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अजनबी कौन हो तुम? :) February 27, 2008

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
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डरो नही अजनबी!! तुम जो भी हो..मै तुम्हे सिर्फ शुक्रिया कहना चाहती हूँ :)

तुम मुझे खुशी देते हो.. क्यों कि तुम एक जादुई अंक मे हर दिन इजाफा करते हो…
अक्सर ये अंक  मेरी दो पोस्ट के बीच १०० अंक तक बढ जाता है..

तुम मुझे लिखने का हौसला दिलाते रह्ते हो.:)  लगता है कोई तो है जो ये पढेगा..

जब मै नया नही भी लिखती तब भी तुम मेरे “एतिहासिक” पन्ने( अरे!! अब जो गुजर गया है, वो एतिहासिक ही हुआ ना? :) ) पढते हो!

अजनबी! ( इस चिट्ठे के वे पाठक जो यहाँ से पढकर चले जाते हैं, बिना टिप्पणी किये..एसा होता है! मुझे पता है! )
शुक्रिया इन सारी बातों के लिये…

आया करो मुझे ये अहसास दिलाने के लिये कि …रहें ना रहें हम..महका करेंगे.…. :)
—–
दरअसल अभी जब मै नया कुछ नही लिख रही हूँ, तो मुझे अन्य चिट्ठे पढकर टिप्पणी करनी चाहिये….. लेकिन मै इन दिनो, वो “राइटर्स ब्लॉक” किस्म की बीमारी “रीडर्स ब्लॉक” और उससे भी ज्यादा ” कमेंटर्स ब्लॉक” से जूझ रही हूँ. :) मै कई चिट्ठों पर गई लेकिन यूँ ही वापस लौट आई.टिप्पणी करने मे मजा नही आता जब पढकर एकदम “दिल से!” कुछ कहने को मन न करे..
इन बीमारियों से निजात पाते ही आती हूँ आपके चिट्ठे पर :).

चिट्ठों से पूरी तरह से  दूर रह पाना मुश्किल सा लगता है :)

 कभी कभी हमे एसे कुछ पढने को मिल जाता है मानो हमारे ही विचारों को किसी ने शब्द दे दिये हों..या कभी टिप्पणी मे कोई ठीक वही कह देता है, जो हम सुनना चाह्ते हैं…

..ये चिट्ठों की अनोखी दुनिया है जो कभी कभी “अपनो की, अपनो के द्वारा, अपनो के लिये” किस्म की लगती है…….

वैसे आप कहाँ के हैं? February 23, 2008

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
17 comments

पिछले दिनों मेरा शहर गलत वजहों से देश भर मे चर्चा का विषय रहा….हिन्दी भाषी लोग सहमे हुए थे, खासकर मजदूर वर्ग…कल एक दूकान मे गयी वहाँ पता चला ६ लोग काम छोडकर चले गये हैं…बेकरी का नौकर हिन्दी बोल रहा था, मैने उससे पूछा कहाँ के हो? बडी अच्छी हिन्दी बोल रहे हो! तो हँस कर चुप ही रहा…कई औद्योगिक इकाइयों मे भी असर हुआ है…
ज्यादा गडबडी उसी क्षेत्र मे रही जहाँ मेरा घर है..मेरी एक वृद्ध मित्र है, वे इंग्लैंड की हैं, नासिक मे कुछ सालों से रहती हैं. उन्हे हमारी चिन्ता हुई, फोन से पूछने लगी…

‘All this making headlines  in national news paper. It must be a serious issue…are you people also thinking of going back to your state?’

आज के दौर के आदमी के लिये ये अब ये आम बात है कि वो रहता कहीं और है और होता कहीं और का है…
मै पिछले कई सालों से महाराष्ट्र मे रह रही हूँ, मै और घर के सभी लोग अच्छी खासी मराठी बोल लेते हैं.हम लोग कई महाराष्ट्रीयन त्योहार भी मनाने लगे हैं… हमे मराठी आती है तो पिटने का डर नही है…. :)

लेकिन मै सुदामा के लिये चिन्तित हूँ.…सुदामा हमारी गाँव के तरफ का लडका है.. 

उसने “जन प्रतिनिधियों” की मेहरबानी से छोटे छोटे गाँवों मे खुल रहे इन्जीनीयरिंग कालेज की तरह के एक कालेज से इन्जीनीयरिंग की पढाई की है…वो बहुत गरीब परिवार से है..उसकी चार साल की पूरी पढाई बैंक से लिये कर्ज पर ही हो पाई..यहाँ तक की उसका मकान, जिसमे उसके माता-पिता, भाई और दादी रहते हैं, भी गिरवी रखा है..

