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व्यथा.. August 29, 2006

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
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अभी-अभी एक समाचार देखा की एक पुलिस आफिसर को,जिन्हे हाल ही मे स्वतँत्रता दिवस पर पुरस्कार से नवाजा गया था,घूसखोरी के आरोप मे गिरफ्तार किया गया है.आये दिन पुलिस अफसरोँ के अपराध मे शामिल होने की खबरेँ लगातार आ रही हैँ.अब रक्षक ही भक्षक होते जा रहे हैँ…
ये पन्क्तियाँ मैने उस समय लिखी थी,जब एक प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस आफिसर,एक महिला पत्रकार की हत्या के आरोपी थे और भूमिगत थे…

“इस देश की पुलिस पर कुछ तो रहम खाईये,
इतना भी क्या है डरना,बेखौफ बाहर आईये!
मर्जी हो तो कुछ कहना,मर्जी हो तो चुप रहना
जानते ही हो सब दाँव-पेँच,आपका ही है महकमा!
बारी है आज आपकी,कल उनकी भी आयेगी
जनता की तो बिसात क्या,वो कुछ भी न कर पायेगी!
कानून की पकड मे आम आदमी बेचारा,
बदकिस्मत तो वो है ही,व्यवस्था का भी मारा!
इस देश मे न कोई “खास” कोई भी केस हारा
जिससे की तुम न बच सको एसी न कोई “धारा”!!!

—इसी तरह का हाल नेताओँ के साथ भी है,वे भी ‘येन -केन -प्रकारेण’ पुलिस से बच ही जाते हैँ.
कुछ साल पहले हुइ दो प्रदेशोँ की ‘बहुचर्चित’घटनाओँ के बारे मे मैने लिखा था–
(*मनीष जी आपसे और सभी उत्तरभारतीय चिठ्ठाकारोँ से क्षमा माँगते हुए*)

“अपहरणोँ के प्रदेश को हम सब बिहार कहते हँ,
शहाबुद्दीन हैँ अमर वँहा पर सत्येन्द्र दूबे मरते हैँ!!”

“यू.पी वो प्रदेश है जँहा गैर वसूली चलती है,
अमरमणी हैँ अमर वँहा पर मधुमिताएँ मरती हैँ!!”

Comments»

1. SHUAIB - August 30, 2006

और ऊपर से पढे लिखे आफिसर ? :(

2. Pavan - August 30, 2006

agreed to whatever you depicted, you’re very true when you tried to elaborate on the discriminatory part…interesting read(word make sure comment in hindi next time..:D)

3. मनीष - August 31, 2006

क्षमा मांगने की क्या जरूरत है ! अपराध एक समस्या है इन प्रदेशों की जिन्हें चाहकर भी झुठलाया नहीं जा सकता ।
बहरहाल शाहाबुद्दीन फिलहाल जेल की हवा खा रहे हैं ।

4. Rachana - September 2, 2006

शुएब भाई,हाँ कभी उनके बारे मे भी लिखेँगे!

पवन,जब तक हिन्दी नही लिख पाते, अँगरेजी मे भी चलेगा..बहुत शुक्रिया!

मनीष जी, पता नही किसी को कब क्या ठीक नही लगे सो मैने माफी माँग ली थी!