वैसे आप कहाँ के हैं? February 23, 2008
Posted by rachanabajaj in अश्रेणीबद्ध.trackback
पिछले दिनों मेरा शहर गलत वजहों से देश भर मे चर्चा का विषय रहा….हिन्दी भाषी लोग सहमे हुए थे, खासकर मजदूर वर्ग…कल एक दूकान मे गयी वहाँ पता चला ६ लोग काम छोडकर चले गये हैं…बेकरी का नौकर हिन्दी बोल रहा था, मैने उससे पूछा कहाँ के हो? बडी अच्छी हिन्दी बोल रहे हो! तो हँस कर चुप ही रहा…कई औद्योगिक इकाइयों मे भी असर हुआ है…
ज्यादा गडबडी उसी क्षेत्र मे रही जहाँ मेरा घर है..मेरी एक वृद्ध मित्र है, वे इंग्लैंड की हैं, नासिक मे कुछ सालों से रहती हैं. उन्हे हमारी चिन्ता हुई, फोन से पूछने लगी…
‘All this making headlines in national news paper. It must be a serious issue…are you people also thinking of going back to your state?’
आज के दौर के आदमी के लिये ये अब ये आम बात है कि वो रहता कहीं और है और होता कहीं और का है…
मै पिछले कई सालों से महाराष्ट्र मे रह रही हूँ, मै और घर के सभी लोग अच्छी खासी मराठी बोल लेते हैं.हम लोग कई महाराष्ट्रीयन त्योहार भी मनाने लगे हैं… हमे मराठी आती है तो पिटने का डर नही है….
लेकिन मै सुदामा के लिये चिन्तित हूँ.…सुदामा हमारी गाँव के तरफ का लडका है..
उसने “जन प्रतिनिधियों” की मेहरबानी से छोटे छोटे गाँवों मे खुल रहे इन्जीनीयरिंग कालेज की तरह के एक कालेज से इन्जीनीयरिंग की पढाई की है…वो बहुत गरीब परिवार से है..उसकी चार साल की पूरी पढाई बैंक से लिये कर्ज पर ही हो पाई..यहाँ तक की उसका मकान, जिसमे उसके माता-पिता, भाई और दादी रहते हैं, भी गिरवी रखा है..
वो निराशा से कहता है कि उनके दुर्भाग्य से उनका गांव सरदार सरोवर बाँध” की वजह से डूब मे नही जा रहा, अगर डूब मे जाता तो उन्हे थोडा-बहुत मुआवजा तो मिल जाता!
वो आरक्षित जाति का भी नही है….
…वो अपने प्रदेश से पहली बार बाहर निकल कर नौकरी की तलाश मे यहाँ आया तो हमारे एक रिश्तेदार ने उसे हमारा पता दिया था….उसे मराठी जरा भी समझ मे नही आती थी… उसे कई तरह की सामान्य जानकारी भी नही थी..अन्ग्रेजी भी कमजोर है…लेकिन ये उसका नही बल्कि उसके सामाजिक परिवेश का दोष है…वो सीखना चाहता है..सीख रहा है…अक्सर शाम को आकर् मुझसे पूछता है- ‘ इसे इंग्लिश मे क्या कहेंगे?’ उसकी किस्मत से उसे जल्दी ही अपेक्षा से बहुत अच्छी नौकरी मिल गयी…वो बहुत खुश है कि अब जल्दी ही उसके घर के लिये सब कुछ सुधर जायेगा…..
मै चाह्ती हूँ कि उसके और उस जैसों के लिये सब सुधर जाये….
ये दौर है छोटे शहरों के, कम सुविधाओं वाली जगह से आये धोनी, इरफान और आर पी सिंह का!!
“बिग बाजार” वाले लोग सामाजिक समानता लाने की कोशिश कर रहें हैं ( वे कहते हैं कि उनके मॉल मे कार वाले साहब और उनका ड्राइवर दोनो एक साथ खडे होकर खरीददारी करते हैं!)…”डक्कन एअरलाईन्स” के मालिक ने पहली बार ये सोचा कि भारत की मध्यम वर्गीय आबादी भी हवाई यात्रा कर सकती है!
अगर मेरी ही बात करूँ तो जब मै ब्लॉग जगत से परिचित हुई, तब मैने ज्यादातर लेखकों के नाम के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों और बडे शहरों के नाम की तख्ती देखी…अच्छी भाषा और जानकारी के साथ आत्मविश्वास से भरा लेखन दिखा…..
मुझे ये मान लेने मे कोई संकोच नही कि मुझे…..”yes-no”,this-that”, “and-but” जितनी अन्ग्रेजी आती है .
:) वो भी मैने अखबार और न्यूज चैनल से सीखी है…लेकिन जब अपनी लिखी पन्क्तियाँ अपने मित्र को दिखाई तो उनकी कही ये बात मेरे लिये प्रेरक रही—
At times raw is far better than polished!! just go ahead!!
