मित्र वापस आया…..

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इस मृत प्राय से जीवन मे,

इस बोझिल तन्हा से मन मे,

फिर से जीवन है महकाया,

गुम हुआ मित्र वापस आया!


मन की बेचैनी दूर हुई,

दुविधाएँ काफूर हुई,

नया हौसला फिर आया!

गुम हुआ मित्र वापस आया!


इक नई राह और चाह मिली,

फिर हुई जिन्दगी खिली खिली,

कितनी खुशियाँ लेकर आया!

गुम हुआ मित्र वापस आया!


अब कभी साथ ये छूटे ना,

ये डोर प्यार की टूटे ना,

फिर मिला मुझे नया साया!

गुम हुआ मित्र वापस आया!


बीती बातों को हम छोडे,

कुछ नये स्वप्न आओ जोडें,

अब हार को हमने ठुकराया!

गुम हुआ मित्र वापस आया!


आज को जी भर जी लेंगे,

कल की कल को ही देखेंगे,

इक नया जोश हमने पाया!

गुम हुआ मित्र वापस आया!

* * * *


दुनिया में कहीं भी होता हो मगर,

दोस्त का घर दूर कहाँ होता है!

जब भी चाहूँ आवाज लगा लेता हूँ,

वो मेरे दिल मे छुपा होता है!

जाने कैसे वो दर्द मेरा जान लेता है,

दुखों पे मेरे वो भी कहीं रोता है!

* * * *

Published in: on अप्रैल 4, 2007 at 11:38 अपराह्न  Comments (13)  

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13 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. आपकी रिश्ते वाली चिट्ठी पढ़ कर कुछ अच्छा नहीं लगा था, हो सका तो कुछ उस पर लिखूंगा। आज यह पढ़ कर कि ‘गुम हुआ मित्र वापस आया!’ अच्छा लगा।

  2. बहुत सुंदर और गहरी रचना है आपकी. बधाई स्विकारें.

    दुनिया में कहीं भी होता हो मगर,

    दोस्त का घर दूर कहाँ होता है!

    जब भी चाहूँ आवाज लगा लेता हूँ,

    वो मेरे दिल मे छुपा होता है!

    जाने कैसे वो दर्द मेरा जान लेता है,

    दुखों पे मेरे वो भी कहीं रोता है!

    –बहुत खूब कहा है, वाह!!

  3. मित्र पर बढिया लिख दिया आपने

  4. दुनिया में कहीं भी होता हो मगर,

    दोस्त का घर दूर कहाँ होता है!

    जब भी चाहूँ आवाज लगा लेता हूँ,

    वो मेरे दिल मे छुपा होता है!

    Aapke posts mein jo sabse achhi baate hoti hain wo hai ki Bhavnawo ko achhe tarike se aap samjhti hain aur use kalambadh kar pati hain. Bahut badhiya.🙂

  5. वाह! आपका दोस्त अब आपके साथ ही रहे। यही दुआ है!🙂

  6. जाने कैसे वो दर्द मेरा जान लेता है,

    दुखों पे मेरे वो भी कहीं रोता है!

    बहुत सुन्दर!
    ऐसा ही तो दोस्त होता है।
    घुघूती बासूती

  7. nice poem. By the way are you refering to me?

  8. Hi Rachana
    kahan se aate hain apke dil me itni khoobsurat lines…
    मन की बेचैनी दूर हुई,

    दुविधाएँ काफूर हुई,

    नया हौसला फिर आया!

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    sach jab koi purana frnd kafi dino baad mile to kitni khushi hoti hai iska andaza lagana mushkil hai. apke poem ki last lines kafi achchi lagi-

    जाने कैसे वो दर्द मेरा जान लेता है,

    दुखों पे मेरे वो भी कहीं रोता है!

  9. @ उन्मुक्त जी, आपको अच्छा नही लगा, ये जान कर मुझे भी अच्छा नही लगा..आप जरूर लिखियेगा उस पर…नौसिखिया किस्म का लेखन होता है मेरा..बहुत सोच कर नही लिखती मै..जब जैसा मन मे हो वही लिख देती हूँ.

    @ समीर जी और शुएब भाई, बहुत शुक्रिया!

    @ राजेश जी, इतनी तारीफ! शुक्रिया!

    @ अनूप जी और घुघुति जी, बहुत धन्यवाद!

    @ रत्ना जी, हाँ जी ये बिल्कुल आपके लिये ही समझिये!

    @ मोनिका जी, बहुत धन्यवाद आपकी टिप्पणी के लिये!

  10. ‘जैसा मन मे हो वही लिख देती हूँ.’ शायद इसलिये मन को हमेशा छू जाता है।

  11. hiii rachana jee..pehchaana iss naacheez ko..waise comment is topic pe chod na chahta tha…but mujhe hindi padhna nahi aati isi liye mujhe nahi pata ke aapne kya likha hai…waise im sure aapne jo likha hoga woh zaroor khabil-e-taarif hoga…kabhi waqt raha toh is bande` ko yaad karliya karein..

    be happy…nd keep smiling….

    God bless you&ur family

  12. @ उन्मुक्त जी,🙂

    @ nabeel, hindi bolate to itnee achcchee ho, ab padhana bhee seekh lo !
    i wonder you still remember me!!
    thanks for droping by..will try to update that blog soon.

  13. इस मृत प्राय से जीवन मे,

    इस बोझिल तन्हा से मन मे,

    फिर से जीवन है महकाया,

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    मन की बेचैनी दूर हुई,

    दुविधाएँ काफूर हुई,

    नया हौसला फिर आया!

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    इक नई राह और चाह मिली,

    फिर हुई जिन्दगी खिली -खिली,

    कितनी खुशियाँ लेकर आया!

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    अब कभी साथ ये छूटे ना,

    ये डोर प्यार की टूटे ना,

    फिर मिला मुझे नया साया!

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    बीती बातों को हम छोडे,

    कुछ नये स्वप्न आओ जोडें,

    अब हार को हमने ठुकराया!

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    आज को जी भर जी लेंगे,

    कल की कल को ही देखेंगे,

    इक नया जोश हमने पाया!

    गुम हुआ मित्र वापस आया!

    * * * *

    दुनिया में कहीं भी होता हो मगर,

    दोस्त का घर दूर कहाँ होता है!

    जब भी चाहूँ आवाज लगा लेता हूँ,

    वो मेरे दिल मे छुपा होता है!

    जाने कैसे वो दर्द मेरा जान लेता है,

    दुखों पे मेरे वो भी कहीं रोता है!


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