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	<title>Comments on: अलविदा नारद जी..</title>
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	<description>आम जिन्दगी से जुड़ी हर तरह की बातें</description>
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		<title>By: rachana</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-820</link>
		<dc:creator>rachana</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 May 2007 16:30:47 +0000</pubDate>
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		<description>@ मिश्रा जी, आपकी बढिया टिप्पणी का इन्तजार करेंगे! :)

@ राजेश जी, टिप्पणी का बहुत शुक्रिया..
 
@ मनीष जी, अपने विचार रखने के लिये धन्यवाद..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ मिश्रा जी, आपकी बढिया टिप्पणी का इन्तजार करेंगे! <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<p>@ राजेश जी, टिप्पणी का बहुत शुक्रिया..</p>
<p>@ मनीष जी, अपने विचार रखने के लिये धन्यवाद..</p>
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	<item>
		<title>By: मनीष</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-791</link>
		<dc:creator>मनीष</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Apr 2007 10:00:43 +0000</pubDate>
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		<description>नारद तो हिन्दी ब्लॉगजगत की पहचान है । चिट्ठाकारों को एक मंच पर लाने पर इसका बहुत योगदान है। पर आपने जो समस्याएँ बताईं हैं वे बेहद प्रासंगिक हैं,उससे हम सभी जूझ रहे हैं और अपने पसंद की पोस्टों तक जाने के लिए  अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं ।
नारद में अभी भी काफी तकनीकी सुधार की गुंजाइश है खासकर सबकी फीड को शीर्षक के साथ दिखाने की । विषयों और वाद विवाद पर तो नारद कुछ नहीं कर सकता । हाँ एक दिन में बहुत सारी पोस्ट करने वालों पर कुछ नियम अवश्य लागू कर सकता है ।
आशा है नारद की टीम इस संबंध में यथासंभव प्रयास कर रही होगी ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नारद तो हिन्दी ब्लॉगजगत की पहचान है । चिट्ठाकारों को एक मंच पर लाने पर इसका बहुत योगदान है। पर आपने जो समस्याएँ बताईं हैं वे बेहद प्रासंगिक हैं,उससे हम सभी जूझ रहे हैं और अपने पसंद की पोस्टों तक जाने के लिए  अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं ।<br />
नारद में अभी भी काफी तकनीकी सुधार की गुंजाइश है खासकर सबकी फीड को शीर्षक के साथ दिखाने की । विषयों और वाद विवाद पर तो नारद कुछ नहीं कर सकता । हाँ एक दिन में बहुत सारी पोस्ट करने वालों पर कुछ नियम अवश्य लागू कर सकता है ।<br />
आशा है नारद की टीम इस संबंध में यथासंभव प्रयास कर रही होगी ।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Rajesh Roshan</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-789</link>
		<dc:creator>Rajesh Roshan</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Apr 2007 17:20:53 +0000</pubDate>
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		<description>Main yaha bahut naya hun aur bahut alag bhi kyonki main roman mein likhta hu. Maine jindgi ko jo samjha hai wo agar kewal ek line mein kahu to wo hai ki Aap ke dil mein jo aata hai, aap wo kare. Ha! us karne se kisi ka bura na ho. Aur jab us mein lautana chahte hain jaroor laute. Sankoch na kare. Yaha kisi ke liye koi bandhan nahi hai. 

