राम से मुलाकात…….

इन दिनो‍ ‘ रामसेतुका मुद्दा गर्म है. इसी तरह कभी अयोध्या की बातेगर्म हुआ करती थी‍. मै सोचती हूं कि भगवान इन बातोके बारे मे पता नही क्या सोचते होगे . एक बार अन्तर्जाल पर मेरी उनसे मुलाकात हो गयी थी,   प्रस्तुत है उसी मुलाकात का ब्यौरा ………..

Inbox मे एक मेल देखकर मै परेशान हो गई ,

भेजने वाले का पता देखकर हैरान रह गई.

 

लिखा था

From swarg it’s Lord Ram

पढते ही, मैने छोड दिये सारे काम !

मेल मे लिखा था—

Thank you for reading,

It’s a mail for testing.

मैने जवाब भेजा

Congrates for the facility you will avail,

Thanks for sending this test mail.

मुझे शक हुआ कि ये किसी की शरारत है,

लेकिन ऎसो‍‍ से निपटने मे हमे भी महारत है!

इसके बाद उन्होने कई मेल किये,

मैने भी उन्हे हर बार जवाब दिये.

एक दिन मैने उनसे पूछा—

आपको पृथ्वी से संपर्क का क्यो‍ सूझा?

उनका जवाब था—

पृथ्वी पर हर काम 
एडवान्स होते जा रहा है,

वही‍, स्वर्ग आज तक पुराने ढर्रे अपना रहा है.

यहा‍ आंख बन्द करने से सब कुछ हो जाता है,

जैसा जो चाहे तुरन्त वैसा पाता है!

इस सबसे अब हमारा मन भर गया,

हमे भी चाहिये अब कुछ नया नया!

हमारी बनाई सृष्टि कमाल कर गई है,

कई मामलो‍ मे वो हमसे आगे बढ गई है.

हर ईश्वर को पृथ्वी मे इतना ही interest है,

लेकिन अभी थोडा superiority complex है.

यहां भी कई अमिताभ को चाह्ते है‍,

एल. एन. मित्तल का लोहा (!!) भी कई मानते है‍!

इसी तरह हमारा सम्पर्क बढता गया,

और ये प्रभु ही है‍, मुझे यकीन होता गया.

मैने माना- भगवान ने भी विज्ञान से हाथ मिला लिया,

स्वर्ग मे उन्होने भी internet लगवा लिया!

मैने पूछा—

स्वर्ग मे नेट व्यवस्था कैसे manage करते है‍?

वे बोले-

-पृथ्वी के भेजे satellite उपर ही तो रहते है‍!!

एक दिन तो मै दंग रह गई

जब उन्होने मेल मे ये बात कही-

If possible, come for a chat,

Do a favour to this net mate!!

मेरा जवाब था—

For me, it’s a nightmare!

Today at night I will be there!!

 

इस chatting के लिये मै खास aware थी,

प्रभु से क्या पूछना है, इसके लिये prepared थी.

Connection लगाया तो पाया—

प्रभु पहले से ही इन्तजार कर रहे थे!

मुझसे ज्यादा वे excited लग रहे थे!

प्रफुल्लित होते हुए उन्होने hello! किया,

मैने भी विनम्रता से जवाब दिया.

मैने सबसे पहले पूछा—

क्या सीता जी जानती है‍ कि आप मुझसे chat कर रहे है‍?

वे बोले—

हां!! वे पास ही के PC पर अपने मित्र का wait रहे है‍!

मैने कहा—

हमे स्वर्ग के बारे मे बहुत कुछ जानना है,

वहां सुख ही सुख है, हमारा मानना है.

प्रभु! आपने हमसे ऐसा भेदभाव क्यो‍ किया?

पृथ्वी को भी स्वर्ग सा क्यूं नही बना दिया?

वे बोले—

इसे आप हमारी मजबूरी समझिये,

या हमारे अस्तित्व के लिये जरूरी समझिये.

मैने कहा—

……….. जैसो‍ के लिये क्या कहना है?

