माँ तुझे सलाम!!!

 आज के इस खास दिन पर मुन्ने की माँ, घुघुति जी, प्रत्यक्षा जी, बेजी, रत्ना जी, ममता जी और तमाम साथी “माँ” चिट्ठाकारों को मेरी शुभकामनाएँ!!!!

..हालाँकि अब मै भी माँ हूँ, लेकिन ये पन्क्तियाँ मैने अपनी माँ के लिये लिखी थी….

माँ की कुछ बातें आज तुमको बताऊँ,

पहले प्रभु के शीश माँ को झुकाऊँ!

वो सब याद रखती, जो मै भूल जाऊँ,

वो मुझको सम्हाले, जो मै डगमगाऊँ!

वो सब कुछ है सुनती, जो भी मै सुनाऊँ,

वो चुप रह के सहती, अगर मै सताऊँ!

भूखी वो रहती, जो मै खा न पाऊँ,

रातों को जागती, जो मै सो न पाऊँ!

वही गीत गाती, जो मै गुनगुनाऊँ,

संग मेरे रहती, जहाँ भी मै जाऊँ!

ईश्वर से एक ही मै मन्नत मनाऊँ,

हर एक जनम मे यही माँ मै पाऊँ!!!

*** आज के दिन सुबह-सुबह मेरी बेटी मुझे एक कार्ड  देती है, जो वो पिछले २/३ दिनों से बना रही होती है! मुझसे छुपाकर! हालाँकि ये बताना नही भूलती कि मै आपके लिये कुछ बना रही हूँ!🙂. उसे नही पसंद कि उस कार्ड को मै अपनी किसी पुस्तक मे रख दूँ, उसे मुझे कुछ महीने अपने पर्स मे रखना होता है! आज वो अपनी मौसी के घर है, तो मुझे अपने कार्ड के लिये, उसके यहाँ पहुँचने तक इन्तजार करना है!

Published in: on मई 13, 2007 at 9:14 पूर्वाह्न  Comments (16)  

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16 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. रचना मेरी भी शुभकामनायें…..माँ जैसी कोई नहीं….. और कोई सम्बोघन इससे खूबसूरत नहीं…!!

  2. आपने जो कविता लिखी है वो शत-प्रतिशत सही है. वाकई मे माँ से बढ़कर कुछ भी नही है । मदर्स डे पर हमारी बधाई स्वीकार करें।

  3. अच्छी कविता है पर कोशिश यही रहे हम भारतीयो की तरह साल भर मनाये ये दिन उसे किसी ओल्ड एज होम मे छोड कर एक दिन मनाने के बजाय .

  4. हर एक जनम मे यही माँ मै पाऊँ!!!

    har pankti, har sabd sahi likha hai aapne, Sabhi logo ko “MAA DIWAS” ki dhero subhkaamnaye.🙂

  5. सत्य है, कहा भी है:

    जननी जन्मभूमिश्च…

  6. माँ, ऐक बहुत बढी नियामत दी है ईश्वर ने,…माँ से बढकर दूजा कोई नही..
    माँ तुझे सलाम!
    सुनीता(शानू)

  7. बहुत सुन्दर रचना । आपकी माँ को मेरा भी अभिनन्दन !
    घुघूती बासूती

  8. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

  9. बहुत सुंदर रचना.

    समस्त माताओं को नमन!!

    इतनी सुंदर प्रस्तुति के लिये बधाई.

  10. हार्दिक शुभकामनाएँ ! काश इसी तरह हर दिन हम अपनी जननी को याद रखें ।

  11. इस प्रविष्टि पर टिप्पणी द्वारा मै माँ को पुनः प्रणाम करता हूँ।
    धन्यवाद।

  12. रचनाजी, इसे पढ़कर मुझे लगा कि काश मैं भी कुछ भावपूर्ण लिख पाता। फिराक गोरखपुरी ने मां के बारे में एक कविता लिखी है उसका लिंक मैं आपके लिये दे रहा हूं! http://hindini.com/fursatiya/?p=142

  13. आप सभी की टिप्पणीयो‍ के लिये बहुत बहुत् धन्यवाद!

    @ अनूप जी, मै जरूर पढना चाहूंगी! लिन्क देने के लिये शुक्रिया.

  14. namaskar!
    mother’s day per aap ko bahut saari subhkaamnayein!aaj ek comment apne Abhay ke blog pe dekha toh socha ki ya naam to jaana pehchana hai..jab dekha toh aaphi thi..accha laga ki aap wahan bhi judi hain..
    aur haan kavita sunder hai..
    dhyanwaad

  15. ईश्वर ने मां को शायद अपने स्थानापन्न के रूप में बनाया है . वह शायद सब बच्चों का बराबर ध्यान नहीं रख पा रहा था .

  16. @ दिव्याभ, अजीब इत्तफ़ाक है!! टिप्पणी के लिये बहुत धन्यवाद..

    @ प्रियंकर जी, धन्यवाद मां के लिये इतनी अच्छी बात कहने के लिये!


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