शक्तिवान सागर December 26, 2006
Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.trackback
(** दो साल पहले जब ‘सूनामी’ लहरों ने समुद्र किनारे रहने वाली कई जिन्दगीयाँ तबाह कर दी थीं, तब मैने कुछ पन्क्तियाँ (MIGHTY OCEAN)लिखी थीं.उसी का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत है)
सागर तुम्हें इतना गुसा क्यूँ आया?
लहरों ने कैसा कहर था मचाया?
बडे़ तुम बहुत हो ये सब जानते हैं,
शक्ति अथाह है ये सब मानते हैं.
जरूरी था क्या ये सब फिर से बताना?
विकराल रूप इस तरह से दिखाना?
छीनी हैं तुमने कईयों की साँसें,
हर तरफ बिछीं हैं लाशें ही लाशें.
माँ-बाप थे, कोई भाई-बहन थे,
बूढे, जवान और बच्चे, सभी थे.
कईयों के जीवन के तुम थे सहारे,
कहाँ जायेंगे वो मुसीबत के मारे?
कितनों के जीवन के तुम ही थे रक्षक,
कैसे बने तुम उन सबके भक्षक?
जरा-सी है विनती तुम मान लेना,
मौत की ये लहरें फिर ना फैलाना…
सुंदर…कुछ ऐसे ही भाव लिये उसी वक्त हिन्दी नेस्ट पर प्रकाशित मेरी रचना भी देखें:
सुनामी: भगवान से एक सवाल
http://www.hindinest.com/kavita/2003/082.htm
बहुत अच्छी लगी मगर प्रकृति पर किसका जोर्।
रचना जी,
आपकी यह निर्दोश एवं सुंदर भाव वाली कविता अच्छी लगी ।
बधाई !!!!
रीतेश गुप्ता
अच्छी है प्रार्थना! लेकिन सागरजी मानें तब है!
दिल को छूने वाली रचना।
द्रवित हृदय के उदगारों की सुंदर अभिव्यक्ति।
पहले हमारा अंडमान जाने का कार्यक्रम भी तकरीबन उसी समय बना था पर एक सहयोगी को छुट्टी ना मिल पाने के वजह से हम सुनामी के एक महिने पहले वहाँ गए ।बाद में सुनामी से मानव जीवन व प्रकृति के नाश की बात मन को कई दिनों तक सालती रही ! आपकी कविता ने वो पुरानी स्मृतियाँ फिर ताजा कर दीं ।
@ समीर जी, आपकी कविता पढी, बहुत अच्छी है.
@ प्रभात जी और रीतेश जी, बहुत धन्यवाद.
@ अनूप जी, सागर जी को हमारी बात मनवाना हमारे बस मे नही है,प्रार्थना करना हमारे बस था, जो हमने की है!
@ रत्ना जी और प्रेमलता जी, बहुत बहुत धन्यवाद आपके शब्दों के लिये.
@ मनीष जी, आप विपत्तियों से हमेशा इसी तरह बचते रहें, यही कामना है!