जी भर के जी ले!!

जी भर के जी ले इसे तू अभी ही,
कभी ना पलट के ये पल आयेगा!

गम हो या खुशियां, ठहर कुछ न पाता,
एक दिन वक्त आने पे टल जायेगा!

थके मत, रूके मत! खोजता तू चला चल,
कभी तो तू प्रश्नों के हल पायेगा!

सोच मत! तुझसे ज्यादा क्यूं किसको मिला है,
ईर्ष्या की अग्नि मे जल जायेगा!

धरती ने कब किसको अपना बनाया?
यहां आज जो है, वो कल जायेगा!!

जन्मा था, सूरज के जैसे उगा था!
एक दिन मौत के साथ ढल जायेगा……

……….

रचना.

Published in: on मार्च 3, 2009 at 6:13 अपराह्न  Comments (13)  

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13 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. हमारी आदत होती है विगत को गौरवान्वित करने और भविष्य से आतंकित रहने की। वर्तमान से हम सदा असंतुष्ट ही रहते हैं जबकि वही सत्य होता है।

  2. ये जीवन निरंतर यूँ ही चलता जायेगा …सच ही तो है

    मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति

  3. जी भर के जी ले इसे तू अभी ही,
    कभी ना पलट के ये पल आयेगा!

    -बस, यही सफल जीवन का सूत्र है. सुन्दर अभिव्यक्ति.

  4. रचना जी , आपकी रचना भी उन्दा है । बधाईयां

  5. धरती ने कब किसको अपना बनाया?
    यहां आज जो है, वो कल जायेगा!!

    अच्छा लगा इस कविता के माध्यम से यह सन्देश

  6. सच बातों से नज़्म का सौंदर्यवधन हुआ है…


    चाँद, बादल और शाम
    गुलाबी कोंपलें

  7. जी भर के जी ले इसे तू अभी ही,
    कभी ना पलट के ये पल आयेगा!

  8. “गम हो या खुशियाँ,ठहर कुछ न पाता”———

    “जो देगा विधाता तो, ले भी वो जायेगा”———

  9. सुन्दर!

  10. “गम हो या खुशियां, ठहर कुछ न पाता,
    एक दिन वक्त आने पे टल जायेगा!”

    सुन्दर भावाव्यक्ति

  11. जीवन की फिलोसफी को अच्छी तरह व्यक्त किया आपने !

  12. यही प्रतिपादित होता है

    चक्रारवत परिवर्तन्ते दु:खानि च, सुखानि च।

    If winter comes, can spring be far behind!

    ज्ञानियों ने कहा, साहित्यकारों ने लिखा, ब्लॉगरों ने भी यही कहा, फिर हम और क्या कहें!

  13. आप सभी क टिप्पणियों के लिये बहुत बहुत धन्यवाद!

    ॒ गगन जी, बिल्कुल सत्य कहा आपने!

    ॒ राजीव जी, जी हां सच कहा आपने मैने कोई नई बात नही की बल्कि कईयो बार अलग अलग लोगों द्वारा, अलग अलग समय पर कही गयी इन्ही बातों को मैने अपने ढंग से समायोजित किया है!
    इस संस्क्रत सूक्ति को यहां लिखने के लिये धन्यवाद!🙂


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