वो निराशा से कहता है कि उनके दुर्भाग्य से उनका गांव सरदार सरोवर बाँध” की वजह से डूब मे नही जा रहा, अगर डूब मे जाता तो उन्हे थोडा-बहुत मुआवजा तो मिल जाता!

वो आरक्षित जाति का भी नही है….
…वो अपने प्रदेश से पहली बार बाहर निकल कर नौकरी की तलाश मे यहाँ आया तो हमारे एक रिश्तेदार ने उसे हमारा पता दिया था….उसे मराठी जरा भी समझ मे नही आती थी… उसे कई तरह की सामान्य जानकारी भी नही थी..अन्ग्रेजी भी कमजोर है…लेकिन ये उसका नही बल्कि उसके सामाजिक परिवेश का दोष है…वो सीखना चाहता है..सीख रहा है…अक्सर शाम को आकर् मुझसे पूछता है- ‘ इसे इंग्लिश मे क्या कहेंगे?’  उसकी किस्मत से उसे जल्दी ही अपेक्षा से बहुत अच्छी नौकरी मिल गयी…वो बहुत खुश है कि अब जल्दी ही उसके घर के लिये सब कुछ सुधर जायेगा…..

मै चाह्ती हूँ कि उसके और उस जैसों के लिये सब सुधर जाये….
ये दौर है छोटे शहरों के, कम सुविधाओं वाली जगह से आये धोनी, इरफान और आर पी सिंह का!!

“बिग बाजार” वाले लोग सामाजिक समानता लाने की कोशिश कर रहें हैं ( वे कहते हैं कि उनके मॉल मे कार वाले साहब और उनका ड्राइवर दोनो एक साथ खडे होकर खरीददारी करते हैं!)…”डक्कन एअरलाईन्स” के मालिक ने पहली बार ये सोचा कि भारत की मध्यम वर्गीय आबादी भी हवाई यात्रा कर सकती है!

अगर मेरी ही बात करूँ तो जब मै ब्लॉग जगत से परिचित हुई, तब मैने ज्यादातर लेखकों के नाम के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों और बडे शहरों के नाम की तख्ती देखी…अच्छी भाषा और जानकारी के साथ आत्मविश्वास से भरा लेखन दिखा…..

मुझे ये मान लेने मे कोई संकोच नही कि मुझे…..”yes-no”,this-that”, “and-but” जितनी अन्ग्रेजी आती है . :) :)   वो भी मैने अखबार और न्यूज चैनल से सीखी है…लेकिन जब अपनी लिखी पन्क्तियाँ अपने मित्र को दिखाई तो उनकी कही ये बात मेरे लिये प्रेरक रही—
At times raw is far better than polished!! just go ahead!!

मैने ब्लॉग लिखना शुरु किया और मेरी तो चल पडी! :)  मेरा लिखा उन्होने भी पसंद किया जिनकी अन्ग्रेजी मुझे ज्यादा समझ नही आती थी. :)

तो ये दौर है किसी भी तरह की प्रतिभा के उन्मुक्त विस्तार का!

लेकिन कुछ लोग हैं जो पिछडे हुओं को साथ लेकर चलना नही चाहते…

भगवान का शुक्र है अमेरिका मे कोई “सिलीकॉन वैली नव निर्माण सेना” नही है!!  वरना मेरे भाईयों का क्या होगा? :)

जन्मदिन मुबारक!! February 15, 2008

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
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आज मेरी बेटी का जन्मदिन है…
आज के दिन उसके लिये मै ये पन्क्तियाँ दोहराना चाह्ती हूँ,

जो कभी किसी ने मेरे लिये कही थीं…..

“हर नये दिन, नई उमंग के साथ,
एक नई जिन्दगी का कर आगाज़!
आसमाँ को न देख हसरत से,
उड! के तुझमे ताकत-ए-परवाज़!!”
……..

उसे गाढे, जीवन से भरपूर रंग पसँद हैं..  उसका बनाया ये चित्र.. शायद आपको भी पसँद आये….

