……. कभी कभी ऐसा होता है कि किसी इन्सान को हम धीरे धीरे, परत दर परत पह्चानने लगते हैं तब कई बातें पता लगती हैं, जो हमे चौकाती हैं और उस इन्सान से हुई पहली मुलाकातों से बनी छवि से कुछ अलग होती है…… यानि कई बार बाहरी इन्सान के अन्दर उससे कुछ अलग सा एक और इन्सान होता है…… यानि कभी अपनी नरम छवि से कहीं अधिक कठोर और कभी अपनी कठोर छवि से कहीं अधिक नरम!
” दुनिया मे अपनी पह्चान से अलग,
इन्सान के अन्दर एक और इन्सान होता है!
सामाजिक व्यवहार के अपने कानून कायदे होते हैं,
इसलिये अपनी छवि के साथ असली “मै” को ढोता है!
सबसे अलग चलना आसान नही होता,
इसलिये भीड मे शामिल हो वो ” मै” को खोता है!
दिन की छवि को अपने सिरहाने रख,
रात को अपने “मै” के साथ सोता है!
दुनिया उसे हर समय खुश देखती हो मगर,
अपने अकेले क्षणों मे वो भी कभी रोता है!
दुनिया मे अपनी पह्चान से अलग,
हर इन्सान के अन्दर एक और इन्सान होता है!
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दुनिया मे अपनी पह्चान से अलग,
हर इन्सान के अन्दर एक और इन्सान होता है!
और उससे कभी-कभी ही मुलाकात हो पाती है!
sahi baat sunder rachana badhai
” दुनिया मे अपनी पह्चान से अलग,
इन्सान के अन्दर एक और इन्सान होता है!
जिसका दीदार शायद नहीं हो पाता क्योकि मुखौटे दर मुखौटे से उसका असली चेहरा ही कहीं गुम हो जाता है
कभी हम छिपाए रखते हैं और कभी लोग देख नहीं पाते।
जो छवि लोग बना देते हैं बेचारे हम वही ढोते रहते हैं।
tabhi to kaha gaya hai ki
har aadami me hote hai das bees aadami,
jisko bhi dekhna ho kai baar dekhanaa…!
regards
रचना जी, सही बताया आपने। हम में से बहुत शायद विवशता वश करते हों और कुछ सामाजिक छवि के कारण। कुछ ऐसे भी होंगे जो दूसरों के हित के कारण ऐसा करते हैं।
अपने जैसे लोगों में व्यक्ति अपने वास्तविक मैं को प्रकट करने की कोशिश करता है। दरअसल मुझे तो यही लगता हे कि हमारे व्यक्तित्व के अनेक पहलू होते हैं और हम जिनके साथ होते हैं उनके साथ ापना वही पहलू खोलते हैं जिसमें हमारे संगी comfortable हों।
sabse pehale Janamdin ki shubhkamanayein Rachana ji



I am sure you will be having a good time with family
khush rahein sada yahee dua nikali hai mere dil se jab mein aapko sochti hoon
rahi nazm ki baat to waqai pehale do misre mein hee bahut gehareee baat kahi hai aapne
daad kabool farmayein
take care
Cheers
BAHUT SAHEE KAHA . DUNIYA KE SAATH TO HAMARE MUKHAUTE HEE DEAL KARTE HAIN . HAM KAHAN ?
सही कहा.
is bhoot ke bheetar baithe insaan ne….ya kahun ki is insaan ke bheetar baithe bhoot ne aapko aaj pahli baar men hi pahchaan gayaa…..jhuthi taarif nahin kartaa…sach men aapka lekhan kabile-taarif hai….!!
अनूप जी, महक, मिश्रा जी, अजित जी, कन्चन, राजीव जी, डॊन, राज जी, कौतुक,
आप सभी की टिप्पणियों के लिये बहुत धन्यवाद.
मनीष जी, आप बिल्कुल ठीक कहते हैं. मै सहमत हूं!
भूतनाथ जी, तारीफ़ के लिये बहुत धन्यवाद, आपका भी और आपके अन्दर या बाहर के भूत का भी!