क्या ये ही विकास है?

कुछ दिनों पहले सुनील जी के चिट्ठे पर एक बच्चे का चित्र देखा था.बच्चा शायद खाना मिलने का इन्तजार कर रहा था.वहीं एक आइसक्रीम बेचने वाले बच्चे का चित्र भी है. भारत मे तो ये सब दृश्य आम हैं ही,दुनिया भर मे भी कई गरीब देशों के बच्चे हैं जिन्हे बुनियादी सुविधाएँ नही मिल पा रही हैं.विज्ञान के सहारे मानव दिन दूनी-रात चौगुनी प्रगती कर रहा है, तब ये कहने को मन करता है ——

खूब किया तुमने जो महल खडे किये,

अब थोडी जगह उसके झोपडे को दो!

खूब किया तुमने, अपने पेट भर लिये,

अब थोडी रोटी उसके लिये छोड दो!

खूब किया तुमने, हर डिजाईन पहन लिये,

थोडा कपडा उसको तन ढँकने को दो!

खूब किया तुमने, निज लक्ष्य पा लिये,

अब थोडे उसके सँघर्ष थमने दो!

खूब किया तुमने, मंगल पर चढ लिये!

अब थोडी धरती उसकी भी होने दो!!!

Published in: on नवम्बर 11, 2006 at 4:24 अपराह्न  Comments (4)  

The URI to TrackBack this entry is: https://rachanabajaj.wordpress.com/2006/11/11/kya-ye-hee-vikaas-hai/trackback/

RSS feed for comments on this post.

4 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. खूब किया तुमने, निज लक्ष्य पा लिये,
    अब थोडे उसके सँघर्ष थमने दो!

    खूब किया तुमने, मंगल पर चढ लिये!
    अब थोडी धरती उसकी भी होने दो!!!

    बेहद सटीक पंक्तियाँ लगी यें ।
    पर सबको साथ ले कर विकास के पथ पर चलने के लिये कैसी नीति पर चलना होगा इस बारे में आप क्या सोचती हैं? ये तो सर्वविदित है कि साम्यवाद विफल हो चुका है, व्यक्तिवाद हावी है ।

  2. हाथ फैलाना छोड़ कर
    ऐसा भी तुं सोच जरा,
    तु रहा नरक में भुखा-नंगा
    कैसे उसने बनाई स्वर्ग धरा.

  3. अब मैं क्या बताऊँ, पंकज भाई ने इसका जवाब दे दिया है🙂
    बहुत बढिया रत्ना जी

  4. @ मनीष जी, वैसे मेरा बहुत अध्ययन नही है इस बारे मे.लेकिन फिर भी लगता है भारत मे साधनों की कमी नही है, कमी है तो व्यवस्था की….कुछ उपाय जरूर् हो सकते हैं सबको साथ लेकर चलने के.सबसे पहले जरूरी होगा समस्याओं को ठीक से समझा जाए.सरकार की ‘अप्रोच’जिस तरह आरक्षण के मामले मे है, मेरी समझ से उस तरह से हम हमेशा ऐसे ही रहने वाले हैं ..

    @ पंकज भाई और शुएब भाई, हो सकता है मेरी पन्क्तियों से कहीं ऐसा लगता हो लेकिन मै न तो भीख देने की न ही भीख लेने की समर्थक हूँ, बात सिर्फ साथ लेकर चलने की है..


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: