अह्सास……

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कभी कभी हमारे अपने, हमसे कहीं दूर चले जाते हैं,
वो फ़िर कभी वापस लौट कर नही आ पाते हैं..

फ़िर भी उन्हे फ़िर पा जाने की आस बनी रहती है,
उनसे स्नेह की अनबुझी प्यास बनी रहती है….

लगता है वो आसपास ही पंचतत्वों मे समाये हुए हैं,
हमसे जुडी हर अच्छी बात मे छाये हुए हैं…
…………

“तुम उसे फ़िर पा जाने का अह्सास हो!
जैसे वो आज भी यहीं हमारे आस-पास हो!
तुम वो तो नही, लेकिन उसके जैसी ही,
हमारे लिये बहुत खास हो!

खोकर फ़िर खोजें ही नही- बहुत मुश्किल है,
खोने की बात मानता ही नही, ऐसा ये दिल है!
उसे खोकर फ़िर पा जाने की,
तुम , पूरी होती एक आस हो!

वो जमी से गुम है, आकाश से नही!
वो इस दुनिया मे न सही, कहीं और सही!
वो जिस भी दुनिया मे है, खुश है,
तुम इस बात का आभास हो!

जीवन है ये यूं ही बहेगा!
पाना खोना, यूं ही चलेगा!!
खो देने की निराशा के तम मे,
तुम एक सुखद उजास हो………….

तुम उसे फ़िर पा जाने का अह्सास हो!

जैसे वो आज भी यहीं हमारे आस-पास हो!

तुम वो तो नही, लेकिन उसके जैसी ही,
हमारे लिये बहुत खास हो!

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**  ये दोनो सुन्दर फ़ूलों के  सुन्दर चित्र एक मित्र के ्सौजन्य से लगा पाई हूं. शुक्रिया  मित्र!

Published in:  on May 3, 2009 at 5:30 pm Comments (12)

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12 Comments Leave a comment.

  1. लौट के चाहे वो न आये बचा रहे एहसास।
    देता है जीवन को ताकत कभी कभी इतिहास।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

  2. aapko kisi ka ehsaas mila hai , lekin kisi ko ek aur parivaar mil gaya hai . Aapki inn lines ne kisi ko itni khushi aur aapke dil mein jagah dee hai , ki main shabdo mein aapko thanks nahi keh sakta . Kuch keh sakta hoon to yehi – mere gulaabjamun ke paise milenge na ? ;)

  3. wow…ultimate…superb

    Meri Kalam – Meri Abhivyakti

  4. अशावादी पंक्तियाँ। प्रियजनों की स्मृतियों को रचनात्मक रूप से सहेजने के साथ ही उनके विछोह के दु:ख को सकारात्मक रूप में देखने का सार्थक प्रयास।

    पंक्तियों में इंगित मित्र/जन व ऐसे विचार और भावनाएं ही जीवन में दु:ख व बाधाओं के ऋणात्मक प्रभाव को क्षीण कर, आगे चलने का सम्बल बनती हैं।

  5. WAH!!!!bahut barhiya ehasaas aur woh bhi shabdon mein bayaan kar paye hein aap bas kya kahein …daad kabool farmayein janab aur zor-e-kalam aur jyada ;)

    Khush rahein sada
    Cheers

  6. बहुत सुन्दर. भावनाओं के सूक्ष्म एहसास को आपने बहुत सुन्दर परोसा है.आभार.

    गुलमोहर का फूल

  7. तुम उसे फ़िर पा जाने का अह्सास हो!
    जैसे वो आज भी यहीं हमारे आस-पास हो!
    तुम वो तो नही, लेकिन उसके जैसी ही,
    हमारे लिये बहुत खास हो!


    मनोभावों की सुन्दर अभिव्यक्ति..दिल को छू गई.

  8. अपने प्रियों को किसी ना किसी रूप में हम ढूँढ ही लेते हैं। अपनी भावनाओं को सहजता से व्यक्त किया है आपने…

  9. well…what shud i say…. You have taken us through a journey,..making us feel one with you in thought so wonderful that i have no words to explain…These words are relevant to each and every one of us… Thank you once again…as i always conclude by saying…Continue the great work you are doing..and make our lives meaningful and better in the way you can!!!

  10. आप लोगों से प्रेरणा लेकर हमने भी हिंदी मैं ब्लॉग लिखना शरू किया है. कृपया नीचे लिखे लिंक को क्लिक करें और अपने विचार बताएं…

    http://rahulkatyayan.wordpress.com/2009/05/04/जाग-मुसाफिर-भोर-भई/

    राहुल कात्यायन

  11. उम्र भर पढता रहूँ ऐसी कहानी देदो, एः मेरे यार कोई शाम सुहानी देदो.! आपका ब्लॉग पढ़के मुझे मेरी ख़ास दोस्ती की याद आ जाती हैं

  12. शुक्रिया मित्रों कि आप मेरे अहसास को समझ पाए!
    कॄपया मेरा शुक्रिया कबूल फ़रमाएं!! :)


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