कोई हर्ज नही……

यूं तो बताने से कोई फ़ायदा नही ,
फ़िर भी बता दूं तो कोई हर्ज नही!

तुम चाहो तो सुन लो, नही तो नही,
हर बात सुनना कोई फ़र्ज नही!

साथ हो मेरे तुम, ये यकीन ही बहुत है,
साथ साबित करो, कोई गर्ज नही!

जिये जिसके संग संग, मरें भी उसी संग,
जमाने की ऐसी कोई तर्ज नही!!

साथ है आज जो, वो कल भी रहेगा,
ऐसा तो नियम कोई दर्ज नही!

ये दर्द मेरा साथ जायेगा मेरे!
किसी दवा से कम हो ये वो मर्ज नही!

—————

Published in:  on August 3, 2009 at 10:53 am Comments (9)

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9 Comments Leave a comment.

  1. bahut hi khubsoorat bate kahai hai kawita ke maadhayam se jo ki aaj ke tarikha me aisee baate sunane ko bahut hi kam milati hai……..ek sundar khyalo ki sundar nazam

  2. तुम चाहो तो सुन लो, नही तो नही,
    हर बात सुनना कोई फ़र्ज नही!

    साथ हो मेरे तुम, ये यकीन ही बहुत है,
    साथ साबित करो, कोई गर्ज नही!

    ये दर्द मेरा साथ जायेगा मेरे!
    किसी दवा से कम हो ये वो मर्ज नही!

    bahut sundar bhav se likha didi….!

  3. Behtareen ! aaj ke yug ki dosti ki nabz bahut achhi tarah se pakdi hai aapne !

  4. nice post

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

  5. साथ हो मेरे तुम, ये यकीन ही बहुत है,
    साथ साबित करो, कोई गर्ज नही!

    वाह…मुश्किल काफिया निभाया है आपने वो भी बखूबी से…बधाई…
    नीरज

  6. एक बहुत अच्छी रचना जिसमे कोई कल्पना नहीं ,सब यथार्थ |बताने में कोई लाभ नहीं और बता भी दूं तो हर्ज़ नहीं |सुनो तो तुम्हारी मर्जी न सुनो तो मत सुनो “हम हाले दिल सुनायेंगे सुनिए के न सुनिए “”तुम साथ हो यह यकीन ही है जब तो फिर सबूत पेश करना नाहक है |ज़माने की ऐसी रीत ही नहीं है की जिसके साथ जिए मरें भी उसी के साथ जाने वाला कब साथ छोड़ कर कहाँ चला जाया करता है पता ही नहीं और खुद का भी कोई भरोसा नहीं है “”उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो ,न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जावे “”इसीलिये जो आज साथ है वाह कल भी रहेगा कोई ग्यारंटी नहीं है और दर्द, इसकी तो कुछ न पूछो कुछ दर्दों की दवाएं तो बनी ही नहीं है और फिर दर्द भी इतने कि “”वो मुझसे पूछते है दर्द कहाँ होता है ,अरे ,एक जगह हो तो बतादूँ कि यहाँ होता है |मुआफ करें टिप्पणी बडी हो गई ,ग़ज़ल ही कुछ ऐसी थी |

  7. तुम चाहो तो सुन लो, नही तो नही,
    हर बात सुनना कोई फ़र्ज नही!

    इतनी तरतीब से कोई कहे, तो सुनना तो फर्ज होना ही पड़ेगा.

    जो सुना उनको तो बस सुनते रहे
    दोस्ती का तकाज़ा कोई कर्ज नहीं.

    बहुत आनन्द आया पढ़कर.

    बिटिया रानी बड़ी हो रही है, नये जमाने का चलन तो हम सब उससे ही सीखेंगे.

    शुभकामनाऐं

    समीर

  8. सुन्दर! इतने दिन हो गये। नयी पोस्ट नहीं लिखी गयी! क्यों भाई?

  9. आप सभी को पन्क्तियां और भाव की अभिव्यक्ति पसंद आये, जानकर खुशी हुई..टिप्पणियों के लिये धन्यवाद!


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