……अपना है.

जो बीत गई वो बात गई,
जो कल होगा वो सपना है,
आज जो मेरे साथ चल रहा, उतना ही बस अपना है!
 

मित्र मिले‍गे, फ़िर बिछडेंगे,
भीड जमेगी, फ़िर बिखरेगी,
एकाकीपन साथ जो मेरे,उतना ही बस अपना है!
 

कुछ कामो मे सफ़ल हुए तो,
कोइ काम विफ़ल भी हो‍गे!
फ़िर कोशिश करने का साहस,उतना ही बस अपना है! “

जो जोडा है, वो छूटेगा
दीवारो‍ का घर टूटेगा,
खुला आसमां, हवा और् पानी, उतना ही बस अपना है…

……………………….

Published in: on सितम्बर 11, 2008 at 5:20 अपराह्न  Comments (10)  

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10 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. bahut accha

  2. जो जोडा है, वो छूटेगा
    दीवारो‍ का घर टूटेगा,
    खुला आसमां, हवा और् पानी, उतना ही बस अपना है…

    बहुत अच्छे भाव । लिखा भी अच्छा है।

  3. जो जोडा है, वो छूटेगा
    दीवारो‍ का घर टूटेगा,
    खुला आसमां, हवा और् पानी, उतना ही बस अपना है

    बिल्कुल सही कहा आपने ..बहुत अच्छी रचना है रचना जी🙂

  4. अरे वाह! जो बीत गयी सो बात गयी की तर्ज पर बढ़िया लिखा! बधाई!🙂

  5. बहुत सही बात, बच्चन साहब भी ख़ुश हो जाते!

  6. वाह! बढ़िया लिखा! बधाई!

  7. मुझे ख़ुशी हुई की इतने अधिक लोग हिन्दी में भी लिखते हैं, और जब लिखने वाले आपके जैसे हों, तो बात ही कुछ और है |

  8. बहुत ख़ूब।

  9. bahut dino baad aaye lekin waqai bahut acchi lagi ye kavita…
    kaisee hein?? Khush rahein sada
    Amma yaar kuch haal chaal likh diya karo orkut mein hee sahi😛
    Take care
    with love

  10. आप सभी मित्रों का बहुत धन्यवाद. कविता पसंद करके टिप्पणी करने के लिये….


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