वे बोले—

उन जैसो‍‍ को अभी वही‍ रहना है,

इस तरह की तकलीफ़े‍‍ वहां बनी रहे‍गी,

अन्यथा पृथ्वी हमसे नही दबेगी.

मैने कहा—

हम तो समझते थे कि आप परमार्थी है‍,

लेकिन आप तो बडे स्वार्थी है‍!

आप तो मजे से स्वर्ग मे रहते है‍,

और हम यहाँ दिन रात मुसीबते‍ सहते है‍.

अब मेरे आखिरी सवाल का जवाब दीजिये,

मसला आप ही से जुडा है सो हल कीजिये.

अयोध्या मे होगी मस्जिद, या कि मन्दिर बनेगा?

अल्लाह रहेगा वहां कि राम रहेगा?

पहले तो वे झिझके, फ़िर थोडा सा सम्हले,

मुझको अपना ही जान, वे कुछ इस तरह बोले—

अल्लाह डरे धरती से और मै भी डरता हूं,

वो जाने को मुझे कहे, मैं उनसे कहता हूं!!

मैने कहा—-

आप ही की है ये पृथ्वी इतना भी ना डरो,

स्वामी है‍ आप सबके ही, कुछ् तो करो!

वे बोले—-

मै भी जानता हूं, अल्लाह भी जानते है‍,

धर्म के जुनून को हम दोनो मानते है‍

हमारा ये फ़ैसला लोगो‍ को तुम बताओ,

एक ही इमारत मे मन्दिर मस्जिद बनाओ,

अब इस नफ़रत को दूर हम ही करे‍गे,

जहां मै रहूं‍गा, वहीं अल्लाह भी रहे‍गे!!!  

जहां मै रहूं‍गा, वहीं अल्लाह भी रहे‍गे!!!!

——————————–

Published in: on सितम्बर 28, 2007 at 2:25 अपराह्न  Comments (26)  

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26 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. बहुत ही अच्छा संदेश दिया है आपने… “एक ही इमारत मे मन्दिर मस्जिद बनाओ..” काश ऐसा संभव हो सके

    वैसे मेल करने वाल कौन था?😉

  2. अच्छा व्यंग्य.

  3. बहुत बढ़िया!!
    अच्छा लगा!!

  4. आप ने कमाल की बात कही है . काश ऐसा हो पाता. काश यही बात भगवान हिंदुवो को और अल्लाह मुसलमानो को समझा पाते. दुनिया बदल जाती

  5. कलयुग में रामायण… हम्म्म्म्म्…
    शानदार व्यंग किया है…
    बहुत सुंदर्…

  6. वाब मजा तो आया ही साथ ही एक संदेश भी दे गई आपकी कविता।

  7. एक बहुत सुन्दर और आवश्यक संदेश निहायत सरल अंदाज में . बिम्ब बहुत ही सहजता से उठाये हैं. कभी इसी तरह का संदेश देती रचना मैने लिखी थी:

    अमन की चाह मे, दुनिया नई बना दी जाये
    रामायण और कुरान छोड के, इन्सानियत आज पढा दी जाये.

    जहां मे रोशनी करता,चिरांगा आसमां का है
    सरहद को बांटती रेखा, क्यूँ ना आज मिटा दी जाये.

    रिश्तों मे दरार डालती, सियासी ये किताबें हैं
    ईद के इस मौके पे इनकी,होली आज जला दी जाये.

    आपस मे बैर रखना, धर्म नही सिखाता है
    मंदिर के कमरे से ‘समीर’,अज़ान आज लगा दी जाये.

    http://udantashtari.blogspot.com/2006/04/blog-post_14.html

    –मगर आपकी रचना का अंदाज निराला है, बहुत खूब. जारी रहें. नियमित लेखन के लिये शुभकामनायें एवं इस रचना हेतु बधाई.

  8. हास परिहास के मूड में राम जी से मुलाकात कराने का शुक्रिया !

  9. अच्छी कविता पढ़ाई।धन्यवाद,रचनाजी।

  10. पूछो ना रामजी से मुझसे चैट करेंगे क्या…

    मज़ा आ गया….संदेश भी ठीक निशाने पर है।

  11. आप सभी को ये मुलाकात पसँद आई, ये जानकर मै बहुत खुश हूँ. आपकी टिप्पणियों के लिये बहुत धन्यवाद…

    @ समीर जी, आपकी पन्क्तियों के लिये बहुत शुक्रिया..

