तुम दुखी मत हो माँ— September 7, 2006
Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.trackback
मुझे पता है,तुम्हे दुख है! मै चीखकर तुम्हारी प्रार्थना करना चाहती हूँ, लेकिन व्यथित हूँ कि मेरा एक भाई समझेगा कि मै दूसरे की तरफ हूँ..और तुम भी तो यही चाहती हो ना,कि चाहे वे तुम्हारे गुण गायेँ या न गायेँ, कम से कम आपस मे तो न लडेँ..
दोनो तुम्हारे ही बेटे और मेरे भाई हैँ! आज सारा विश्व भारत के विकास की प्रशँसा कर रहा है,लेकिन ये लोग हैँ कि किसी व्यावसायिक आँकडोँ (जीडीपी,सेन्सेक्स और पता नही क्या क्या!) को अपनी सफलता का पैमाना मान कर, आज भी बेमतलब की बातोँ मे उलझ कर बरसोँ पीछे जीवन जी रहे हैँ…
माँ सद्बुद्धि और आशिर्वाद दो!! जल्दी ही सब कुछ ठीक होगा!
तुम्हारी बेटी
‘आम जनता’
वन्दे मातरम् !!!
** आज मुझे हिन्दी अखबार “नई दुनिया” की मेरी सँग्रहीत कतरनो मे ये पूरा गीत मिला…प्रस्तुत है…
वन्दे मातरम्
सुजलाँ सुफलाँ मलयज शीतलाम्
शस्य श्यामलाम मातरम्
शुभ्र-ज्योत्स्नाँ-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल कुसुमित-द्रुमदल शोभिनीम्
सुहासिनीँ सुमधुर भाषिणीम्
सुखदाँ वरदाँ मातरम्!
त्रिश कोटि कँठ कलकल-निनाद कराले
द्वि-त्रिश कोटि भुजैधृत खर कर वाले,
के बोले माँ तुमि अबले ?
बहुबलधारिणीँ नमामि तारिणीँ
रिपुदलवारिणीँ मातरम् !
तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि ह्रदि तुमि कर्म,
त्वमहि प्राण: शरीरे!
बाहुते तुमि मा शक्ति,
ह्रदये तुमि मा भक्ति!
तोमारि प्रतिमा गडि मँदिरे मँदिरे!
त्वम हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाँ
नमामि कमलाँ अमलाँ अतुलाम्
सुजलाँ सुफलाँ मातरम्
वन्दे मातरम!
श्यामलाँ सरलाँ सुस्मिताँ भूषिताम्
धरणीँ भरणी मातरम् !
बँकिमचँद्र चटर्जी
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम!
मेरा प्रयास रहेगा कि में इस राष्ट्र-गीत के मर्म को समझूँ और इसे अपने जीवन में ढाल पाऊँ।
वाह, रचना जी. बहुत मार्मिक…
वन्दे मातरम्
दिल को छूगई आपकी कवीता - वन्दे मातरम्
@ नाहर जी और सन्जय भाई, वन्दे मातरम !
@ हिमान्शु भाई, शुएब भाई और समीर जी, बहुत शुक्रिया..वन्दे मातरम्!!
रचना, आपकी पोस्ट बहुत मर्म स्पर्शी है
आज़ादी के इस गीत को,
संधर्ष की इस प्रीत को,
मिल के गुनगुनांए हम,
वंदे, वंदे, मातरम.
-रेणू आहूजा.
मै बहुत दिनो से पुरी कविता ढुँढ हि रहा था अपनी वेब मे डालने के लिये.. धन्यवाद!!
- राम अग्रवाल
रेनू जी और राही जी, पढने और पसँद करने के लिये बहुत शुक्रिया..