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तो कुछ लिखते क्यों नही??…. February 6, 2008

Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.
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*** ब्लॉग जगत और ब्लॉग विधा पर एक विज्ञापनीय दृष्टि……

गम्भीर चर्चाओं से जरा हटकर आईये और लीजिये मेरे साथ

एक छोटा सा कमर्शियल ब्रेक… :)


** जीवन की परेशानियों, विचारों की उथल पुथल और अभिव्यक्ति की कुलबुलाहट से परेशान????

तो कुछ लिखते क्यों नही??
जाइये - ब्लॉगस्पॉट या वर्डप्रेस ( या कोई और डोमेन) के पास जाईये, अपना एक ब्लॉग बनाईये, रोज एक पोस्ट लिखिये और इन तमाम परेशानियों से तुरन्त  निजात पाईये!

——-
** वाह —– बाबू! नया ब्लॉग!
नया टेम्पलेट !!
नया सर्विस प्रोवाइडर भी!!!
बढिया है!!

——–

** नये ब्लॉगर हैं!
एडसेन्स वाले हैं!!!
——–

** इन्डिया मे एड्वाइज बहुत दी जाती है!

इस बात पर एड्वाइज  ,उस बात पर एड्वाइज  ,हर बात पर

एड्वाइज ही एड्वाइज..
इसी काम के पैसे लगें तो?

यही तो!!!
ब्लॉग बना लीजिये!
और जी भर कर  दीजिये और लीजिये एड्वाइज ही एड्वाइज!!!
बिल्कुल मुफ्त्!!

बोल इन्डिया!! बोल!!!

—–

** दीवारें टूट जाती हैं, फासले मिट जाते हैं, जब दो बातें हो जाती

हैं……….

——-

** इनके लिये ये पुरस्कार…
उनके लिये वो सम्मान….
और मेरे लिये???? :)
——

** कभी कभी कुछ विवाद हो जाते हैं. तब इस विज्ञापन की तरह का द्र्ष्य उभरता है-जब रास्ते मे चलते वक्त नन्ही लडकी ( नया ब्लॉगर )के उपर कीचड उड जाता है और उसका मित्र (कोई वरिष्ठ चिट्ठाकार ) कीचड को लगातार पीटते हुए कहता है- सॉरी बोल! सॉरी बोल! सॉरी बोल! 

अब वो तो सॉरी बोलने से रहा,तब  खुद ही कहने लगता है -

सॉरी बोल रहा है! सॉरी बोल रहा है!
—–
और अन्त मे इतनी गुस्ताखी की और इजाजत दे दें–

** ये मेरे उन स्नेही जनो के लिये खास तौर पर है जो ब्लॉगर

नही हैं, लेकिन जो इस ब्लॉग के नियमित पाठक हैं..
(**फिल्म “प्यासा” के इस मशहूर गीत के बोल मैने इस्तेमाल किये हैं अत्: गीतकार से क्षमा सहित)
सर जो तेरा चकराये या दिल डूबा जाये
आजा प्यारे ब्लॉग बना ले, काहे घबराये, काहे घबराये
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……

बात हो तेरी अपनी, या फिर इसकी उसकी
शब्दजाल मे उलझा करके, मौज तू ले ले सबकी!
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……
 
प्यार का होवे झगडा या बिजनेस का हो रगडा,
सब लफडों का बोझ हटे जब लिखे यहाँ तू तगडा!
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……

नौकर हो या मालिक, लीडर हो या पब्लिक
ब्लॉग हैं इनके सबके अपने, क्या राजा क्या सैनिक!
सुन सुन सुन अरे बाबा सुन,
इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण,
लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए
काहे घबराये, काहे घबराये
सर जो तेरा चकराये ……
——–

ओहो!!  इतना समझाने पर भी हिचकिचा रहे हैं?
देखिये, ब्लॉगर स्वभावत: चिन्तक और आदतन उपदेशक होता है और भारतीय होने के नाते ये दोनो गुण आपमे हैं ही… तो गुरु हो जाईये शुरु!! :)

Comments»

1. sujata - February 6, 2008

bahut khoob!!

2. अफ़लातून - February 6, 2008

बहुत खूब ।

3. जगदीश भाटिया - February 6, 2008

Maja aa gaya :-D

4. रवि - February 6, 2008

आपको ब्लॉग-विज्ञापन एजेंसी नहीं खोल लेनी चाहिए? एक से बढ़कर एक पंचलाइनें. एक से बढ़कर एक मजेदार :)

5. प्रियंकर - February 6, 2008

क्या बात है !

6. kakesh - February 6, 2008

मस्त..जबरदस्त..

7. Sanjeet Tripathi - February 6, 2008

बड़े दिनों बाद लिखा आपने लेकिन लिखा तो शानदार लिखा!!
मजा आ गया पढ़कर!!

8. उन्मुक्त - February 6, 2008

‘इस ब्लॉग मे बडे बडे गुण, लाख दुखों की एक दवा है क्यूँ न आजमाए’ - वाह क्या बात है।

9. mamta - February 6, 2008

लाजवाब! :)

10. मीत - February 6, 2008

मस्त है.

11. समीर लाल - February 10, 2008

बहुत उम्दा-अब सर चकराने के पहले ही लिखने बैठ जाता हूँ. :)

12. अनूप शुक्ल - February 11, 2008

सुन्दर! रवि रतलामी जी की बात पर गौर किया जाये।

13. Dawn - February 12, 2008

MashaAllah! kya post likhi hai Rachana ji….yakeen maniye…mujhe dobara dekhna para ke ye Rachana ji ki hee blog per tashrif laaye hein ke kaheen aur :)
Waqai aapki taraf se ye post parhkar waqai dil ko bahut tasalli zaroor hui lekin jo hasanya aapne ooske to waqai paise lagte hein …sach kahhein to :)

Khush rahein aur dua yehi karte hein ke aap muskurayein sada aur humein bhi oon muskurahaton mein shamil kar lijiyega :)

Duaon mein yaad rakhiyega
aapki tippani parhi aur dil ko laga iss se behatar koi aur tippani hamare nazar mein ho hee nahi sakti. Aapki baaton se jo hausla mila hai woh shayad mein hee jaanti hoon aur haan aapne meri pustak ke cover page per jo tippani likhi hai oos se yehi gyaat hota hai ke aap humein bahut acche se samajhti hein :)
dua hee dua
Shukriya dost

14. मनीष - February 13, 2008

बहुत अच्छा idea इस्तेमाल किया आपने।

15. रचना - February 14, 2008

आप सभी को बहुत मजा आया, ये जानकर मै बेहद खुश हूँ!!

@ रवि भाई, ये काम तो मैने बिना एड अजेन्सी खोले ही किया था..सब हिन्दी ब्लॉग के लिये पन्क्तियाँ लिखी थी..याद है!!! वैसे आइडिया अच्छा है!

@ मनीष जी, शुक्रिया! क्रिएटिव कमेंट के लिये :)

16. रचना - February 14, 2008

@ डॉन, माशाअल्लाह!!! क्या तारीफ की है आपने हमारी!! हम बेहद खुश हुए दोस्त्!
आप हमारी खुशी और दुआओं मे शामिल है हमेशा!