फिर से……

परसों मैने अपनी पोस्ट मे कहा था कि ये मेरी इस साल की आखिरी पोस्ट है, लेकिन आज एक समाचार सुनकर फिर कुछ लिखना चाह्ती हूँ.आज  IIT मुम्बई के एक छात्र ने अपने होस्टल के कमरे मे आत्महत्या कर ली.वजह पता नही, जो भी रही हो लेकिन मेरी नजर मे इस साल भारतीय समाज के दो महत्वपूर्णॅ स्तंभ विद्यार्थी और किसान सबसे ज्यादा निराशा मे रहे.मैने विद्यार्थियों की निरन्तर होती मौत पर कुछ पन्क्तियाँ लिखी थी और किसी के ब्लाॅग पर टिप्पणी की थी, वहीं से मेरा चिट्ठा जगत से परिचय हुआ और फिर मैने अपना ब्लाॅग लिखना शुरु किया.पन्क्तियाँ इस तरह थीं—

Deaths of students

Students are committing suicides; it’s a national shame,
They should be brave,not should be tame.
They all are smart,intelligent and bright,
Why they are giving-up before any fight?
What is the pain ,they are trying to hide?
What is causing them to commit suicide?
Why they choose to be on their own?
Among so much crowd,why they feel alone?
These are the questions,needed to be answered,
Whatever are the problems,needed to be conquered
They should be taught rules of life game!
They can still be winners,without money and fame!!
They should be made at ease!! So they can share,
They are India’s future,should be handled with care!!
To save their lives,we all should try,
We just can’t afford to let them die!!!

इस बारे मे बाद मे मैने यहाँ कुछ लिखा भी था.

तब से लेकर अब तक ये सिलसिला लगातार बना हुआ है, किसान और विद्यार्थी दोनो ही अपनी जान देते जा रहे हैं..मै इस आने वाले नये साल मे कुछ पन्क्तियाँ उनके लिये कहना चाहती हूँ…

छोड निराशा आशा बाँधो,
अब अपने लक्ष्यों को साधो!
क्यूँ छोटा करते अपना मन,
है बहुत सुन्दर ये जीवन!
बस खुद से ही रखो आशा,
जीवन की बदलो परिभाषा!
छोडो इस जीवन से भागना,
सच्चाई का करो सामना!
हारे हो तो जीतोगे भी,
खोया है तो पाओगे भी!
नींदों से अपनी तुम जागो,
किस्मत का रोना अब त्यागो!
चिंताओं को तुम मत ढोना,
छोटी बातों से खुश होना!
जीवन है बहुमूल्य जान लो,
कुछ बनना है मन मे ठान लो!
कर्मों का फल यहीं मिलेगा,
जो बोओगे वही उगेगा!
व्यर्थ किसी से आस है करना,
अपने साथी खुद ही बनना!
कुछ किस्मत आडे आयेगी,
कुछ राहें टेढी भी होंगी!
इन सबसे तुम मत घबराना,
कठिन राह को सरल बनाना!
डरना मत जो सपने टूटें,
रूकना मत जो किस्मत रूठे!
कुछ अच्छे सपनों को बुन लो,
आसमान के तारे चुन लो!
धरती पर फूलों को देखो,
उनसा तुम मुस्काना सीखो!!!
—————–

 आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभेच्छाएँ…

Published in: on दिसम्बर 31, 2006 at 2:18 अपराह्न  Comments (9)  

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9 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. यह पंक्तियां हम सब पर लागू होती हैं जब हम परेशान होते हैं। काश! उस बच्चे ने आत्महत्या करने पहले इसे पढ़ा होता!

  2. Your kavita samyik n marmik he, that is too nice, aapko nav varsh ki shubkamna.

  3. आशा से परिपूर्ण कविता के लिये आपका आभार. यह कविता बहुतों का मनोबल बढ़ायेगी. नये साल की शुभकामनायें.

  4. व्यर्थ किसी से आस है करना,
    अपना साथी खुद ही बनना!

    जी बिलकुल दिल की बात कही आपने….सबसे बड़ी बात है आत्मबल !
    अंत में वही काम आता है, और जीवन पथ पर आगे बढ़ने की ललक को बनाए रखता है ।

  5. एक होनहार छात्र द्वारा आत्महत्या किया जाना विचलित कर देता है। यह आज के जीवन में व्याप्त तनाव का ही असर है। इस संदर्भ में आपकी कविता बहुत प्रेरणादायक है।

    नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

  6. आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनएं

  7. @ नीरज जी, बहुत थैन्क्यू है जी!!

    @ समीर जी, मनीष जी, श्रीश जी और शुएब भाई धन्यवाद. आप सभी को ‘उदीयमान चिट्ठाकार’ के द्वितीय चरण मे प्रवेश के लिये बहुत बधाई और आगे भी जीतने के लिये शुभकामनाएँ!

    @ अनूप जी, आपको भी बधाई, उम्दा चिट्ठाकारों को चुनने के लिये! और धन्यवाद पन्क्तियों के लिये अपने विचार रखने के लिये.

  8. mere bhav apke about me likh diya hai.very good thinking.

  9. @ दिव्यभ, बहुत धन्यवाद्! आशा है आप आगे भी यहाँ आते रहेंगे.


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