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शिक्षा August 21, 2006

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
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शिक्षा का अर्थ अब नही है ज्ञान की खोज,
बच्चे के लिये शिक्षा है उसके बस्ते का बोझ
वो लोग तय करते हैँ हमारे बच्चे क्या पढेँ और क्या नही
जिन्हे खुद नही पता क्या गलत है और क्या सही
नही है ‘उन्हे’ पिछडे लोगोँ को पढाना
क्योँकि निरक्षरता तो ‘उनके’ लिये है वोटोँ का खजाना
उनकी शिक्षानीतीयोँ से हमेँ ही लडना है
क्योँकि उनके बच्चोँ को तो विदेशोँ मेँ पढना है!
अपने अपनो के हो नही पाते, ये किसी का क्या भला करेँगे
जो सहाठ सालोँ मेँ नही किया अब कर देँगे????

Comments»

1. हिमांशु - August 21, 2006

बहुत खूब बहिन जी।

लेकिन कौन हैं ये ‘ वे लोग ‘,
और किसका कर रहे हैं हम ये सोग ।
‘ हम ‘ क्यों नहीं बन सकते ‘ वे लोग ‘
करें नई शुरुआत और हटादें जड से ये रोग

2. Rachana - August 24, 2006

धन्यवाद, कोशिश करेँगे.