कितनी और परिक्षा लोगे?? ?

(सात दिन सात पोस्ट -२)

कल की बात जहां खत्म की थी वही‍ से शुरु करती हूं, यानि भारतीय पुरुष प्रधान समाज मे स्त्रियो‍ की स्थिती की कुछ बातें करनी है‍-

कुछ दिनो पहले ई स्वामी की तीखे अन्दाज वाली एक पोस्ट ” तुम्हारा प्यार, प्यार और हमारा प्यार लफ़डा ? “ पढी थी.उसमे उन्होने एक लडकी के प्यार को  परिवार और समाज किस निगाह से देखता है, इसका जिक्र किया है.
लडकी के प्यार का ’लफ़डा’ अगर शादी मे परिणित  हो जाता है तब भी उसकी मुसीबते कम नही होतीं.‍
यहां तक कि उसका खुद का पति भी उसे शक की नजर से देखता है.. इस सम्बन्ध मे समाज मे नजदीक से देखी दो घटनाओं का जिक्र करना चाहूंगी-

लडके और लडकी ने अपने दोनो के घर वालो की मर्जी के खिलाफ़ शादी कर ली और अलग घर मे रहने लगे…. पति जब अपने काम पर जाता तो पत्नी को अन्दर बन्द कर बाहर से ताला लगा कर जाता और आने पर ही खोलता.. उसे कहीं जाने आने की तो दूर, पास पडोस मे किसी से बात तक करने की इजाजत नही थी….. लडकी के सामने सिर्फ़ पति के जुल्म सहने के अलावा कोई चारा नही था… अगर बगावत करती भी तो समाज उसे चै्न से जीने नही देता…

एक डॊक्टर लडकी ने अपने घर वालो‍ के खिलाफ़ एक डॊक्टर लडके से शादी की… वो  बहुत धनाढ्य परिवार से थी अत: उसके पिता मध्यम वर्गीय परिवार मे उसकी शादी नही चाहते थे, हालांकि लडके का परिवार राजी था…  मर्जी के खिलाफ़ शादी करने पर पिता ने अपने घर मे लडकी से जुडी हर चीज को जला कर मिटा डाला और वर्षो बाद अब जबकी उसका एक बच्चा भी है आज तक पिता ने उससे बात नही की ,न ही कोई सम्बन्ध रखे….. डॊक्टर पति महोदय भी अपनी पत्नी को चौबीसो‍ घन्टे अपनी निगरानी मे रखते हैं, उसे भी किसी से  बात करने की इजाजत नही है, यहां तक कि जब वो ब्यूटीपार्लर मे अन्दर जाती है पति बाहर खडे रहकर उसका इन्तजार करते हैं!

कहना आसान है कि ये लडकियां बगावत क्यो‍ नही करती ….दरअसल सच ये है कि इस हालात मे इनके लिये दोनो ही तरफ़ संघर्ष होता है और ज्यादातर लडकियां समाज के बजाय अपने परिवार से और अपने आप से संघर्ष करते हुए जीती है‍…

** दोनो परिवारो की सहमति से शादियों मे भी कई जगह देखने को मिल जाता है कि पति पत्नी पर अपना रौब जमाते है‍…

प्रतिभा बेहद खूबसूरत ( पति उसके आगे कहीं नही ठहरते!🙂 ) है और अपने पति के बराबर ही पढी लिखी भी,,लेकिन हर छोटे बडे फ़ैसले पति ही लेते है‍, जैसे प्रतिभा अमुक उम्र से बडे बच्चो‍ को घर मे नही पढायेगी, इस पुरुष से बात करेगी, उससे नही… कितनी देर क्या बात करेगी..आदि आदि..

प्रतिभा जैसी ही अनेक भारतीय भारतीय महिलाओं की ओर से ये बात दकियानूसी पतियो‍ कि लिये–

कितनी और परिक्षा लोगे?


कितनी और समीक्षा होगी?
कितनी और परिक्षा लोगे?
सदियों से तुम पति बने हो,
कब तुम मेरे मित्र बनोगे?

आगे आगे तुम चलते हो,
आंखें मूंद मै चलती पीछे,
कदम से मेरे कदम मिलाकर,
कब तुम मेरे संग चलोगे?

कितनी और समीक्षा होगी?
कितनी और…..

शब्दों को तुम समझ न पाते,
मौन के भी तुम अर्थ लगाते,
मेरे मन की बात समझने,
कब मेरी भाषा समझोगे?

कितनी और समीक्षा होगी?
कितनी और….

मेरा भी अपना एक मन है,
देह के बाहर भी जीवन है!
अपनी कैद मे रखकर मुझको,
कितना/ और कब तक परखोगे?

कितनी और समीक्षा होगी?
कितनी और्…..

—————-
**** अफ़लातून जी की टिप्पणी मै जनहित मे यहां लिखना चाहती हूं क्यों कि उनकी बात से मै भी सहमत हूं कि “इन उदाहरणों को पढ़कर प्रेम विवाह को खारिज न करें” … हमारे आस पास तमाम उदाहरण ऐसे भी हैं जहां प्रेम विवाह सफ़ल रहे हैं ….