Dhyanwad :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Main yaha bahut naya hun aur bahut alag bhi kyonki main roman mein likhta hu. Maine jindgi ko jo samjha hai wo agar kewal ek line mein kahu to wo hai ki Aap ke dil mein jo aata hai, aap wo kare. Ha! us karne se kisi ka bura na ho. Aur jab us mein lautana chahte hain jaroor laute. Sankoch na kare. Yaha kisi ke liye koi bandhan nahi hai. </p>
<p>Dhyanwad <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: RC Mishra</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-788</link>
		<dc:creator>RC Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Apr 2007 17:19:19 +0000</pubDate>
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		<description>आप अगली प्रविष्टि प्रस्तुत कीजिये, उस पर बढिया से टिप्पणी करेंगे।
:)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप अगली प्रविष्टि प्रस्तुत कीजिये, उस पर बढिया से टिप्पणी करेंगे।<br />
 <img src='http://s.wordpress.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Rachana</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-787</link>
		<dc:creator>Rachana</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Apr 2007 09:22:48 +0000</pubDate>
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		<description>श्रीश भाई, नाराज क्यूँ होते हो भाई...सब कुछ बुरा थोडे ही लिखा है मैने, अच्छा भी तो लिखा है! सभी को एक मंच की जरुरत होती है और कई बेहतर लिखने वाले लोग जुड रहे हैं... ये तो हमारे &#039;नारद&#039; मित्र को अपनी दुविधा कही है, जिसे हम बहुत चाहते है!..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>श्रीश भाई, नाराज क्यूँ होते हो भाई&#8230;सब कुछ बुरा थोडे ही लिखा है मैने, अच्छा भी तो लिखा है! सभी को एक मंच की जरुरत होती है और कई बेहतर लिखने वाले लोग जुड रहे हैं&#8230; ये तो हमारे &#8216;नारद&#8217; मित्र को अपनी दुविधा कही है, जिसे हम बहुत चाहते है!..</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Shrish</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-786</link>
		<dc:creator>Shrish</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Apr 2007 08:33:54 +0000</pubDate>
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		<description>पता नहीं आप लोग हर बात के लिए नारद को ही क्यों दोषी ठहराते हैं। अरे भाई नारद एक मशीनी ब्लॉग एग्रीगेटर है वह अच्छी बुरी पोस्टें थोड़े ही छांट सकता है। और वैसे भी हर बंदा अच्छा नहीं लिख सकता अगर नारद सिर्फ प्रसिद्ध अच्छे लिखने वालों के ही चिट्ठे दिखाए तो बाकी लोग कहाँ जाएंगे। अगर नारद न हो तो कई नए उभरते हुए श्रेष्ठ लिखने वालों का पता ही न चले। बल्कि मैं तो यहाँ तक कहता हूँ कि आज की तारीख में कई सुपरहिट चिट्ठे जैसे फुरसतिया, उड़नतश्तरी आदि भी नारद पर न हों तो उनकी भी मार्केट एकदम मंदी पढ़ जाएगी।

रही बात पसंदीदा चिट्ठे पढ़ने की तो उसके लिए &lt;a href=&quot;http://bloglines.com&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;ब्लॉगलाइन्स&lt;/a&gt; आदि फीड रीडर का उपयोग करिए, बस।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पता नहीं आप लोग हर बात के लिए नारद को ही क्यों दोषी ठहराते हैं। अरे भाई नारद एक मशीनी ब्लॉग एग्रीगेटर है वह अच्छी बुरी पोस्टें थोड़े ही छांट सकता है। और वैसे भी हर बंदा अच्छा नहीं लिख सकता अगर नारद सिर्फ प्रसिद्ध अच्छे लिखने वालों के ही चिट्ठे दिखाए तो बाकी लोग कहाँ जाएंगे। अगर नारद न हो तो कई नए उभरते हुए श्रेष्ठ लिखने वालों का पता ही न चले। बल्कि मैं तो यहाँ तक कहता हूँ कि आज की तारीख में कई सुपरहिट चिट्ठे जैसे फुरसतिया, उड़नतश्तरी आदि भी नारद पर न हों तो उनकी भी मार्केट एकदम मंदी पढ़ जाएगी।</p>
<p>रही बात पसंदीदा चिट्ठे पढ़ने की तो उसके लिए <a href="http://bloglines.com" rel="nofollow">ब्लॉगलाइन्स</a> आदि फीड रीडर का उपयोग करिए, बस।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Rachana</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-783</link>
		<dc:creator>Rachana</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Apr 2007 18:06:12 +0000</pubDate>
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		<description>@ अफलातून जी, आपका चिट्ठा मै पढती हूं! मैने भी ये पोस्ट सिर्फ़ परिस्थितीजन्य दुविधा के चलते लिखी..लिखना फ़िलहाल तो बन्द नही कर रही, पढना तो बिल्कुल ही नही!! आपके माध्यम से कई बाते‍ जानने को मिली‍..धन्यवाद!

@ अनूप जी, धन्यवाद! खण्डन कर दिया है!

@ प्रियंकर जी, मैने ये पोस्ट सिर्फ़ परिस्थितीजन्य दुविधा के चलते लिखी. आपका कविता संग्रह पढ्ती रहूँगी! टिप्पणी के लिये धन्यवाद!

@ अतुल जी, आप ठीक समझे! टिप्पणी के लिये धन्यवाद!

