न जाने कितने हैं…

इस दुनिया मे इन्सानों के रंग न जाने कितने हैं,
उनके जीवन , व्यवहारों के ढ़ंग न जाने कितने हैं.
अपनी अपनी मन्जिल सबकी, अपनी अपनी सबकी राहें,
गिनती को तो है लोग बहुत, पर संग न जाने कितने हैं.
कुछ के सपने सच हो जाते, कुछ अपने सुख को पा जाते,
पर अपनी रूठी किस्मत से दंग न जाने कितने हैं.
छोटी छोटी बातों मे उलझ, मारा मारी करते फ़िरते,
उठा पटक, सीनाजोरी, हुड़दंग न जाने कितने हैं.
है श्वेत रंग शांति का जो, उसकी दिखती अब कमतरता,
हुए लाल क्रोध से जो , बदरंग न जाने कितने हैं.

Published in: on मार्च 31, 2012 at 7:41 पूर्वाह्न  Comments (2)  

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2 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. bahut sundar sorry hindi typing se anbhigya hoon varna hindi me hi likhata

  2. same is the problem with me also i also dont know hindi typing


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