नेता और जनता

कहने को दोनो इन्सां हैं, पर फ़िर भी थोड़ा फ़र्क यहां,
वो पाते हैं मै खोता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!

ना बाढॆं उन्हे बहा पातीं, ना सूखे से विचलित होते,
ना गर्मी से भी गलते हैं, ना भूकंपों से ढहते वे,
वो बच जाते मै मरता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!!

हर सुविधा उनके पैरों मे, हर दुविधा को सहता हूं मैं,
ना सुनने की फ़ुर्सत उनको, जो दुख अपने कहता हूं मै,
वो वक्ता हैं मै श्रोता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!!

सारी खुशियां उनकी अपनी, मेरे हिस्से बस दुख आते,
उनके बच्चे तो मौज करें, मेरे बच्चे भोखे सोते,
वो हंसते हैं, मै रोता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!!

ना उन्हे किसी की चिन्ता है, काले कामों को करते वे,
चाहे जिये मरे कोई बस अपना घर भरते हैं वे,
वो खाते हैं मै बोता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!!

वो कई गुनाह पचा जाते, मै हर गलती की सजा पाता,
अफ़सर, कानून, पुलिस उनकी, मै चिल्लता ही रह जाता,
वो निर्भय हैं मै डरता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!!

दुनिया भर की दौलत उनकी, हर मॊडल की कारें उनकी,
हैं कई कई महल उनके मेरा कमरे भर घर भी नही,
वो बड़े बहुत मै छोटा हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!!

कहने को दोनो इन्सां हैं, पर फ़िर भी थोड़ा फ़र्क यहां,
वो पाते हैं मै खोता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं!

————-

Published in: on जुलाई 28, 2011 at 10:58 पूर्वाह्न  Comments (13)  

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13 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. बस कहने के लिए ही दोनों इन्सान हैं वरना तो वो भगवान से कम कहाँ……

    बहुत सटीक चित्रण किया…

  2. कहने को दोनो इन्सां हैं, पर फ़िर भी थोड़ा फ़र्क यहां,
    वो पाते हैं मै खोता हूं, वो नेता हैं, मै जनता हूं.
    बेहतरीन प्रस्तुति…
    बखूबी अभिव्यक्तिकरण…

  3. यही तो विरोधाभास है हमारे समाज का… जोर्ज ओरवेल के एनिमल फ़ार्म की तरह… आज से ६-७ दशक पहले लिखी कहानी कितनी सच है आज भी!!
    बहुत मज़ा आया चिकने घडों पर कविता की बरसात का!!

  4. बहुत बढ़िया लिखा है …..

  5. बहुत अच्छी तरह से नेता और जनता का भेद बताया है।

  6. सीधे-सादे शब्दों में सीधी बात। पसन्द आई। तीसरी कड़ी में भोखे की जगह भूखे और छठी में चिल्लता की जगह चिल्लाता कर दीजिए।

  7. बढिया है🙂

  8. आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया…

  9. Rachana aaj aapka blog dekha, aapki rachnae padi
    aakpki gadi hui, sunder abhivyakti me kadi gai,
    sunder shabdo me vyakt, samsamayik abhivyakti ka kya kahana,
    aapka to nam hi hai rachana,

  10. जनता और नेता के फर्क को बखूबी रेखांकित किया है आपने।

    आपकी रचनाशीलता की नियमितता देखकर बहुत अच्छा लगा।

  11. क्या खूब !

  12. संजीव भैया, बहुत शुक्रिया!🙂

    सॄजनशिल्पी जी, शुक्रिया! बहुत अच्छा लगा इतने दिनों बाद आपको यहां देख कर..

    वाणी जी, बहुत शुक्रिया!🙂

  13. Hi there Dear, are you in fact visiting this website on a regular basis, if so then you will
    absolutely get pleasant knowledge.


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