jump to navigation

मेरा परिचय

नमस्कार!! मै रचना बजाज…मूलत: मध्यप्रदेश की हूँ. अभी नासिक (महा.) मे रहती हूँ.
परिवार के साथ ही देश और दुनिया मे कहाँ, क्या, क्यों और कैसे हो रहा है,थोडा सा समझने की कोशिश करती हूँ.अपनी सोच के साथ शब्दों की कसरत मुझे पसंद है सो कभी- कभी कुछ लिख भी लेती हूँ.साहित्य ज्यादा पढा नही है अत: मेरे लेखन की भाषा भी आमतौर पर बोल-चाल वाली आम भाषा ही होती है.जिस समय, जैसा भी सोच पाती हूँ और लिखने का मन करता है लिख देती हूँ.
आप खुद तय कर लीजियेगा कि ये लेख, निबन्ध है या कि कोई कविता है, मेरे लिये तो ये मेरे विचारों की अभिव्यक्ति और शब्दों की सरिता है!!

शिक्षा के बारे मे यह कहुँगी..

“निर्बल को अनदेखा कर जो कई कई मन्दिर बनवाए,
मेरी तुमसे ये विनती हे दानी उसको न कहा जाए.”
“अपनी शिक्षा को बाँटे ना और खुद मे ही जो खो जाए,
मेरी तुमसे ये विनती हे ज्ञानी उसको ना कहा जाए.”
“जो धनी बनुँ तो दान करुँ, शिक्षित हूँ तो बाटुँ शिक्षा
इस जीवन मे पाई है, बस इतनी ही मैने दीक्षा.”

(* इसका मतलब ये कतई नही लगाया जाय कि मेरे पास बहुत शिक्षा और धन है बाँटने के लिये!)

बस बाकी बातें फिर कभी……..

Comments»

1. समीर लाल - November 7, 2006

थोड़ा इस पन्ने पर भी मेहनत की जाये. :)

2. Shrish - November 24, 2006

सही है कुछ अपने बारे में भी बताइए।

3. लक्ष्मीकान्त शांखी - December 14, 2006

रचना जी, हमें शुरु से ही मारवाडी जात कन्जूस और मक्खीचूस लगता है। आपक इसके बारे में क्या खयाल है की खुद के बुनियादी जरूरतों को भी कन्जूसी के हवाले करन? जल्द जवाब की आशा में

4. लक्ष्मीकान्त शांखी - December 14, 2006

अपना फोटो डालिये

5. rachana - December 14, 2006

@ समीर जी और श्रीश जी, आपके कहे अनुसार ‘थोडा-सा कुछ’ लिख दिया है..

@ लक्ष्मीकांत जी, मै मारवाडी तो नही हूँ. और कन्जूस, मक्खीचूस कोई जात नही होती, लोग होते हैं!
बुनियादी जरूरतों की हर एक की अपनी अलग परिभाषा होती है! आप और हम कौन हुए किसी के बारे कुछ राय बताने वाले??

6. आशीष गर्ग - December 25, 2006

काफी अच्छी कविता है आपकी, आजकल यही तो हो रहा है कि दान न करने वाले दानी कहे जाते हैं चाहे वो धन हो या ज्ञान।

मैं तो खुद शिक्षा के क्षेत्र में हूं और देख रहा हूं।

7. Divyabh - January 8, 2007

u hv definitely scored very big thing in a small way.i like ur understanding about ur self.shayad hindi ko esi aam bolchal ki bhasha ki jyaada jaroorat hai,sahitye ke thekedaro ne to ese gart me pahuchaya hai.

8. rachana - January 11, 2007

@ आशीष और दिव्याभ, बहुत धन्यवाद. अपने विचार रखने के लिये..

