करु, शिक्षैत हुँ तो बाटुँ शिक्षा
इस जीवन मे पाई है, बस इतनी ही मेने दीक्षा.”

“अपनी भाषा ” का मोह मुझे यहाँ तक ले आया है….जिनके सहयोग ओर प्रोत्साहन से यहाँ तक
आई हूँ, उनके लिये ओर आप सभी के लिये…….

“भले कितनी दोलत हो, कितनी ही शोहरत हो,
सच्च्ा इन्साँ वही जो नेक हो ओर भला हो.
होती हे जयकार उसकी ही जग मे,
जो ओरोँ को भी साथ लेकर चला हो!!!!”

Comments»

1. ashish - August 17, 2006

wow! great that you have found a new blog.. wordpress makes a great management system… hope you are gonna post here more than before :D

2. mahashakti - August 17, 2006

आपका स्‍वागत है

3. Jitu - August 17, 2006

रचना जी, हिन्दी चिट्ठाकारी में आपका हार्दिक स्वागत है।

कृप्या करके अपने ब्लॉग नारद और चिट्ठा विश्व पर रजिस्टर करवाएं।

4. sunil - August 17, 2006

विचार तो बहुत अच्छे हैं, बस अपनी पंक्तियों में छिपे वायदे को भूल नहीं जाईयेगा. शिक्षा बाँटने में चिट्ठे का उपयोग नियमित करती रहियेगा.

5. समीर लाल - August 17, 2006

स्वागत है आपका हिन्दी चिठ्ठा जगत मे.

6. सागर चन्द नाहर - August 17, 2006

रचना जी
स्वागत है, बहुत ही उँचे विचार है आपके!

7. rachana - August 17, 2006

@ ashish, thank you!!

@ महाशक्ति और समीर लाल जी, बहुत शुक्रिया..

@ जीतु जी, धन्यवाद. और रजिस्टर करने के लिये क्या करना होगा ?

@ सुनील भाई, जितनी भी शिक्षा है उसे बाँटने मे कोताही बिल्कुल नही करेँगे !

@ नाहर जी बहुत धन्यवाद.

8. मनीष - August 17, 2006

स्वागत है आपका हिन्दी चिठ्ठा जगत मे.

9. Amit - August 17, 2006

ब्लॉगिंग की शुरूआत पर बधाई। पर संभल कर, यह तेज़ी से फ़ैलने वाला रोग है। ;)

10. ई-छाया - August 17, 2006

सुस्वागतम् रचना जी।
उम्मीद है कि आपकी बांटी हुई कुछ शिक्षा भिक्षास्वरूप हमें भी प्राप्त होगी।

11. Tarun - August 18, 2006

रचना बस नयी नयी रचना परोसते रहिये, यहाँ खाने वाले बहुत हैं, आपका स्वागत है :)

12. rachana - August 18, 2006

@ मनीष जी,, शुक्रिया ! आप ही के ‘चिठ्ठे’ से यहाँ तक आ पाये हैँ.

@ अमित भाई,, आपकी सहायता के बिना ये असम्भव ही था..धन्यवाद. और हाँ! हम तो पक्के भारतीय हैँ,जब तक सहन हो सकेगा “रोग” सह्ते रहेँगे,,’रोग’ गम्भीर होने पर देखा जयेगा!!

@ई छाया जी..धन्यवाद…और क्षमा करेँ, हम इतने शिक्षित नही है जो आप जैसे माहिर चिठ्ठाकारोँ
को शिक्षा दे सकेँ..हमेँ तो यहाँ आप लोगोँ से सीखना होगा..

@ तरुण जी,धन्यवाद.. कोशिश करेँगे और आशा है आपको यहाँ का “ज़ायका” पसन्द आयेगा…

13. अनूप शुक्ला - August 20, 2006

मेरी तरफ से भी आपका स्वागत तथा निरंतर लेखन के लिये शुभकामनायें।

14. rachanabajaj - August 21, 2006

अनूप जी. बहुत धन्यवाद..