कल फ़िर मुलाकात होगी🙂
Published in: on दिसम्बर 4, 2008 at 12:38 पूर्वाह्न  Comments (16)  

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16 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. सार्थक पोस्ट…..
    बहुत अच्छी और संवेदनशील कविता….
    शुक्रिया

    • very nice poem

      • superb,fantastic poem

      • ouutstanding poem

  2. a very sensitive issue and powerful poem.keep it up

  3. आज के बदले एवं बदलते परिवेश में भी उपरोक्त वाकिये अतिश्योक्ति नहीं लगते और आस पास जहाँ तहाँ देखने मिल ही जाते हैं…बस, इतना जरुर है कि स्थितियाँ सही दिशा में बदल रहीं है और बहुत ही संतोषप्रद तरीके से.
    कविता प्रवाहमय है, संवेदनशील है एवं भावपूर्ण है, लिखते रहें.

    समीर लाल

  4. अच्छा लगा यह पोस्ट देखकर। अपने यहां प्रेम विवाह लफ़ड़े वाला मामला है। विवाह के पहले , साथ रहने-जीने मरने की क्समें खाने वाले जोड़े एक-दूसरे पर शक करने लगते है। लड़के निगरानी करने लगते हैं। ज्यादातर मामलों में महिलाओं को झेलना पड़ता है। स्वामीजी की पोस्ट अभी तक पढ़ी नहीं थी। बाहर रहने के दौरान छूट गयी अब पढ़ते हैं। कविता सरल,सहज, संवेदनशील है। बहुत अच्छी लगी। खासकर ये पंक्तियां:

    मेरा भी अपना एक मन है,
    देह के बाहर भी जीवन है!
    अपनी कैद मे रखकर मुझको,
    कितना/ और कब तक परखोगे?

    लिखती रहें। अगली पोस्ट का इंतजार है!

  5. सहमत हैं । @ अनूप ,इन उदाहरणों को पढ़कर प्रेम विवाह को खारिज न करें ।

  6. अफलातूनजी, इन उदाहरणों को पढ़कर प्रेमविवाह को खारिज करने जैसी बात नहीं है। ये उदाहरण भी अपनी जगह हैं। अक्सर यह भीहोता है। तमाम प्रेम विवाह बहुत सफ़ल भी साबित होतें हैं!🙂

  7. Bahut badiya.sahi hai jyadatar ladakiya apane aap se sangharsh karte huyi jiti hai. magar ye bhi utana hi sach hai ki ladakiya sangharsh karne ka madda rakhati hai aur rahi prem vivah ki bat to prem,vivah ke bad bhi hota hai.

  8. Rachana ji….

    aapki ye post waqai mein bahut acchi lagi khas kar ye dekhkar ke oon ladkiyon ki taraf se aap bagawat karne lagiN🙂
    Darasal kaheen na kaheen iski shuruwaat honi chahiye aur woh aapne kar deekhayee aur mein isske liye aapke sahas ki daad detin hoon!
    Rahi onn ladkiyon ki baat to waqai, bura laga ye jaankar ke adhiktar ladkiyaan apne aap se aur apne pariwaar se sangarsh karti hui jeetiN hein…sach dekha jaaye to woh apne pariwaar ke liye kitne waise hee tyaag karti aati rehati hai chahe woh pati ke liye, sasuraalwalon ke liye to phir apne bacchon ke liye…inn sab ke bawazud ye aur ek sangarsh jismein ooska sath dene wala shayad koi bhi nahi…:( afsos!!!!

    Mein yehi kahoongi Rachana ji…jo chetna jagayee hai aapne iss post ke zariye…ise aise hee jagate rahiye mujhe yakeen hai koi na koi aisee larki ise parhkar pariwaar mein rehakar bhi sangarsh ke viroodh pyaar se hee sahi awaz ootha sakegi…(umeed pe sari qaynaat tiki hui hai😀 )

  9. shaq aadmi ke complex ko darshata hai. meri samajh se iska prem ya arranged marriage se koyi lea dena nahin. Donon terah ki shadiyon mein aise logon se pala pad sakta hai. Haan ye juroor hai ki prem vivah mein aisi sthiti hone par apne ghar walon ka support na mile.

  10. kya baat hai.. wah ji wah .

    choti si katha mein kavita ke sang aapne jeevan ke darshan ko darsha diya …

    badhai sweekaren ..

    maine kuch nai nazme likhi hai ,dekhiyenga jarur.

    vijay
    Pls visit my blog for new poems:
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

  11. अजीत जी, अरून जी, समीर जी, अनूप जी,अफ़लातून जी, अर्चना जी, डॊन, मनीष जी, विजय जी,
    आप सभी की सार्थक टिप्पणीयो‍ के लिये बहुत बहुत शुक्रिया!

  12. good , nice!!!!!!!!!!!!

  13. nice


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