मैने ब्लॉग लिखना शुरु किया और मेरी तो चल पडी! :) मेरा लिखा उन्होने भी पसंद किया जिनकी अन्ग्रेजी मुझे ज्यादा समझ नही आती थी.
तो ये दौर है किसी भी तरह की प्रतिभा के उन्मुक्त विस्तार का!
लेकिन कुछ लोग हैं जो पिछडे हुओं को साथ लेकर चलना नही चाहते…
भगवान का शुक्र है अमेरिका मे कोई “सिलीकॉन वैली नव निर्माण सेना” नही है!! वरना मेरे भाईयों का क्या होगा? ![]()
परताबगढ़ के
हम तो कान्हैपुर के हैं। वैसे आपको अंग्रेजी काफ़ी काम भर की आती है। लिखा भी अच्छा है।
सही समय पर सही बात कुछ मैंने भी लिखा है इस पर यह भी पढें http://merekavimitra.blogspot.com/2008/02/blog-post_22.html
हम गोरखपुरिया हईन!!
चिन्ता भी जायज सी है…
मैं दिल्ली में रहता हू रांची का हू दैनिक जागरण में काम करता हू गाड़ी अच्छी चलता हू ट्रैफिक नियम जनता हू लेकिन यह के Lt Governor को लगता है की मैं ट्रैफिक नियम का पालन नही करता? इसलिए की मैं उत्तर भारतीय हू
“तो ये दौर है किसी भी तरह की प्रतिभा के उन्मुक्त विस्तार का!
लेकिन कुछ लोग हैं जो पिछडे हुओं को साथ लेकर चलना नही चाहते…”
बहुत सही कहा आपने .
अपन सहमत है
bahut sahi likha………. par kuch teekhapan bhi hotaa to aur majja aata…….. un logo par seedhaa vaar honaa chahiye jinho ye sab kiya
jo ki sirf aur sirf galat hai ………….
aaj wo baat Rajyo ki kar rhe hai
kal sharho ki fir mahalllo ki karnge……… desh waise darm mein bata hai…….. ab jamin ke bhi hisse hone lage to fir holiya vishak
saadar
hem jyotsana
http://hemjyotsana.wordpress.com
http://hemjyotsana.com
बहुत सही लिखा आपने!!
Samjho hame waheen ke.. dil ho jahan humaara……..
paidaish.. Gujarat… bachpan… Himachal Pradesh…naukri .. Delhi or ghar….Faridabad( Haryana)
बड़ी दुखद घटना रही ये। बाहर से तो बहुत लोग आए होंगे पर हिंसा का शिकार ज्यादा लोग असंगठित क्षेत्र के मजदूर रहे होंगे।
चलिए हम भी बता देते है हम है इलाहाबाद के।
बहुत सही फरमाया है आपने। मेरे जैसे हजारों लोगों के दिल की बात कह दी है आपने। कुछ ऐसे ही विचारों से रू-ब-रू हो सकती हैं http://manglam-manavi.blogspot.com/ आप पर।
Ye khabar humein khabar lagi :)…dukhad hai kintu!

Kher ab aap humse ye poochenge ke hum kahaan ke hein to bahut mushkil hai samjhana :D…hum to iss duniya ke wasi hein…kyun? ghalat kaha?
Aapki post acchi lagi
Likhte rahein
Cheers
Waise ek baat batana bhul gaye… kaheen ek radio-blog aapka intezaar kar raha hai
“kal chaudhaveen ka chaand” aur “sarakti jaye hei”… enjoy
** आप सब लोग अलग अलग जगह के हैं और रहते भी बहुत अलग अलग जगह हैं!! और ये मै मान रही हूँ कि आप भी मेरी चिन्ता से सहमत हैं.
)और सभी नये लोगों ( जो पहली बार यहाँ आये हैं !) की टिप्पणियों के लिये बहुत धन्यवाद..
सभी पुराने लोगों ( जो यहाँ पहले भी आते रहे हैं
@ डॉन, हाँ जी हमे पता है कि आप सारे जहाँ की हैं! और सारी भाषाएँ आपकी हैं !:)इसलिये पूछेंगे नही..
बाकी बातों के लिये बहुत शुक्रिया.
JI MAIN BIHAR KE BEGUSARAI KA HUN.APKE BHAAV BHARE LEKHANI KO PADHA.BAHUT KHUSHI HUI.JUST GO AHEAD…
बहुत सही फरमाया है आपने। मेरे जैसे हजारों लोगों के दिल की बात कह दी है आपने। कुछ ऐसे ही विचारों से रू-ब-रू हो सकती हैं चलिए हम भी बता देते है हम है SARNAU के। DHANJI DEWASI ( JALORE )
PASUPALAK PROKOSH MEMBER JAIPUR -
BJP SANCHORE JALORE