८० के दशक के एक इन्जीनियरिंग के छात्र के हिसाब की डायरी के कुछ पृष्ठ देखिये….
** हिसाब बिल्कुल अनियमित तरीके से लिखा गया है और एसा लगता है कि माँ के कहने पर ही कभी कभार लिख लिया जाता होगा..हर दूसरे हिसाब के साथ एक्- दो फिल्मों का जिक्र जरूर है!
दि.३१-५-८१
सुरेश गुप्ता को ६ रू. दिये.
केशव से ३ रू. दूध के लेना है.
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दि. १ से ५ तक का कुल खर्च २० रू.
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एडमिशन फीस– १४७ रू.
७० रू. खाना बनाने का सामान.
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दि.२४-८-८१
२३ रू.- डॉक्टर + दवाई
५.६० रू. बस का किराया.
३.२० रू. फिल्म.
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१० रू. किताबें.
१० रू. कोलगेट + साबुन + सेल.
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अरे यह हमारी डायरी आपके हाथ कैसे लग गयी.
दीपक जी क्या इंजीनियर हैं?
@ काकेश,
ये यूनिवर्सल किस्म का पृष्ठ है शायद!
@ उन्मुक्त जी, ये आपत्तिजनक प्रश्न है.:)
namaste rachana jee.
kya karein hamein hindi padhna nahi aata isi liye comment nahi chod sakhte post pe.but socha aapka haal chal poochta hua chaloon.
kya haal hai? i hope things are fine a tur end.
take care..God bless you&ur family
@ nabeel, nice to see you after so long… thanks for your wishes..
achchee khaasee to hindi likh lete ho! can’t yoy see hindi fonts?