तुम ही तुम

इसे आत्म प्रवंचना न समझा जाए..ये सब वही वाक्य हैं जो समय समय पर पुरुष द्वारा स्त्री के लिये कहे गये हैं.. कभी तारीफ मे तो कभी ताने के रूप मे, कभी हँस कर तो कभी गुस्से से, कभी सताने के लिये तो कभी मनाने के लिये..और ” बेचारा” भी पुरुष स्वयं को कहते रहते हैं…..

*आज महिला दिवस है। मैंने पिछले वर्ष इस अवसर पर अपने अंग्रेजी ब्लाग में यह लिखा था। आज सभी महिला साथी चिट्ठाकारों को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करती हूं!!

हालातों का मारा-मारा
मै तो हूँ आदमी बेचारा!

 तुम हो, शक्ति तुम हो,
हर कथा की उक्ति तुम हो
चहुँमुखी है ज्ञान तुम्हारा!
मैं…….

तुम तो पूजी जाती जग में,
इस धरती पर और अँबर में,
मैं भी बनना चाहूँ तारा!
मैं….

जन्म भी देती, तुम्हीं पालती,
संस्कारों में तुम्हीं ढालती,
मैं तो हूँ बस एक सहारा!
मैं……

तुम्ही नदी हो, तुम्ही हो धरती,
इस जग को लेकर तुम चलती,
मैं तो हूँ एक बहती धारा!
मैं……

चट्टानों से तुमें टकराती,
कठिन काम को सरल बनाती,
अँधियारे को दूर भगाती,
जग में फैलाती उजियारा!
मैं…..

दुनिया के जुल्मों को सहती,
फिर भी सबको अच्छा कहती,
तुम तो द्रव हो जैसे पारा!
मैं…..

सारे कामों को कर लेती,
हर दम सबके आगे रहती,
ढूँढ रहा हूँ मैं तो किनारा!
मैं…..

सारी दया तुम्ही पर लुटती,
हर इक नजर तुम्ही पर रूकती,
मैं तो तकदीरों से हारा!
मैं……
 

शातिर तुम हो, फिर भी भोली,
मीठी हो जैसे इक बोली,

तुमसे तो मैं हर पल हारा.

मैं…..

तुम्हे देखकर मैं हूँ दंग ,

आज हुआ है मोह भंग,

इस जगको तुमने ही सँवारा.

मैं….

मौका है अब मैने पाया,

आज मुझे ये समझ मे आया,

क्या कर सकता मैं ये सारा?

मैं….

अब तो कुछ करना ही होगा,

थोडा बहुत बदलना होगा,

व्यर्थ गया ये जीवन सारा.

मैं……

Published in: on मार्च 8, 2007 at 12:58 पूर्वाह्न  Comments (18)  

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18 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. उम्दा व्याख्या, हाँ… यह आपकी आत्म प्रवंचना नहीं है अच्छी तरह दिख रहा है…
    बहुत दिनों बाद आपको देखकर अच्छा लगा…।
    बहुत कुछ कह दिया इतनी सहजता से की कुछ भी कहने को नहीं है…मेरी ओर से भी आपको महिला दिवस पर शुभकामनाएँ!!!

  2. वल्लाह क्या खूब कहा है। खुशामदीद !!

  3. बधाइयाँ एवं शुभकामनायें (महिला होने की) । हमने भी आज कुछ लिखा है…सारा पढियेगा :)।
    धन्यवाद।

  4. धन्यवाद, अब मुझे कभी किसी को मनाने के लिये शब्दों की कमी नहीं रहेगी

  5. अरे, किसने कहा कि यह आत्म प्रवंचना है?? किसी ने भी तो नहीं.

    बधाई, इस महिला दिवस पर!!🙂

  6. बहुत सुन्दर !!

  7. अच्छी तरह लपेटा है आपने हमारी जाति विशेष को🙂
    महिला दिवस पर आपको बधाई !

  8. महिला दिवस जुझारू हो ।

  9. रचना जी,

    आपकी रचना सराहनीय है।
    विश्व महिला दिवस पर आपको और अन्यान्य महिला चिट्ठाकारों व पाठकों को शुभकामनाएं

  10. अवसरानुकूल शुभकामनाएं!

  11. अब मुन्ने की मां को मनानेे का तरीका समझ में आया।

  12. bechara mai!!

  13. रचना जी, क्या कोई पुरुष सच में ऐसा कह सकता है, क्षणिक जोश में रूठी पत्नी या प्रेमिका को मनाने के लिए नहीं ? अच्छी रचना है ।
    घुघूती बासूती

  14. बढ़िया लिखा है। अच्छी रचना है। लेख बहुत दिन से नहीं लिखा!

  15. आप सभी का बहुत धन्यवाद..क्षमा करें, देर से जवाब दे पा रही हूँ.

  16. itna achchha likhne ke liye badahayi

  17. अनिल जी, इतनी पुरानी प्रविष्टि तक आने और टिप्पणी के लिये बहुत शुक्रिया!🙂

  18. […] वर्ग अगर नाराज है तो उनके लिये….. पिछ्ली बार ऐसा हुआ था इसलिये […]


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