मेरा परिचय

नमस्कार!! मै रचना बजाज…मूलत: मध्यप्रदेश की हूँ. अभी नासिक (महा.) मे रहती हूँ.
परिवार के साथ ही देश और दुनिया मे कहाँ, क्या, क्यों और कैसे हो रहा है,थोडा सा समझने की कोशिश करती हूँ.अपनी सोच के साथ शब्दों की कसरत मुझे पसंद है सो कभी- कभी कुछ लिख भी लेती हूँ.साहित्य ज्यादा पढा नही है अत: मेरे लेखन की भाषा भी आमतौर पर बोल-चाल वाली आम भाषा ही होती है.जिस समय, जैसा भी सोच पाती हूँ और लिखने का मन करता है लिख देती हूँ.
आप खुद तय कर लीजियेगा कि ये लेख, निबन्ध है या कि कोई कविता है, मेरे लिये तो ये मेरे विचारों की अभिव्यक्ति और शब्दों की सरिता है!!

शिक्षा के बारे मे यह कहुँगी..

“निर्बल को अनदेखा कर जो कई कई मन्दिर बनवाए,
मेरी तुमसे ये विनती हे दानी उसको न कहा जाए.”
“अपनी शिक्षा को बाँटे ना और खुद मे ही जो खो जाए,
मेरी तुमसे ये विनती हे ज्ञानी उसको ना कहा जाए.”
“जो धनी बनुँ तो दान करुँ, शिक्षित हूँ तो बाटुँ शिक्षा
इस जीवन मे पाई है, बस इतनी ही मैने दीक्षा.”

(* इसका मतलब ये कतई नही लगाया जाय कि मेरे पास बहुत शिक्षा और धन है बाँटने के लिये!)

बस बाकी बातें फिर कभी……..

प्रकाशित on अगस्त 16, 2006 at 11:56 पूर्वाह्न  Comments (81)  

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81 टिप्पणियाँटिप्पणी करे

  1. थोड़ा इस पन्ने पर भी मेहनत की जाये.🙂

    • Dear Madam,

      I must appreciate your poetries fully blended with emotion.

      My well wishes to you for future endavouer.

      Regards,

      Dilip Mishra

  2. सही है कुछ अपने बारे में भी बताइए।

  3. रचना जी, हमें शुरु से ही मारवाडी जात कन्जूस और मक्खीचूस लगता है। आपक इसके बारे में क्या खयाल है की खुद के बुनियादी जरूरतों को भी कन्जूसी के हवाले करन? जल्द जवाब की आशा में

    • काफी अच्छी कविता है आपकी,
      आजकल यही देखने को मिलता है कि दान न करने वाले दानी कहे जाते हैं चाहे वो धनी हो या ज्ञानी।

      मै एक आर्मी मैन हूं। आपको बहुत शुभकामनाएँ

      श्रीलाल गुर्जर

  4. अपना फोटो डालिये

  5. @ समीर जी और श्रीश जी, आपके कहे अनुसार ‘थोडा-सा कुछ’ लिख दिया है..

    @ लक्ष्मीकांत जी, मै मारवाडी तो नही हूँ. और कन्जूस, मक्खीचूस कोई जात नही होती, लोग होते हैं!
    बुनियादी जरूरतों की हर एक की अपनी अलग परिभाषा होती है! आप और हम कौन हुए किसी के बारे कुछ राय बताने वाले??

  6. काफी अच्छी कविता है आपकी, आजकल यही तो हो रहा है कि दान न करने वाले दानी कहे जाते हैं चाहे वो धन हो या ज्ञान।

    मैं तो खुद शिक्षा के क्षेत्र में हूं और देख रहा हूं।

  7. u hv definitely scored very big thing in a small way.i like ur understanding about ur self.shayad hindi ko esi aam bolchal ki bhasha ki jyaada jaroorat hai,sahitye ke thekedaro ne to ese gart me pahuchaya hai.

  8. @ आशीष और दिव्याभ, बहुत धन्यवाद. अपने विचार रखने के लिये..

