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जीवन.. January 17, 2007

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
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// थोडे-से सुख, थोडे-से दुख, थोडे सपने थोडी आशा!
   इनसे ही बनता है जीवन, ये ही जीवन की परिभाषा!! // 

जीवन मे हम सबको यूँ ही बस आना है,
थोडा ठहर करके फिर सबको जाना है.
थोडा-सा हँसना, और् थोडा-सा रोना है,
अपने-अपने कर्म हम सबको करना है.
हर माँ को अपना एक घर बसाना है,
अपने घरों के लिये पिता को कमाना है.
जीवन हो अच्छा सो बच्चों को पढना है,
बूढों को मृत्यु का इन्तजार करना है.
लोग आते-जाते हैं धरती को थमना है,
रोशनी फैलाने को सूरज को उगना है.
चाहे गिरे कोई पर्वतों को डटना है,
रूक जाए सभी फिर भी हवा को तो चलना है.
पानी जरूरी है नदियों को बहना है,
सबके भोजन के लिये पौधों को बढना है.
तारों को हर रात यूँ ही टिमटिमाना है,
चंदा को हर पल यूँ ही घटना-बढना है.
सदियों से आज तक सबने ही माना है,
निश्चित है सब यहाँ! ना कुछ बदलना है!
जीवन मे हम सबको यूँ ही बस आना है,
थोडा ठहर करके फिर सबको जाना है!!

Comments»

1. Pratik Pandey - January 17, 2007

जीवन की गति‍शीलता का जीवन्त चित्रण… सरल शब्दों में सुन्दर कविता।

2. Divyabh - January 17, 2007

जीवन व्याकरण का प्रगतिशील चिंतन…
ये रहस्य अनेकों को भुलावा देते रहते है,
मगर इन नेत्रो से शाश्वत देखता कौन है…
वस्तुपरक व्याख्या चरित व उसे प्रभावित
करती तत्वों पर….।

3. समीर लाल - January 17, 2007

जीवन मे हम सबको यूँ ही बस आना है,
थोडा ठहर करके फिर सबको जाना है!!

–काश, सब यह बात समझ पाते, तो कितनी सुंदर बात होती.

सुंदर भाव हैं.

4. राकेश खंडेलवाल - January 18, 2007

वही निश्चय, वही मंज़िल, वही राहें
यही जीवन यही जीवन

5. Shrish - January 18, 2007

कविता का शीर्षक होना चाहिए था - जिन्दगी का सफर।

6. अनूप शुक्ला - January 18, 2007

जब तमाम लोग रोने-सिसकने में लगे हैं, अधेरी-काली रातों में तन्हाइयां तलाश रहे हैं तब लगता है कि ये सरल-सहज कविता बड़ी सुकूनदेह है!

7. rachana - January 21, 2007

बहुत धन्यवाद आप सभी का. जिन्दगी के बारे मे कुछ पढा था, जिसे मैने जरा-सा बदल कर इस तरह किया है-
” एक कोना और चन्द एक साथी, कहने-सुनने, रोने-हँसने!
चार निवाले थोडा पानी, इतना बस है जिन्दा रहने!!”

@ राकेश जी, आपकी पन्क्ति बहुत पसन्द आई! शुक्रिया.

@ श्रीश जी, हाँ ये शीर्षक भी अच्छा रहता!

8. anil - January 23, 2007

Hi,liked the way u write..its simple and can be understood easliy..look like written anbout me, you or any common person…keep writing…its good that such soft hearted people are there in the world to express what you and me thinks……..
keep writing..keep expressinh

9. anil - January 23, 2007

expressing

10. anil - January 23, 2007

Rachnaji,
bahut achhi abivakati ki hai….jindagi ki choti se baat ko bahut khubsoorty se bayan kiya hai…………kuch kahna chahunga…
Har shaksh khusia chahta hai,
hur sakhsh dunia chahta hai
muje yakin hai hum sab kushi upja sakte hai
kash apne liy nahi, jab sari dunia ke liye cahye

11. फुरसतिया » जीवन मे हम सबको यूँ ही बस आना है.. - June 10, 2007

[...] का फलसफा बताते हुये स्वयं उन्होंने लिखा था- जीवन मे हम सबको यूँ ही बस आना है, [...]