सपना

… पिछली कुछ बातें हमारी यादों के रूप मे हमारे साथ साथ रहती हैं..यानि हमारे ‘आज’ मे कुछ सपने भविष्य के और कुछ बीती यादें समाहित रह्ती हैं..पिछली पोस्ट मे मैने आपको भविष्य के सपनों की बातें बताईं थी…..आज मिलवाती हूँ अपने पुराने सपने से…..

एक दिन देखा था एक सपना,
मेरे जैसा, मेरा अपना
हम दोनों थे साथ मे रहते,
कुछ सुनते, कुछ अपनी कहते
दुख ना कुछ थे, बस थीं खुशियाँ,
ऐसी न्यारी थी वो दुनिया!
बचपन बीता, बडी हुई मै,
वो भी मेरे साथ बढा था
मेरा साथ न छोडेगा वो,
इसी जिद पर खूब अडा था
फिर नियती की बारी आई,
वो मेरे सपने पर छाई
उस सपने से साथ था टूटा,
मै आगे, वो पीछे छूटा
कुछ बदला था जीवन मेरा,
नये थे रिश्ते, नया बसेरा
हर बात का अर्थ हो गया,
सपने बुनना व्यर्थ हो गया
बुद्धि आगे पीछे था मन,
यूँ ही भाग रहा था जीवन
जब जीवन से फुर्सत पाई,
फिर वो बीती यादें आईं
बीती बातें सोच रही थी,
उस सपने को खोज रही थी
कुछ न बदला सब वैसा था,
सपना जैसा का तैसा था!
उसे देखकर मन हर्षाया,
जब उसको पहले सा पाया!
मेरी प्यारी अलमारी से,
चुपके-चुपके झाँक रहा था!
वहीं बैठ वो बडे मजे से,
मुझको अपलक ताँक रहा था!!
फिर उसने अपना मुँह खोला,
धीरे से हँस कर यूँ बोला
‘मुझे पता था तुम आओगी,
मुझको भूल नही पाओगी’!
हम दोनो फिर साथ हो गये,
हाथों मे फिर हाथ हो गये!
उस टूटे-फूटे सपने ने
अब तक मेरा साथ दिया है,
जीवन के हर दुख और सुख को
उसने मेरे साथ जिया है!
कई आँधियों तूफानों से,
वो भी मेरे साथ लडा है,
इतनी ठोकर खा कर भी वो
अब तक मेरे साथ खडा है!!!
———

Published in: on फ़रवरी 9, 2007 at 4:03 अपराह्न  Comments (11)  

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11 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. Rachana,

    Very good,

    Keep it up.

    Deepak

  2. यह कविता मुझे कई कारणों से बहुत अच्छी लगी। आशा और कामना है कि आपके अपने सपने से आपका साथ हमेशा बना रहा और थोड़ा-थोड़ा वह पूरा भी होता रहे!🙂

  3. वाह सुन्दर कविता, वो सपना आखिर आपका पक्का साथी निकला।

  4. जिन्दगी की उहापोह का बड़ा सजीव चित्रण है. मुझे लगता है, सभी इस कविता से अपने आपको जोड़ सकेंगे कहीं न कहीं. बधाई.🙂

  5. वैसे तो मैं कई महिने पहले ही आपकी ये कविता पढ़ चुका हूँ पर इंतजार था कि किस दिन आप इसे अपने चिट्ठे पर प्रस्तुत करती हैं । एक अच्छी रचना को सब से बाँटने के लिए शुक्रिया !

  6. कल्पनाएँ ही तो हमारे जीवन को आशाओं का जामा पहनाती है अगर ये न हो तो यह जन्नत उजाड़ हो जाएगा…
    बखुबी से चित्रित किया है…वास्तविकता का…भीतर उतर गया…धन्यवाद।

  7. रवना जी ,सुन्दर है सपने की ही तरह ।
    घुघूती बासूती
    ghughutibasuti.blogspot.com

  8. @ deepak, thanks!

    @ अनूप जी, आपकी कामना के लिये धन्यवाद.

    @ श्रीश भाई, हाँ जी ऐसे कुछ मित्र होने जीवन मे जरूरी हैं!

    @ समीर जी, धन्यवाद.

    @ मनीष जी, आपकी बात रखने के लिये ही इसे पोस्ट कर दिया समझ लें!

    @ दिव्याभ, कविता आपको पसंद आई, जानकर खुश हूँ.

    @ घुघूति जी, बहुत धन्यवाद टिप्पणी के लिये.आशा है आपसे आगे भी सीखने को मिलता रहेगा.

  9. एक मै और एक मेरा सपना,
    साथ-साथ ही आये थे।
    साथ-साथ ही अपने पर,
    हमने यहाँ फैलाये थे।
    बरस बीत गये,
    वक्त है बदला,
    अब भी हम नही बदले है।

    वक्त के लुका-छुपी मे
    हम एक दुजे से मिलते हैं।

    ममता के छाँव मे आकर
    उनको देखा करते हैं।
    कभी तो होगा सपना पुरा
    ऐसी दुआ हम करतें हैं।

    मेरा सपना थोडा अलग सा है… बहुत पहले की लिखी एक रचना का अंश है… आपको पढ्ते हुए ध्यान आ गया… उम्मीद है आप बुरा ना मानेंगी।

    बहुत सुंदर रचना है🙂

  10. @ गरिमा,आपका सपना और शब्द भी अच्छे हैं!

  11. Someone once told me
    That dreams do come true,

    And I’ve experienced that
    The day I gave my heart to you.

    I’ve cherish that very moment
    So precious inside my heart,
    And made a wish for me and you
    To never ever part.

    If ever there’s a problem
    Or things are not going right,

    I’ll make sure and sit down with you
    and discuss it until it is bright.

    I can’t hide the love for you
    So dear, precious and true,
    If ever I was to loose this love,
    I promise that my heart will lead back to you
    Santosh Sharma


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