  9. रचना जी. आपकी कविताओं में निरंतर निखार आ रहा है. बतौर पाठक मैं यही अनुभव कर रहा हूं. हालांकि कविता मुझे लिखनी नही आती.
    आप मध्यप्रदेश से हैं यह जानकर प्रसन्नता हुई. मेरा जन्म होशंगाबाद का है.
    आपकी निरंतर सक्रियता देखकर मै आह्लादित हूं. मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें. सुखद भविष्य की आकांक्षा करता हूं. आपका शुभेच्छु – नीरज

  10. @ नीरज भाई, आपकी शुभकामनाओं के लिये बहुत बहुत धन्यवाद.आशा है आगे भी आप इसी तरह स्नेह बनाए रखेंगे.

  11. अपनी विचारभिव्यक्ति में सफ़ल हैं आप रचना जी, घुमते फ़िरते आपके चिठ्ठे में पहुंचा और ठहर सा गया।
    शुभकामनाएं

  12. @ संजीत, शुक्रिया..

  13. नमस्ते रचना जी, एक घण्टे बाद आने वाले स्वन्त्रता दिवस की शुभकामनाएँ हम देते हैं । आपके विचार शिक्षा के विषय में एक छोटी कविता का रूप लिए हुए तो हैं ही, भले ही काव्यकला पर कोई दोराय हो पर उसके कविता होने में कोई सन्देह नहीं, जैसा कि आपने कहा है कि आप इसे कविता मानें या… । मुझे तो एक और कविता इसी पृष्ठ में नज़र आती है-
    आप खुद तय कर लीजियेगा कि ये लेख, निबन्ध है या कि कोई कविता है,
    मेरे लिये तो ये मेरे विचारों की अभिव्यक्ति और शब्दों की सरिता है!!

    ये शब्द स्वयं में कविता हैं । कविता से मेरा अर्थ केवल तुकबन्दी से नहीं बल्कि भाव से है ।

  14. hi this is me Abhishek Karki i want ur creation ur so lucky .

  15. aapka andaz-a-bayan pasnd aya…hum bhi aapke hunar ke hai kabhi ek darshtipat ho jaye..link hai http://www.shesh-fir.blogspot.com.

    dr.ajeet

  16. सराहनीय प्रयास अच्छा लगा आपको पढना ..काफी अच्छी अच्छी रचनाएं हैं आपकी.जल्दी ही फिर आना होगा

    Hindi Kavita

  17. […] दे रहें हैं यहां एक पुरुस्कार रचना जी की बेटी पूर्वी की याद में  है। यह […]

  18. अच्छा लगा आपका ब्लाग। अब हम भी यहां आते रहेंगे।

  19. आज पहली बार घूमते हुये इधर आना हुआ , मजा आया फिर आऊँगी ।

  20. Rachna ji apni rachnao ki unmukt prawah banaye rakhiea belaus sahaj saral saras shabdon ke sath. Apki rachana achhi lagi SADHUWAD

  21. Rachna ji pahli baar aan hua aapki post par aur ab to baar baar aane ka mann karega. aap itna acha jo likhti hai🙂

    latest Post :Urgent vacancy for the post of Girl Friend…

  22. I dont know to write in hindi but its awesome, you write your imagination, we all love it🙂

  23. मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें. सुखद भविष्य की आकांक्षा करता हूं. आपका शुभेच्छु – SALURAM DEWASI TEACHER SANCHORE
    Village Sarnau Post Sarnau Tashil Sanchore- 343041

  24. rachna ji , afasof hai ki aapko pahle na pad pai . sache motise sabad dil main utarte chle gaye ,god bless u .

  25. aap bahut achcha likhati hai apane nam ke anusar

  26. […] इसी नाम से पोस्ट की थी। दो साल पहले रचना जी के द्वारा टैग किये जाने पर पांच […]

  27. नमस्ते रचना जी,
    मदन देवासी सरनाउ साँचोर [ जालोर ]
    ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो …
    ऑफिस में खुश रहो, घर में खुश रहो …

    आज पनीर नहीं है , दाल में ही खुश रहो …
    आज जिम जाने का समय नहीं , दो कदम चल के ही खुश रहो …

    आज दोस्तों का साथ नहीं, टीवी देख के ही खुश रहो …
    घर जा नहीं सकते तो फ़ोन कर के ही खुश रहो …

