भारतीय राजनीतिक परिदृष्य

….राजनेताओं के एक दूसरे के लिये शर्मनाक बयान.. प्रधानमन्त्री और अच्छे नेताओं का मौन…पता नही इन सबके भरोसे हम कहाँ चले जा रहे हैं…

आजादी की उम्र पचास हो गई,
राजनीतिज्ञों से जनता हताश हो गई.
दूर की पार्टियाँ अब पास हो गईं,
वामपंथियों के लिये अब काँग्रेस खास हो गई.
मन्त्रियों की कुर्सियाँ अब टास हो गई,
पार्टियाँ अब निर्दलियों की दास हो गईं.
प्रधानमन्त्री की भी और कोई बास हो गई!
भारतीय राजनीति एक उपहास हो गई!!
—-
हैं वायु जैसे हल्के वे, लेकिन उस जैसे विरल नही!
हैं पानी जैसे ही पतले, लेकिन उस जैसे तरल नही!
हैं अग्नि जैसे गरम तो वे, लेकिन उस जैसी तपन नही!
हैं सागर जैसे बडे बहुत, लेकिन उस जैसे गहन नही!
हैं लोहे जैसे कठोर वे, लेकिन उस जैसे सघन नही!
हैं सोने से चमकीले भी, लेकिन उस जैसे नरम नही!
उनमे हर तत्व के गुण मिलते, पर थोडी-सी न मानवता!
जाने क्यूँ ऐसे लोग जो हैं, वे मेरे देश के हैं नेता!!

इसी बीच एक खबर…
कुछ दिनों पहले एक समाचार सुना, जिसमे कहा गया कि जनवरी २००७ मे विदर्भ के ३७ किसानो ने आत्महत्या कर ली..मुझे लगा कि मैने गलत सुना होगा…लेकिन अभी अभी फिर सुना की ये संख्या ६२ हो गई है..

Published in: on जनवरी 30, 2007 at 6:30 अपराह्न  Comments (19)  

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19 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. मजेदार लेकिन सारगर्भित कविता !

    रचना जी, ये साइडबार में कुछ विड्गेट वगैरा लगाइए न, कोई पिछली प्रविष्टियाँ कैसे पढ़ेगा। Archives, Recent Posts, Recent Comments, Top Posts आदि विड्गेट लगाइए।

  2. नेताओं का क्या किया जाये बस ये ही समझ नही आता,

  3. ई-पंडित सही कह रहे हैं, ‘रचना जी, ये साइडबार में कुछ विड्गेट वगैरा लगाइए न, कोई पिछली प्रविष्टियाँ कैसे पढ़ेगा।’ इसके लिये dashboard में जायें। वहां से presentation पर और उसके बाद sidebar widgets में। यहां पर Archives, Recent Posts, Recent Comments, Top Posts का चयन कर लें।

  4. ई-पंडित जी बहुत बारीकी से आपका चिट्ठा देखते हैं🙂 वे सही कह रहे हैं कि, ‘रचना जी, ये साइडबार में कुछ विड्गेट वगैरा लगाइए न, कोई पिछली प्रविष्टियाँ कैसे पढ़ेगा।’
    इसके लिये dashboard में जायें। वहां से presentation पर और उसके बाद sidebar widgets में। यहां पर Archives, Recent Posts, Recent Comments, Top Posts का चयन कर लें।

  5. @ तरुण जी टिप्पणी के लिये धन्यवाद.
    @ श्रीश जी और उन्मुक्त जी, आपने जैसा बताया, वैसा कुछ कर दिया है! सीख रही हूँ, कोशिश करूँगी की थोडा और ठीक कर पाऊँ.

  6. सही कह रही हो…,मगर लगता है हम ही गलत चुनाव के जिम्मेदार हैं. 🙂 क्यूँ नहीं आम मतदाता जिम्मेदारी दिखाता है, उदासीनता की जगह.

  7. किसानो द्वारा आत्महत्या करना हमें भी विचलित कर रहा है. कहाँ है खुद को किसान बताने वाले नेता?

  8. achcha chitran hai aaj ke raajneetigyon ka !

