रंगीली राजनीति… March 15, 2007
Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.trackback
आम जनता की होली तो हो ली, अब राजनेताओं के रंग देखिये—–
होली के रंगों मे डूबी राजनीति सारी की सारी,
भाजपा है अब लाल खुशी से, दुख से पीली कांग्रेस बेचारी!
सौन्दर्य से हुई गुलाबी राजनीति की हर इक नारी
नई झकाझक इनकी गाडी़, जग मग करती इनकी साडी़!
लालू के तो अपने रंग हैं, उनके रंग ही हुई राबडी,
कल तक जो सूखी थी एनडीए– आज हुई है हरी हरी!
कुछ सफेद नेता हैं जिन्होंने राजनीति में उम्र गुजारी
स्याह रंग के वे नेता हैं जो हैं पक्के भ्रष्टाचारी!
अपनी जिद पर अडे़ हुए हैं, केसरिया दुपट्टा धारी,
बाकी फिर क्यूँ पीछे रहते वे भी दे रहे टक्कर भारी! अब तक की है अपने मन की, अब सुन लो तुम बात हमारी,
रंग जाओ सब देश के रंग मे, बन्द करो अब मारा- मारी!
अदल-बदल कर तुम ही जीते, जनता तो हर बार है हारी,
खुद को थोडा पीछे कर लो, अब आने दो देश की बारी! आओ सब नेता मिल कर के, होली खेलो बिल्कुल न्यारी,
आज जला दो स्वार्थ सब अपने, और जला दो कालिख सारी!!
मज़ेदार है।
हम्म अच्छ कविता है।
आपके लीये एक अच्छी खबर है इस कडी़ पर देखीये
आपने भी मजे मजे में खूब जमा दी कविता सारी
राजनेता चमक रहे हैं नित रोती राजनीती बेचारी.
आप इसी तरह से लिखकर इन बहरों को राग सुनाऔ
एक दिन इनको समझापाओ बस यही है दुआ हमारी
योगेश समदर्शी
आपने आजकी राजनीति पर ज़बर्दस्त रंग फेंका है।
अदल-बदल कर तुम ही जीते, जनता तो हर बार है हारी,
खुद को थोडा पीछे कर लो, अब आने दो देश की बारी!
आओ सब नेता मिल कर के, होली खेलो बिल्कुल न्यारी,
आज जला दो स्वार्थ सब अपने, और जला दो कालिख सारी!!
बहुत अच्छी लगी ये पंक्तियाँ !
@ मिश्र जी, शुक्रिया!
@ आशीष, अच्छी खबर के लिये अच्छी टिप्पणी कर दी है!
@ योगेश जी, इन पन्क्तियों के लिये शुक्रिया!
@ शुएब भाई और समीर जी शुक्रिया!
@ मनीष जी, उन्ही पन्क्तियों के लिये सारी बात कहनी पडी! धन्यवाद्!