भारतीय सँस्कृती के अनुसार मृत्यु के बाद हमे अपने कर्मो के हिसाब से स्वर्ग या नरक मे जगह मिलती है.मैने इस समय वँहा के हालात देखने की कोशिश की है..एक मृत देह को लेकर यमदूत उपर पहुँचे हैँ,देखिये वँहा का नजारा—-
जैसे ही यमराज ने नरक का द्वार खटखाया,
नरक का व्यवस्थापक झल्लाया-
क्यूँ रोज मेरी परेशानी बढाते हो ?
हर दिन किसी को लेकर चले आते हो !
दूत बोला-
चलो इस मामले को आज ही निपटाते हैँ,
रोज की मुसीबत का हल निकलवाते हैँ.
दोनो गए यमराज के पास,
बोले – महाराज !
हमारी उलझन को दूर भगाईये,
अब आप ही कोई उपाय बताईये
नरक के कमरे खचाखच भरे हैँ
उधर स्वर्ग के कई सेल खली पडे हैँ
बताईये! इसे कहाँ रखेँ हम ?
दूसरा आयेगा, तब क्या करेँ हम ?
आप नरक की नई इमारत बनवाईये
या फिर लोगोँ का मरना रुकवाईये
—– और—– को अभी वहीँ रहने दो
धरती सहनशील है थोडा और सहने दो!!
यमराज ने कहा-
आज तो एडजस्ट कर लो
इसे अभी के लिये स्वर्ग मे रख लो
दूत बोला-
महाराज हमने इसे ये बात कही थी
लेकिन आदमी की सहमति नही थी
कहता है- स्वर्गॅ मे अकेला पड जायेगा
वो तो नरक मे, अपनो के सँग ही रहेगा
यमराज बोले-
जैसे भी हो ये मामला सुलझाओ
तुम अनुभवी हो किसी तरह मनाओ
नही मानता तो धरती के तरीके अपनाओ
कुछ सहूलियतेँ देकर इसे निपटाओ
ये बातेँ सुनकर एक वृद्ध मन्त्री बोला–
क्या इस गुत्थी को मै सुलझाउँ ?
मन मे एक युक्ती है कहो तो बताउँ!
धरती पर कोई नही जो स्वर्ग मे जगह पायेगा
हर आदमी दोषी है नरक मे ही जायेगा!
मेरा कहा मानीये!!
और बाकी बचे स्वर्ग को नरक मे बदल डालीये!!
यमराज को ये सुझाव बहुत पसँद आया,
उन्होने तुरन्त आदेश भिजवाया,
कर्मो के हिसाब का विभाग बन्द करवाया’
कर्मचारियोँ का मामला ‘वी आर एस’ से निपटाया,
यमराज ने इन कामो को देर बिना किया,
और बाकी बचे स्वर्ग को नरक बना दिया!
और बाकी बचे स्वर्ग को नरक बना दिया!!!!
बढिया!
तभी कहते हैं:
इतनी अच्छी नई बहू घर में जो आ गई,
घर को स्वर्ग, और घरवालों को स्वर्गवासी बना गई ।
बहुत बढ़िया, सुंदर लिखा है.
बढ़िया है !
बहुत बढ़िया लिखा है। मज़ा आगया। यह वी आर एस क्या है?
बढ़िया है।मजेदार! वी आर एस से मतलब शायद वालंटियरी रिटायरमेंट स्कीम से होगा!
बहुत सुंदर है
हिमान्शु भाई, समीर जी, मनीष जी, अनूप जी, गुप्ता जी, और शुएब भाई आप सभी का टीप्पणी के लिए बहुत शुक्रिया..आप सभी को अच्छा लगा, ये जानकर खुशी हुई..
और गुप्ता जी,जैसा की अनूप जी ने बताया वी आर एस(वालँटरी रिटायरमेन्ट स्कीम )होता है..
बहुत अच्छी कविता है।
जगदीश जी एवँ प्रत्यक्षा जी, आप दोनो का धन्यवाद.
रचना जी, बहुत सुन्दर!
बहोत अच्छा लगा पढ़कर।
शुक्रिया सिन्धु जी!!