श्रद्धाँजली….

फिर एक धमाका..कई लोगोँ की जानेँ गईँ…कई लोग घायल हुए..मरने वाले लोगोँ मेँ ज्यादातर बच्चे थे…
मस्जिद और कब्रिस्तान के पास,प्रार्थना के समय, निर्दोश बच्चोँ को इस तरह मौत के हवाले कर दिया गया…
भगवान उन नन्ही आत्माओँ को शान्ती दे….

बच्चोँ के लिए कुछ पँक्तियाँ—

‘बालक’

“माँ की खुशियोँ का पल बालक,
उसके सपनो का कल बालक,
माँ के जीवन का बल बालक,
उसकी मुश्किल का हल बालक.”

“ना सुख जाने ना दुख जाने,
झूठ ना जाने, सच्चा है!
गलती करता, शिक्षा पाता,
पका नही अभी कच्चा है!
बेफिक्र है वो, बेखोफ भी है,
ना कपटी है,ना लुच्चा है!
कुछ नटखट है, कुछ भोला भी,
वो बडा नही अभी बच्चा है!!”

Published in: on सितम्बर 10, 2006 at 5:01 अपराह्न  Comments (2)  

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2 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. दुर्भाग्यपूर्ण…निन्दनीय….!!

    निर्दोश मृत आत्माओं की शान्ति के लिये इश्वर से प्रार्थना करते हैं.

  2. रचना जी,
    आपकी एक कविता ‘वृद्ध’ कोलकाता से प्रकाशित ‘समाज विकास’ पत्रिका में की गयी है, उस अंक को आपके किस पते पर भेजा जाये, कृपाकर हमें मेल द्वारा सूचित करेगें। हमारा मेल पता : samajvikas@gmail.com है।
    आपका ही,
    शम्भु चौधरी, सह-संपादक
    समाज विकास
    152बी,महात्मा गांधी रोड, कोलकाता – 700 007
    मो. 0-9831082737


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