हर तरह से तमाम हूं
मै खास नही, आम हूं!!
मै, मै हूं,
अनगिनत विचारों की कै हूं!
न पक्ष हूं, न विपक्ष हूं,
मै अपना ही गौण कक्ष हूं!
सवालों की फ़सल सींचता हूं,
हर खड़े हुए को खींचता हूं!
जवाबों का टोटा ( scarcity) हूं,
बिन पेंदे का लोटा हूं!
जिसे हर कोई बजा ले, मै वो धुन हूं,
गेहूं के साथ पिस जाने वाला घुन हूं!
रफ़्तार की लगाम हूं,
प्रगती पर लगा जाम हूं!
मै एक उजली आस हूं,
मै एक अथक प्रयास हूं!
मै अलगाव हूं, रूझान हूं,
जिम्मेदारी हूं, एहसान हूं!
तर्क, वितर्क, कुतर्क मेरा काम है,
बुद्धी नही विचारजीवी मेरा नाम है!!
…….
खास नही, आम हूं…..
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Kya behatreen bio data bana hai…
किसने कहा तुम आम हो?…….
तुम नहीं जानती तुम क्या हो ..
तुम आम नही ख़ास हो ….,
तमाम विचारशील लोगो कि बॉस हो ….
Archana ki tabiyat kharab chal rahi hai…uske comment ka bura mat lagana… haa haa!!
Dear Rachana, I could read your msgs dtd 15th just now and read your rachana. It is just like you – adorable and sweet.
ना कोई आम होता ना कोई खास ।
प्रर्कती,समय,अवशर,व्यवहार,वातावरण जो बनाता ह
वो ऐक आश हु
मै एक उजली आस हूं,
मै एक अथक प्रयास हूं!
ये भाग सबसे अच्छा है।
आप सभी को शुक्रिया!