  

उसकी आवाज सुनना पसँद करें तो यहाँ पर है…

..इस बार उसका ये जन्मदिन, उसकी दीदी के बिना है लेकिन उसने इस कड्वे सच को मुझसे बेहतर तरीके से स्वीकारा है…पूर्वी के हमेशा के लिये खो जाने के बाद उसी ने मुझसे कहा था- ‘मम्मी रोओ मत, दीदी तारा बन गई है!’..और मैने इसे ही सच

मान  लिया……..

——————

*** इस पोस्ट के लिये एक खास मित्र को खास धन्यवाद, एक छोटी सी -बहुत बडी सहायता करने के लिये :)
*** Thanks  Aashu for clicking those pictures and sending them to me…

तो कुछ लिखते क्यों नही??…. February 6, 2008

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
16 comments

*** ब्लॉग जगत और ब्लॉग विधा पर एक विज्ञापनीय दृष्टि……

गम्भीर चर्चाओं से जरा हटकर आईये और लीजिये मेरे साथ

एक छोटा सा कमर्शियल ब्रेक… :)


** जीवन की परेशानियों, विचारों की उथल पुथल और अभिव्यक्ति की कुलबुलाहट से परेशान????

तो कुछ लिखते क्यों नही??
जाइये - ब्लॉगस्पॉट या वर्डप्रेस ( या कोई और डोमेन) के पास जाईये, अपना एक ब्लॉग बनाईये, रोज एक पोस्ट लिखिये और इन तमाम परेशानियों से तुरन्त  निजात पाईये!

——-
** वाह —– बाबू! नया ब्लॉग!
नया टेम्पलेट !!
नया सर्विस प्रोवाइडर भी!!!
बढिया है!!

——–

** नये ब्लॉगर हैं!
एडसेन्स वाले हैं!!!
——–

** इन्डिया मे एड्वाइज बहुत दी जाती है!

इस बात पर एड्वाइज  ,उस बात पर एड्वाइज  ,हर बात पर

एड्वाइज ही एड्वाइज..
इसी काम के पैसे लगें तो?

यही तो!!!
ब्लॉग बना लीजिये!
और जी भर कर  दीजिये और लीजिये एड्वाइज ही एड्वाइज!!!
बिल्कुल मुफ्त्!!

बोल इन्डिया!! बोल!!!

—–

** दीवारें टूट जाती हैं, फासले मिट जाते हैं, जब दो बातें हो जाती

हैं……….

——-

** इनके लिये ये पुरस्कार…
उनके लिये वो सम्मान….
और मेरे लिये???? :)
——

** कभी कभी कुछ विवाद हो जाते हैं. तब इस विज्ञापन की तरह का द्र्ष्य उभरता है-जब रास्ते मे चलते वक्त नन्ही लडकी ( नया ब्लॉगर )के उपर कीचड उड जाता है और उसका मित्र (कोई वरिष्ठ चिट्ठाकार ) कीचड को लगातार पीटते हुए कहता है- सॉरी बोल! सॉरी बोल! सॉरी बोल! 

अब वो तो सॉरी बोलने से रहा,तब  खुद ही कहने लगता है -

सॉरी बोल रहा है! सॉरी बोल रहा है!
—–
और अन्त मे इतनी गुस्ताखी की और इजाजत दे दें–

** ये मेरे उन स्नेही जनो के लिये खास तौर पर है जो ब्लॉगर

नही हैं, लेकिन जो इस ब्लॉग के नियमित पाठक हैं..
(**फिल्म “प्यासा” के इस मशहूर गीत के बोल मैने इस्तेमाल किये हैं अत्: गीतकार से क्षमा सहित)
सर जो तेरा चकराये या दिल डूबा जाये
आजा प्यारे ब्लॉग बना ले, काहे घबराये, काहे घबराये
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……

बात हो तेरी अपनी, या फिर इसकी उसकी
शब्दजाल मे उलझा करके, मौज तू ले ले सबकी!
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……
 
प्यार का होवे झगडा या बिजनेस का हो रगडा,
सब लफडों का बोझ हटे जब लिखे यहाँ तू तगडा!
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……

नौकर हो या मालिक, लीडर हो या पब्लिक
ब्लॉग हैं इनके सबके अपने, क्या राजा क्या सैनिक!
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……
——–

ओहो!!  इतना समझाने पर भी हिचकिचा रहे हैं?
देखिये, ब्लॉगर स्वभावत: चिन्तक और आदतन उपदेशक होता है और भारतीय होने के नाते ये दोनो गुण आपमे हैं ही… तो गुरु हो जाईये शुरु!! :)