असामयिक….

 

 

 

एक असामयिक मौत, कई जिन्दगियाँ निगल जाती है.

सपने टूट जाते हैं, आशाएँ पिघल जाती हैं..

 

अँधेरी रात का सन्देश दे, शाम सूरज ढल जाता है,

एक रोशनी भरा दिन हाथ से फिसल जाता है..

 

 

हर सीधा रास्ता, चौराहा सा बन जाता है,

वक्त भी हक्काबक्का सा मानो वहीं थम जाता है

 

एक पल मे अनायास सब कुछ बदल जाता है,

जिन्दगी का मकसद भी पहले सा नही रह जाता है..

 

जीने के नाम पर साँसें आती जाती हैं,

अपने पर अनचाही बेचारगी लद जाती है

 

सच्चे दुख को पीछे रख, झूठी खुशी दिखाइ जाती है,

आँख के आँसू छुपा, होठों पर मुस्कान फैलाई जाती है..

 

जिन्दगी इतना क्यूँ सताती है,

मौत सबकी तय है फिर इतना क्यूँ रुलाती है

 

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क्या बताऊँ कितनी अनमोल थी जिसे मैने खोया है,

उसकी मौत पर, ईशवर भी आकर रोया है…….

Published in: on जुलाई 31, 2008 at 4:28 अपराह्न  Comments (7)  

मिलिये, नन्हे तारे से…

छोटे बच्चे छोटी-छोटी बातों से खुश हो जाते हैं और मै भी! 🙂
नन्ही वैदेही अभी हाल ही मे चार वर्ष की हुई है….उसे गाना गाने का बहुत शौक है, और मुझे उससे गाना सुनने का…कम्प्यूटर से खुद की आवाज सुनकर वो बहुत खुश है…. सुनकर देखिये अगर आपको भी मजा आये!….

देखो इन्हे ये है ओस की बूँदें ……..

जब आप भारतीय हैं तो आस-पडोस के, रिश्तेदारों के और ब्लॉगर मित्रों के नन्हे- मुन्नों का उत्साहवर्धन और सराहना करना आपका धर्म और जिम्मेदारी है!!

… लेकिन इस सबसे ‘समीर जी’ दुखी हो जाते हैं!
*** ये पोस्ट लिखने की “उत्प्रेरणा” ( इस शब्द की उत्पत्ति, रसायन शास्त्र मे उपयोग किये जाने वाले शब्द- “उत्प्रेरक”, से हुइ है :)), मुझे समीर जी के ही ब्लॉग से मिली.. इनके भी दो प्यारे- प्यारे बच्चे हैं :)…अब बडे हो गये हैं, लेकिन कभी तो मुन्नु की तरह छोटे रहे ही होंगे…मै इनसे मिली हूँ..श्रीमती लाल बता रही थीं कि दोनो कितने आज्ञाकारी हैं!..हैं भी! मैने देखा.:)….

######## बहरहाल पोस्ट लिखने की मुख्य वजह ये है कि, मेरे इस मृतप्राय पेज पर अब भी हर रोज लोग दस्तक देते हैं..इसलिये वे लोग, यहाँ से होते हुए जरा सी मुस्कुराहट लेकर जायें….

Published in: on जुलाई 26, 2008 at 5:03 अपराह्न  Comments (4)