    आज कोई नाराज़ है, उसके इस अंदाज़ में भी खुश रहो …
    जिसे देख नहीं सकते उसकी आवाज़ में ही खुश रहो …

    जिसे पा नहीं सकते उसकी याद में ही खुश रहो
    Laptop न मिला तो क्या , Desktop में ही खुश रहो …

    बिता हुआ कल जा चूका है , उसकी मीठी यादों में ही खुश रहो …
    आने वाले पल का पता नहीं … सपनो में ही खुश रहो …

    हँसते हँसते ये पल बिताएँगे, आज में ही खुश रहो
    ज़िन्दगी है छोटी, हर पल में खुश रहो

  28. मदन देवासी सरनाउ साँचोर [ जालोर ]
    राजस्थानी भाषा मैं
    मानसरोवर सूं उड़ हंसौ, मरुथळ मांही आयौ
    धोरां री धरती नै पंछी, देख-देख चकरायौ

    धूळ उड़ै अर लूंवा बाजै, आ धरती अणजाणी
    वन-विरछां री बात न पूछौ, ना पिवण नै पाणी

    दूर नीम री डाळी माथै, मोर निजर में आयौ,
    हंसौ उड़कर गयौ मोर नै, मन रौ भेद बतायौ

    अरे बावळा, अठै पड़्यौ क्यूं, बिरथा जलम गमावै
    मानसरोवर चाल’र भाया, क्यूं ना सुख सरसावै

    मोती-वरणौ निरमळ पाणी, अर विरछां री छाया
    रोम-रोम नै तिरपत करसी, वनदेवी री माया

    साची थारी बात सुरंगी, सुण सरसावै काया
    जलम-भोम सगळा नै सुगणी, प्यारी लागै भाया

    मरुधर रौ रस ना जाणै थूं, मानसरोवर वासी
    ऊंडै पाणी रौ गुण न्यारौ, भोळा वचन-विलासी

    दूजी डाळी बैठ्यौ विखधर, निजर हंस रै आयौ
    सांप-सांप करतौ उड़ चाल्यौ, अंबर में घबरायौ

    मोर उतावळ करी सांप पर, करड़ी चूंच चलाई
    विखधर री सगळी काया नै, टुकड़ा कर गटकाई

    अब हंस नै ठाह पड़ी आ, मोरां सूं मतवाळी
    मानसरोवर सूं हद ऊंची, धरती धोरां वाळी

  29. jeewan chalne ka naam hai chalte raho. rook gaye to thora baate karo apne aour dunia ke bare me

  30. this is good that u r make hindi blogs

  31. hello rachna ji….
    i like your creations like anything…
    shayad ye aapka dard hai jo aapse itna kuch karwata hai…
    ise kabhi band mat kariyega..
    meri subhkaamneyein aapke sath hai..

  32. MAI NA TO ENGLISH JANTA HU AUR NA HI KAVITAYE PAR AAP KI KAVITA ACHI LAGI. SUBHKAMNAO KE SAATH.

  33. mere ko doda english aata ha or kavitaye favitaye nahi aata ha parenetu aap ki kavita boohute achi legi

  34. kya kavitaye dhi oh yaar

  35. रचना बजाज जी
    प्रणाम
    आप ने अपने परिचय में शिक्षा के विषय जो कुछ भी कहा है वह सत्य है , हम आप से किन शब्दों में कहे की शिक्षा का सर्व प्रथम तो निजीकरण हो गया है जहाँ पर विद्यार्थी को शिक्षा के नाम पर लूटा जा रहा है और जो बचता उसके साथ जातिवाद हावी है यह मेरा अनुभव और नजरिया है ! जरा इस पर ध्यान दीजियेगा !
    धन्यवाद
    अजीत कुमार सिंह

  36. Me myself is the most unkhown person to me my ownself
    what could i say of your poems
    accept that they are fresh and smells good.
    Keep it up
    God bless you
    Indian Help