  9. सहजता से भारतीय राजनैतिक परिदृष्य पर बेवाक टिप्पणी अत्यंत प्रासंगिक लगी…मैं समीर भाई से सहमत हूँ…नेता के साथ कुछ नही किया जा सकता पर
    ऐकता में निर्भीकता के सहारे…दृष्टांतों को बदला जा सकता है।

  10. भारतीय राजनैतिक परिदृष्य पर सहजता से पेश की गई यह टिप्पणी युक्त सुंदर रचना…वास्तविकता के अत्यंत करीब है…। मैं समीर भाई से सहमत हूँ…नेताओं का कुछ नहीं किया जा सकता पर हम ऐकता और निर्भीकता के साथ संभावनाओं को मोड़ दे सकते है…मंजिले स्वयं चुन सकते है…

  11. पहले तो पहिचान ही नहीं पाया। बदले बदले लग रहें हैं चिट्ठे मियां।

  12. आपका चिट्ठा खूबसूरत हो गया। बधाई! नेताजी तो जैसे हैं वैसे हैं अब उनका क्या करें! हम् जहां हैं जो कर सकते हैं करें यही बहुत् है। वैसे आजादी की उम साठ् होने वाला है। क्या आजादी भी कोई सुकुमारी कन्या है जिसे अपनी उम्र कम् से कम् दस् साल कम् बताने की आदत् है🙂

  13. रचना जी;
    हम समाचारों से परे, हिन्दी रचनाओं की एक वेबसाईट (www.cafehindi.com) बना रहें हैं. इस वेबसाईट का उद्देश्य कोई भी लाभ कमाना नहीं है.

    यह दिखाने के लिये कि इस वेबसाईट का स्वरूप कैसा होगा, हमने प्रायोगिक रूप से आपके चार लेख इस वेबासाईट पर डाले हैं. यह वेबसाईट मार्च के दूसरे सप्ताह में विधिवत शुरू हो जायेगी. आपका ई-मेल पता न होने के कारण में कमेंट के माध्यम से ये संदेश आपको भेज रहा हूं

    क्या हम आपके ब्लोग रचनायें लेख के रूप मे. इस वेबसाईट पर उपयोग कर सकते हैं?

    उत्तर के इन्तज़ार में

    मैथिली गुप्त

  14. @ समीर जी, शायद हम सब कुछ कम जिम्मेदार हैं….

    @ सन्जय भाई, यही तो रोना है कि बडी-बडी बातें बनाने वाले काम नही आते..

    @ मनीष जी, धन्यवाद.

    @ दिव्याभ, मै सहमत हूँ आपसे..

    @ उन्मुक्त जी, धन्यवाद. आपकी सहायता से कोशिश की और श्रीश की सहायता से थोडा सुधार कर पाई.

    @ अनूप जी, धन्यवाद! जो कर सकते हैं करने की कोशिश करेंगे.हमने ‘पोयटिक लिबर्टी’ का उपयोग करते हुए उम्र पचास बता दी..वैसे तथ्यात्मक रूप से गलत भी कहाँ है? पचास की होने के बाद ही तो साठ की हुई होगी ना?!! और ये बेकार की प्रचलित मान्यता है…कोई ‘सुकुमारी कन्या ‘ अपनी उम्र सही भी बताये तो उस मे १० साल उपर से जोड कर ही देखा जाता है!!

  15. @ मथिली जी, आपसे आग्रह है कि कुछ समय के आप रूक जाईये.जीतू भाई और हिन्दी के अन्य चिट्ठाकार जो भी निर्णय लेंगे उस अनुसार मुझे भी चलना होगा!

  16. रचना जी; पिछली पोस्ट में आपने मुझे अनुमति दी थी, अभी इसे सुधार कर आपने थोडा समय रुकने के लिये कहा है. मैं इसे आपकी अनुमति की वापसी मानकर कैफ़ेहिन्दी से आपके लेख फ़िलहाल हटा रहा हूं.

  17. दुखद स्थित का भावनात्मक वर्णन है।

  18. प्रधानमन्त्री की भी और कोई बास हो गई!
    भारतीय राजनीति एक उपहास हो गई!!

    ज्वलंत भावों और शब्दों की मौजूदगी से कविता ख़ास हो गई, भारतीय राजनीति एक उपहास हो गई.. वाह … अत्यंत प्रभावी रचनाएं हैं.

  19. @ मैथिली जी, आपकी असुविधा के लिये क्षमा चाहती हूँ.मैने आपको मेल लिखा है.

    @ मिश्र जी, टिप्पणी के लिये शुक्रिया.

    @ नीरज जी, बहुत धन्यवाद.


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