@ संजीत जी, //माना कि भीड़ देखकर बहुतों को एक अजीब सी बैचेनी होती है//
भीड़ देखकर बैचेनी?? नही जी! बडे से संयुक्त परिवार मे ही पली बढी हूँ और अब भी संयुक्त परिवार( हालाँकि ये छोटा सा है!) मे ही रहती हूँ! इसीलिये &quot;मै&quot; की जगह &quot;हम&quot; सी सीखा है!.. पलायन नही कर रही..

@ रवि जी, धन्यवाद जानकारी के लिये! आशा है आपसे मार्गदर्शन मिलता रहेगा!

@ सृजन जी, 
// हमें कचरा और पठनीय के बीच फर्क़ करना आना चाहिए। 
ये छोटे-बड़े विवाद तो होते ही रहेंगे, कुछ लोग संयम भी खोएंगे और शालीनता भी। इसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए। हमें, जहां तक हो सके, दूसरों द्वारा लगाई गई आग में घी डालने से गुरेज करना चाहिए और हो सके तो पानी डालने का प्रयास जरूर करना चाहिए। 
वैसे, मुझे विश्वास है कि आपका नाता हमसे पहले की तरह बना रहेगा।//

आप की बात मानते हुए, नाता बनाये रखूँगी..आप भी स्नेह बनाएँ रखेंगे एसी आशा है!

@ सागर जी, ये मजाक बिल्कुल नही था...सिर्फ दुविधा थी..

@ राजीव जी, आपके विस्तृत विचार जानने को मिले बहुत शुक्रिया!!
//इस के बावजूद भी, नारद का अपना अलग ही महत्व बना रहेगा, और है भी - ऐतिहासिक कारणों से भी और अपने उत्तरदायित्व का सम्यक निर्वहन करने के लिये भी। //

जी हाँ!! और नारद से ही मुझे कई बहुत अच्छे चिट्ठा मित्र मिले.. और अभी तो मुझे बहुत कुछ कहना है! इतने लोग सुनने चाहते हैं, ये जानकर खुश हूँ!

@ जीतू भाई, शायद मुझे इस तरह नही कहना चाहिये था...आप लोगों को छोड कर कहीं नहीं जा रही..अच्छा लिखने की कोशिश करूँगी..टिप्पणी के लिये बहुत बहुत धन्यवाद!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ अफलातून जी, आपका चिट्ठा मै पढती हूं! मैने भी ये पोस्ट सिर्फ़ परिस्थितीजन्य दुविधा के चलते लिखी..लिखना फ़िलहाल तो बन्द नही कर रही, पढना तो बिल्कुल ही नही!! आपके माध्यम से कई बाते‍ जानने को मिली‍..धन्यवाद!</p>
<p>@ अनूप जी, धन्यवाद! खण्डन कर दिया है!</p>
<p>@ प्रियंकर जी, मैने ये पोस्ट सिर्फ़ परिस्थितीजन्य दुविधा के चलते लिखी. आपका कविता संग्रह पढ्ती रहूँगी! टिप्पणी के लिये धन्यवाद!</p>
<p>@ अतुल जी, आप ठीक समझे! टिप्पणी के लिये धन्यवाद!</p>
<p>@ संजीत जी, //माना कि भीड़ देखकर बहुतों को एक अजीब सी बैचेनी होती है//<br />
भीड़ देखकर बैचेनी?? नही जी! बडे से संयुक्त परिवार मे ही पली बढी हूँ और अब भी संयुक्त परिवार( हालाँकि ये छोटा सा है!) मे ही रहती हूँ! इसीलिये &#8220;मै&#8221; की जगह &#8220;हम&#8221; सी सीखा है!.. पलायन नही कर रही..</p>
<p>@ रवि जी, धन्यवाद जानकारी के लिये! आशा है आपसे मार्गदर्शन मिलता रहेगा!</p>
<p>@ सृजन जी,<br />
// हमें कचरा और पठनीय के बीच फर्क़ करना आना चाहिए।<br />
ये छोटे-बड़े विवाद तो होते ही रहेंगे, कुछ लोग संयम भी खोएंगे और शालीनता भी। इसके लिए हमें तैयार रहना चाहिए। हमें, जहां तक हो सके, दूसरों द्वारा लगाई गई आग में घी डालने से गुरेज करना चाहिए और हो सके तो पानी डालने का प्रयास जरूर करना चाहिए।<br />
वैसे, मुझे विश्वास है कि आपका नाता हमसे पहले की तरह बना रहेगा।//</p>
<p>आप की बात मानते हुए, नाता बनाये रखूँगी..आप भी स्नेह बनाएँ रखेंगे एसी आशा है!</p>
<p>@ सागर जी, ये मजाक बिल्कुल नही था&#8230;सिर्फ दुविधा थी..</p>
<p>@ राजीव जी, आपके विस्तृत विचार जानने को मिले बहुत शुक्रिया!!<br />
//इस के बावजूद भी, नारद का अपना अलग ही महत्व बना रहेगा, और है भी &#8211; ऐतिहासिक कारणों से भी और अपने उत्तरदायित्व का सम्यक निर्वहन करने के लिये भी। //</p>
<p>जी हाँ!! और नारद से ही मुझे कई बहुत अच्छे चिट्ठा मित्र मिले.. और अभी तो मुझे बहुत कुछ कहना है! इतने लोग सुनने चाहते हैं, ये जानकर खुश हूँ!</p>
<p>@ जीतू भाई, शायद मुझे इस तरह नही कहना चाहिये था&#8230;आप लोगों को छोड कर कहीं नहीं जा रही..अच्छा लिखने की कोशिश करूँगी..टिप्पणी के लिये बहुत बहुत धन्यवाद!!</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Rachana</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-782</link>
		<dc:creator>Rachana</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Apr 2007 17:13:00 +0000</pubDate>
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		<description>@ चन्दन जी, आप नये हैं तो स्वागत है आपका...तमाम जिम्मेदार हैं लोग हैं यहाँ मदद के लिए..आप मेरी पोस्ट देखकर कोई धारणा न बनायें...ज्यादातर सब कुछ बहुत अच्छा ही है..मैने सिर्फ अपनी दुविधा लिखी थी. टिप्पणी के लिये धन्यवाद!