    @ बेजी, हाँ जी! करेंगे ना! तुमसे चैट करना भला कौन नही चाहेगा?🙂

  12. रचना जी, सम्पूर्ण मनोरंजन के साथ प्रस्तुत संदेश भी मन प्रफ़ुल्लित कर गया।
    धन्यवाद।

  13. हिन्दू और मुस्लिम को एक करने की एक और अच्छी कोशिश लेकिन क्या वाकई ऐसा संभव है।रचना रोचकता और अच्छे संदेश का सम्मिलित मिश्रण है…..keep it up…….

  14. बहुत अच्छा लिखा है। मन खुश हो गया पढ़कर। रामजी को ब्लागिंग सिखाइये न!

  15. सुन्दर।

  16. बहुत बढ़िया, वैसे रामजी चिट्ठाकारी भी करते हैं या नहीं? अगर हाँ तो उन्हें कहिये कि कम से कम एग्रीग्रेटर पर पंजीकरण तो करवा लें कम से कम।🙂

  17. मैं केरल से, मलयालम में ब्लोग कर रहा हूँ।
    मेरे ब्लोग में हिन्दी की प्रविष्टियाँ भी शामिल है।
    http://rajichandrasekhar.wordpress.com

  18. रचना जी, रोचक वृत्तांत है, राम जी से साक्षात्कार का और संदेशात्मक भी!

  19. मिश्रा जी, अनामिका जी, स्रुजन जी, राजी जी और राजीव जी , आप सभी को टिप्पणी के लिये बहुत धन्यवाद.

    अनूप जी और नाहर जी, राम जी से आग्र्ह करती हूं कि वे भी हिन्दी मे एक ब्लॊग लिखे‍ क्यो‍ कि उनके समाज की भी तमाम मजेदार कहानियां हमने पढी सुनी है‍ जिन्हे वे अपने नजरिये से लिख सकते है‍..:)

  20. kisi ne theek hi kha hai ki :-

    AISA KOI JAHAAN MILE, HAR CHEHRE PE MUSKAN KHILE,
    KASH ! MANDIR MEIN MILE KHUDA AUR MASJID MEIN BHAGWAN MILE.

  21. ram ka kam ram hi jane rahim ka kam boi samhale bebkuphi hame kyo batane

  22. लगता है आप राम जी से चैटिंग में ही लगी हैं… उनका संदेश तो पृथ्‍वी पर अभी तक किसी ने माना नहीं…
    लेकिन बहुत शानदार तरीके से आपने मतलब की बात कही. अति सुंदर, पसंद आया यह अंदाज.

  23. […] रचना बजाज की कविता राम से मुलाकात […]

  24. OM RAM CHARIT MANAS
    PURSUTUM SHRI RAM KEE JAI
    MAIN RAM KOO AAPNA GURU MANTA HUE
    RAM PUROSO MAIN YUTAAM HAI

  25. RACHNA JI AAPKO BAHUT BAHUT PRANAM AND BHAGWAN SE
    MULAKAT KI BEST WISHES KYONKI AAPKE ANDER AAKER HI
    TO WOH SAB BOLE HAI TO AAP TO BADE BAGHYASHALI HAI .
    MALIK AAPKO PHIR SE AISE HI DARSHAN AUR AISI KAVITAO
    KI PRERNA DETE RAHEN .AUR SABKO SANMATI DETE RAHE TO
    ISI DHARTI PAR DEVTA AUR BHAGWAN BASTE HAI ..
    RAGUPATI RAGHAV RAJA RAM PATIT PAWAN TERO NAM
    ISHWAR AALAH TERO NAM SABKO SANMATI DE BHAGWAN……

    JAI SHREE RAM.

  26. […] “ * पढने के लिये यहां देख सकते हैं – राम से मुलाकात , जिसे मैने २८ सित. २००७ को प्रकाशित […]


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