सात दिन सात पोस्ट!!

हमारे आस पास जो चल रहा हो उसका असर हम पर भी होता ही है..पिछले दिनो मैने जम कर टेलीविजन देखा–  इतने चैनल, इतनी घटनाएं, इतने रिपोर्टर, उतने घन्टे… इत्यादी.

इसी सब से प्रभावित हो मैने भी एक प्रोग्राम बना लिया सात दिन मे सात पोस्ट लिखने का!🙂 आज की पोस्ट है-

प्रतिक्रियाएं–
पिछ्ले दिनो मुम्बई मे हुई घटना पर सभी लोगो‍ ने अपने अपने हिसाब से ( और गलत नही होगा यदि कहूं कि अपनी अपनी हैसियत से भी! ) प्रतिक्रियाएं दी..

* एक सांसद महोदय जो कि ताज होटल मे फ़ंसे थे, अगले दिन बाहर आ पाये, कह रहे थे-

We are on a study  tour (!!!!!!!)… were taking dinner…..suddenly all this started… I rushed to my room and locked from inside..No fear at all! in fact i  enjoyed there!!!….. then some one called me that so and so will come to you to pick you up and ..i came out..

जाहिर है उनमे कही भी मारे गये लोगो के प्रति संवेदना का भाव नही था… जाने कैसे मीडिया ने इन्हे बक्श दिया और इनकी लापरवाही भरी प्रतिक्रिया सिर्फ़ एक या दो बार दिखाई…

* एक नन्ही बच्ची ( शायद ८- १० वर्ष की होगी)  भी घटना स्थल पर आई और समझदारी भरी बाते‍ कर रही थी….

* एक अन्य ११ वर्षीय बच्ची सविता कभी कभी अपनी नानी के साथ मेरे घर आती है..कल जब वो आयी तो मैने उससे मुम्बई की घटना के सिलसिले मे कुछ  बाते पूछी…. उसे कुछ भी नही पता था— उसने ये सब कभी नही सुना था- मुख्यमन्त्री, प्रधानमन्त्री, कमान्डो…यहां तक कि उसने ताज महल का नाम भी नही सुना…. जबकी वो स्कूल जाती है और चौथी क मे पढती है…..उसकी मां को भी ये सब नही मालूम… वो दोनो दुनिया के बारे मे ज्यादा नही जानती लेकिन दुनिया उन्हे जानती है….. दुनिया भारत की अन्य विशेषताओ‍ के साथ ही एक आंकडे के रूप मे इन्हे जानती है….

* एक प्रतिक्रिया कचरे के डिब्बे मे फ़े‍की गयी नवजात बालिका की भी है …

सोच रही थी.. क्या दुनिया मे कही भी स्त्री जाति से  कोई इतना विध्व‍ंसक हुआ है ? मै कैसे अवांछित हो जाती हूं? और ये नही होते? अगली बार ठीक से सम्भले ना जाये तो जन्मते ही इन्हे कचरे मे फ़ेंक देना……………
—————

आज के लिये इतना ही..  अब ब्रेक लेती हूं …..इस ब्लॊग के साथ बने रहीये तो नही कहूंगी🙂 लेकिन कल को फ़िर से आइयेगा जरूर!!

Published in: on दिसम्बर 2, 2008 at 9:57 अपराह्न  Comments (12)  

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12 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. Haan jitane muh utani bate.jitane channel utani khabare.jitani akkal utani soch.thik hai na ?
    likhati raho .

  2. bahut achha lekh satik:)

  3. WAH! Rachana ji,….tazzub hai ke aap aur hum kisi hadd tak ek jaisa hee sochte hein🙂 …meine bhi oon mahashay ko note kiya tha jo bade araam se nikal gaye ye kehakar ke kisi ne oonhein ph kiya aur woh oonke sath nikal gaye! Aur bhi aisee bahut kisse rahein hein kyunke jab iss hadse ki khabar hum tak pahunchi tab se lekar hum bhi TV per glued rahe! Kabhi CNN dekhte to kabhi Aaj Tak, Samay, NDTV aur bas jo bhi channel news dein oonke sath jude rahe!
    Sun ne mein aaya ke aantakwadiyon ka lakshya auratein aur bacche the…lekin kisi tarah oonhein haspatal ke maternity ward mein ghusne se roka gaya!
    Waqai stiti ka anumaan lagate rahe to insaan pagal hee ho jaye!
    agli kisht ke liye intezaar rahega

    Likhte rahein…zorr-e-kalam aur jyada😉

  4. us besharm saansad kii ek jhalak maine bhee dekhee thee. baad me shaayad use apnee bewakoofee samajh me aayee hogee yaa kisee ne samajhaayaa hogaa. tabhee hi-light nahee karane dee gayee hogee.

  5. लगता है चेनलों की सरफिंग करते करते डायरी में एक हफ्ते का मसाला इकट्ठ कर लिया है. बढिय…

  6. un neta ji ke comment ke baad hamare ofiice ke ek sajjan jo ki maharashtra se sambandh rakahte hai ka comment aya ki vo asali maratha tha maratha aadmi kisi se nahi darta

  7. सार्थक लेख .अच्छा विश्लेष्ण

  8. Achchhaa likha aapane

  9. neta desh ke nagrikon ke man se yoon hi door nahin chale gaye !

  10. आपका फ़िर लिखना शुरू करना सुखद है। सुन्दर पोस्ट! इसे पढ़ पहले ही लिया था टिप्पणी अभी कर रहूं ताकि सनद रहे कि पढ़ लिया!🙂

  11. kafi sare muddo ko samet liya aapne ek hi lekh mein

  12. @ अर्चना जी और महक, शुक्रिया!

    @ डॊन, हम एक ही तरह सोचते हैं इसीलिये तो मित्र हैं ना!🙂 अगली पोस्ट हाजिर है जी!

    @ गगन जी और सुब्रमणियन जी, शुक्रिया..

    @ कन्चन, चकित हूं ये सुनकर!

    @ रन्जू जी, गिरिश जी, मनीष जी और अनूप जी, खुश हूं मै आप सबकी टिप्प्णीयां देखकर !🙂 बहुत शुक्रिया!


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