@ मिश्र जी, दो शब्द भी लिख देते!! चलो आप मुस्कुराए तो सही!

@ हिमांशु भाई!!! कहाँ गायब थे आप! बहुत खुशी हुई आपको देखकर! आपका चिट्ठा नारद पर नही है क्या? 

@ घुघुति जी, आप मुझे रचना ही कहें. आपके स्नेह के लिये बहुत धन्यवाद..आपके साथ हूँ ही, उसके लिये अब किसी माध्यम की जरुरत नही है..

@ समीर जी और तरुण जी, हाँ जी इतना बुरा नही हुआ है!! आते रहेंगे जी! टिप्पणी भी करते रहेंगे जी!! धन्यवाद!

@ राकेश जी, बहुत बहुत धन्यवाद इतनी सुन्दर पन्क्तियों के लिये!! ऐसे ही मार्गदर्शन करते रहें..

@ उन्मुक्त जी, बहुत धन्यवाद आप दोनो के स्नेह के लिये!! अधिकार क्यूँ नही? यहाँ सबसे अच्छी बात मेरे लिये यही रही कि मै कई लोगों कहने- सुनने के अधिकार दे और ले पाई हूँ!! विदा होने की बात से सिर्फ नारद से ही थी लिखने पढने से नही...और विचारों से तो जुड गये है हीं..

@ सन्जय भाई, जरूर लिखूँगी अच्छा सा!

@ मसिजीवी जी, 
//यदि आप केवल नारद की जगह अपने फेवरेट की सूची से चिट्ठों तक पहुँचना चाहती हैं तो ये तो नहीं कहा जा सकता कि आप छोड़कर जा रही हैं- ये सुखद तो नहीं लेकिन इतना बुरा भी नहीं। विस्‍तार भर है।//

ठीक कह रहे हैं आप..ये बस एक दुविधा से उपजी पोस्ट थी..
//लेकिन कभी कभी आती रहिए। //
कभी कभी ही क्यूँ? हमेशा ही आते रहेंगे!!