9. नीरज दीवान - February 3, 2007

रचना जी. आपकी कविताओं में निरंतर निखार आ रहा है. बतौर पाठक मैं यही अनुभव कर रहा हूं. हालांकि कविता मुझे लिखनी नही आती.
आप मध्यप्रदेश से हैं यह जानकर प्रसन्नता हुई. मेरा जन्म होशंगाबाद का है.
आपकी निरंतर सक्रियता देखकर मै आह्लादित हूं. मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें. सुखद भविष्य की आकांक्षा करता हूं. आपका शुभेच्छु - नीरज

10. rachana - February 3, 2007

@ नीरज भाई, आपकी शुभकामनाओं के लिये बहुत बहुत धन्यवाद.आशा है आगे भी आप इसी तरह स्नेह बनाए रखेंगे.

11. संजीत त्रिपाठी - February 14, 2007

अपनी विचारभिव्यक्ति में सफ़ल हैं आप रचना जी, घुमते फ़िरते आपके चिठ्ठे में पहुंचा और ठहर सा गया।
शुभकामनाएं

12. rachana - May 3, 2007

@ संजीत, शुक्रिया..

13. दिवाकर मिश्र - August 14, 2007

नमस्ते रचना जी, एक घण्टे बाद आने वाले स्वन्त्रता दिवस की शुभकामनाएँ हम देते हैं । आपके विचार शिक्षा के विषय में एक छोटी कविता का रूप लिए हुए तो हैं ही, भले ही काव्यकला पर कोई दोराय हो पर उसके कविता होने में कोई सन्देह नहीं, जैसा कि आपने कहा है कि आप इसे कविता मानें या… । मुझे तो एक और कविता इसी पृष्ठ में नज़र आती है-
आप खुद तय कर लीजियेगा कि ये लेख, निबन्ध है या कि कोई कविता है,
मेरे लिये तो ये मेरे विचारों की अभिव्यक्ति और शब्दों की सरिता है!!

ये शब्द स्वयं में कविता हैं । कविता से मेरा अर्थ केवल तुकबन्दी से नहीं बल्कि भाव से है ।

14. Abhishek Karki - December 4, 2007

hi this is me Abhishek Karki i want ur creation ur so lucky .

15. dr.ajeet - December 28, 2007

aapka andaz-a-bayan pasnd aya…hum bhi aapke hunar ke hai kabhi ek darshtipat ho jaye..link hai http://www.shesh-fir.blogspot.com.

dr.ajeet

16. Hindi Sagar - January 20, 2008

सराहनीय प्रयास अच्छा लगा आपको पढना ..काफी अच्छी अच्छी रचनाएं हैं आपकी.जल्दी ही फिर आना होगा

Hindi Kavita

17. सर्वश्रेष्ट चिट्टाकार २००७: चुनाव शुरू - वोट दिया कि नहीं? « छुट-पुट - January 24, 2008

[...] दे रहें हैं यहां एक पुरुस्कार रचना जी की बेटी पूर्वी की याद में  है। यह [...]

18. रवीन्द्र रंजन - January 29, 2008

अच्छा लगा आपका ब्लाग। अब हम भी यहां आते रहेंगे।

19. mala telang - February 6, 2008

आज पहली बार घूमते हुये इधर आना हुआ , मजा आया फिर आऊँगी ।

20. sudarshansingh - February 23, 2008

Rachna ji apni rachnao ki unmukt prawah banaye rakhiea belaus sahaj saral saras shabdon ke sath. Apki rachana achhi lagi SADHUWAD

21. Rohit - February 27, 2008

Rachna ji pahli baar aan hua aapki post par aur ab to baar baar aane ka mann karega. aap itna acha jo likhti hai :-)

latest Post :Urgent vacancy for the post of Girl Friend…

22. Sandeep Singh Chouhan - March 19, 2008

I dont know to write in hindi but its awesome, you write your imagination, we all love it :)

23. SALURAM s/o BHAGAVANAJI DEWASI ( SAMELANI PARIWAR SARNAU ) - April 16, 2008

मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें. सुखद भविष्य की आकांक्षा करता हूं. आपका शुभेच्छु - SALURAM DEWASI TEACHER SANCHORE
Village Sarnau Post Sarnau Tashil Sanchore- 343041