@ विवेक जी, टिप्पणी के लिये शुक्रिया.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>@ चन्दन जी, आप नये हैं तो स्वागत है आपका&#8230;तमाम जिम्मेदार हैं लोग हैं यहाँ मदद के लिए..आप मेरी पोस्ट देखकर कोई धारणा न बनायें&#8230;ज्यादातर सब कुछ बहुत अच्छा ही है..मैने सिर्फ अपनी दुविधा लिखी थी. टिप्पणी के लिये धन्यवाद!</p>
<p>@ मिश्र जी, दो शब्द भी लिख देते!! चलो आप मुस्कुराए तो सही!</p>
<p>@ हिमांशु भाई!!! कहाँ गायब थे आप! बहुत खुशी हुई आपको देखकर! आपका चिट्ठा नारद पर नही है क्या? </p>
<p>@ घुघुति जी, आप मुझे रचना ही कहें. आपके स्नेह के लिये बहुत धन्यवाद..आपके साथ हूँ ही, उसके लिये अब किसी माध्यम की जरुरत नही है..</p>
<p>@ समीर जी और तरुण जी, हाँ जी इतना बुरा नही हुआ है!! आते रहेंगे जी! टिप्पणी भी करते रहेंगे जी!! धन्यवाद!</p>
<p>@ राकेश जी, बहुत बहुत धन्यवाद इतनी सुन्दर पन्क्तियों के लिये!! ऐसे ही मार्गदर्शन करते रहें..</p>
<p>@ उन्मुक्त जी, बहुत धन्यवाद आप दोनो के स्नेह के लिये!! अधिकार क्यूँ नही? यहाँ सबसे अच्छी बात मेरे लिये यही रही कि मै कई लोगों कहने- सुनने के अधिकार दे और ले पाई हूँ!! विदा होने की बात से सिर्फ नारद से ही थी लिखने पढने से नही&#8230;और विचारों से तो जुड गये है हीं..</p>
<p>@ सन्जय भाई, जरूर लिखूँगी अच्छा सा!</p>
<p>@ मसिजीवी जी,<br />
//यदि आप केवल नारद की जगह अपने फेवरेट की सूची से चिट्ठों तक पहुँचना चाहती हैं तो ये तो नहीं कहा जा सकता कि आप छोड़कर जा रही हैं- ये सुखद तो नहीं लेकिन इतना बुरा भी नहीं। विस्‍तार भर है।//</p>
<p>ठीक कह रहे हैं आप..ये बस एक दुविधा से उपजी पोस्ट थी..<br />
//लेकिन कभी कभी आती रहिए। //<br />
कभी कभी ही क्यूँ? हमेशा ही आते रहेंगे!!</p>
<p>@ विवेक जी, टिप्पणी के लिये शुक्रिया.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-781</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Apr 2007 15:10:20 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-781</guid>
		<description>भई हम क्या सुन रहे है? रचना जी, जरा विस्तार से समझाओ। 

हाँ एक बात तो हम भी मानते है नारद पर चिट्ठों की भरमार हो गयी है, लेकिन विविधता नही बढी है, वो तब तक बढेगी भी नही, जब तक हम बेवजह की बहसों मे उलझे रहेंगे। अगर  किसी जगह नकारात्मक बह रही है तो वहाँ सकारात्मक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। होना ये चाहिए था कि आप कहती कि मै दोगनी गति से अपने चिट्ठों को लिखूंगी। आप देखिएगा अच्छा लिखने वाले को पाठकों की कभी कमी नही होगी। आप कविता लिखें अथवा लेख, हम तो पढने आएंगे ही। ये पक्का है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भई हम क्या सुन रहे है? रचना जी, जरा विस्तार से समझाओ। </p>
<p>हाँ एक बात तो हम भी मानते है नारद पर चिट्ठों की भरमार हो गयी है, लेकिन विविधता नही बढी है, वो तब तक बढेगी भी नही, जब तक हम बेवजह की बहसों मे उलझे रहेंगे। अगर  किसी जगह नकारात्मक बह रही है तो वहाँ सकारात्मक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। होना ये चाहिए था कि आप कहती कि मै दोगनी गति से अपने चिट्ठों को लिखूंगी। आप देखिएगा अच्छा लिखने वाले को पाठकों की कभी कमी नही होगी। आप कविता लिखें अथवा लेख, हम तो पढने आएंगे ही। ये पक्का है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: राजीव</title>
		<link>http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-780</link>
		<dc:creator>राजीव</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Apr 2007 13:42:09 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://rachanabajaj.wordpress.com/2007/04/12/alvidaa-narad-jee/#comment-780</guid>
		<description>मेरे विचार से नारद (जो कि एक सराहनीय फीड एग्रीगेटर) है, उसे छोड़ना कोई बुरी बात नहीं। यह तो नारद का सम्मान है कि उसने इतना प्रेरित किया लोगों को कि कई चिट्ठाकार उससे नये / पुराने चिट्ठों का संकलन देखकर प्रेरित होते रहे और पिछले कुछ महीनों में चिट्ठाकारों (और आलेखों) में अपेक्षित  अप्रत्याशित  वृद्धि हुई। 
अब जब चिट्ठे और चिट्ठाकार बढ़ेंगे तो लोग अपनी व्यक्तिगत सूची बनायेंगे ही! तो यह तो नारद के लिये और चिट्ठाकारी के लिये भी गौरव की बात ही है। अंग्रेज़ी में कोई एक नारद है क्या? नहीँ। तो यह तो विस्तार की परिणति है ही। वैसे मैं भी कई दिनों तक, और कभी कभी आज भी अपना व्यक्तिगत फीड एग्रीगेटर प्रयोग करता हूँ, उसमें हिंन्दी चिट्ठे भी शामिल हैं, अंग्रेज़ी, तकनीकी व अन्य रुचियों के भी, और इसके लिये मैं गूगल की सेवाओं का प्रयोग करता हूँ।


इस के बावजूद भी, नारद का अपना अलग ही महत्व बना रहेगा, और है भी - ऐतिहासिक कारणों से भी और अपने उत्तरदायित्व का सम्यक निर्वहन करने के लिये भी। 

तो मित्रों, नारद से आंशिक रूप से जाने को मुक्त विचारधारा और विस्तार की ही परिणति मानें। और एक रहस्य यह भी - जब यह प्रचलित हो जायेगा कि लोग अपने फीड एग्रीगेटर का प्रयोग अधिक करते हैं तो वे चिट्ठे जो नारद पर एक मशीनी रूप में अनवरत प्रवाह के रूप में और मात्र आपसी वार्ता के रूप में प्रकाशित होते रहते हैं, उनकी संख्या भी मर्यादित हो जायेगी। अक्सर हम अपने चिट्ठों को आपसी वार्ता का माध्यम बनाने लग जाते है - जिसके लिये अन्य तंत्र चिट्ठे से अधिक उपयुक्त होते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे विचार से नारद (जो कि एक सराहनीय फीड एग्रीगेटर) है, उसे छोड़ना कोई बुरी बात नहीं। यह तो नारद का सम्मान है कि उसने इतना प्रेरित किया लोगों को कि कई चिट्ठाकार उससे नये / पुराने चिट्ठों का संकलन देखकर प्रेरित होते रहे और पिछले कुछ महीनों में चिट्ठाकारों (और आलेखों) में अपेक्षित  अप्रत्याशित  वृद्धि हुई।<br />
अब जब चिट्ठे और चिट्ठाकार बढ़ेंगे तो लोग अपनी व्यक्तिगत सूची बनायेंगे ही! तो यह तो नारद के लिये और चिट्ठाकारी के लिये भी गौरव की बात ही है। अंग्रेज़ी में कोई एक नारद है क्या? नहीँ। तो यह तो विस्तार की परिणति है ही। वैसे मैं भी कई दिनों तक, और कभी कभी आज भी अपना व्यक्तिगत फीड एग्रीगेटर प्रयोग करता हूँ, उसमें हिंन्दी चिट्ठे भी शामिल हैं, अंग्रेज़ी, तकनीकी व अन्य रुचियों के भी, और इसके लिये मैं गूगल की सेवाओं का प्रयोग करता हूँ।</p>
<p>इस के बावजूद भी, नारद का अपना अलग ही महत्व बना रहेगा, और है भी &#8211; ऐतिहासिक कारणों से भी और अपने उत्तरदायित्व का सम्यक निर्वहन करने के लिये भी। </p>
<p>तो मित्रों, नारद से आंशिक रूप से जाने को मुक्त विचारधारा और विस्तार की ही परिणति मानें। और एक रहस्य यह भी &#8211; जब यह प्रचलित हो जायेगा कि लोग अपने फीड एग्रीगेटर का प्रयोग अधिक करते हैं तो वे चिट्ठे जो नारद पर एक मशीनी रूप में अनवरत प्रवाह के रूप में और मात्र आपसी वार्ता के रूप में प्रकाशित होते रहते हैं, उनकी संख्या भी मर्यादित हो जायेगी। अक्सर हम अपने चिट्ठों को आपसी वार्ता का माध्यम बनाने लग जाते है &#8211; जिसके लिये अन्य तंत्र चिट्ठे से अधिक उपयुक्त होते हैं।</p>
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