  37. kuch shabd pade…….kuch bhavnai mehsus ki…….
    jabse ye jeewan mila tab uski khoj ki shuruat hui…
    wo kehte hai mujhe kisi se pyar hai………….
    magar shayad mere aur sanam ke beech kuch takrar hai…
    janmoprant sab kuch bhool gaya tha………..
    kaise meri sanam se mulakat hui…………
    un shabdo ko samjhne ke koshish karta hu jo pade hue se lagte hai..
    un bhavnao ko samajhta hu jo bachpan se hi saath chali……..
    log poochhte hai kisko tu apna sanam bolta hai……….
    kyu jeewan ki raho me yaha waha dolta hai…..
    wo sanam mera mere sath hai ………
    mere samaksh …mere age mere peeche mere andar………
    wo mujhse pehle bhi tha aur mujhse pashchat hai……..
    ha janmoprant bhool gaya tha……..
    magar is mastishk me kuch kuch sa yaad hai………..
    wo shabd hai ” bhagwaan” jise samjhne ki koshish karta hu…..
    lagta hai ye kuch kuch mere sanam jaisa hai………
    usi ke pas in bhanao ka saath hai……..
    ek pyar hi to hai jo is dharta ko jeewan deta hai..
    varna prithvi agni vayu jal aakash…….
    iska mishran to mehej ek putla hai……..
    aur mera pyar mera sanam hai……
    mera pyar mera bhagwan hai ………
    jo kehta hai……..
    is jeewan me sab kuch tera hai ….
    agar pyar tere sath hai ………
    ha mujhe sab kehte hai ……
    tu sanam se kabhi mila ke nahi /?
    aur ye jawab ata hai………
    wo tumko astitv dene ke…
    apna astitva chhupata hai…
    apna astitva chhupata hai………

  38. mera phela msg apke liye tatkal svarachit chhoti se bhet hai….

    “Yaha Pe Bhavnai Bikti Hai….”
    rachna ji ispe kuch likho ……….

    and plz mail me at thunder_mohit @yahoo.com
    as i dont come to this site….was just going thru this site so found one of ur poems n was impreesed……..
    with thanks ………..mohit budhiraja…

  39. रचना बजाज मध्य प्रदेश की हैं ये जान के खुशी हुई
    और भी अधिक खुशी इस बात की है कि वे
    महाराष्ट्र में है . बेधड़क लिखिए रचना जी देश एक ही है
    स्वागत है

  40. रचना जी
    अभिवंदन
    आपका ब्लॉग देख कर हार्दिक आनंद कि अनुभूति हुई
    आपके ब्लॉग का अध्ययन करना बाकी है
    अभी मैंने आपके ब्लॉग को पहली बार खोला है , प्रथम दृष्टया ये पता चला कि आप भी मध्य प्रदेश की मूल निवासी हैं, अच्छा लगा, आपकी भाषा सरल सहज और सुन्दर है . देश प्रेम , मानवता जैसे विषय निश्चित रूप से आपके लेखन के स्तर को और उत्कृष्ट बनायेंगे.
    आपसे संक्षिप्त मुलाक़ात तो मेरे गृह नगर जबलपुर में समीर भाई के सुपुत्र के विवाह में हो चुकी है .परन्तु वैवाहिक माहौल और समय की कमी होने के कारण साथ बैठ नहीं सके ये मैं अपना दुर्भाग्य ही मानूँगा
    खैर, हम इस अंतर जाल के माध्यम से तो मिलते ही रहेंगे ..
    आपका
    – विजय तिवारी ” किसलय ‘

  41. Mam

    Excellent i never use to read poems but these make me humble to read from now

  42. मित्रों, आप सभी के इतने स्नेह के प्रति आभारी हूं.. आप सभी का धन्यवाद की आपने मेरे ब्लॊग की कई पोस्ट पढकर समग्र रूप मे यहां पर टिप्पणी की.. धन्यवाद!

  43. THOUGHT PROVOKING

  44. अपनी भौतिक शैक्षिक उपलब्धियों के बारे में अवश्य लिखिये ! अध्यात्मिक उप………….को छुपा लिजिये भाई ……..

  45. i’m very impressed by your thoughts…
    Actually MAI EK STUDENT HOON…TENTH KI
    aur mujhe ek topic par lekh chahiyee tha…
    mujhe sanskrit pratiyogita me vishvvidyalay jana hai…

    aur APKE ISS LEKH SE MUJHE BAHUT KUCH MILA…
    DHANYAWAD…FOR HELPING ME…

  46. aap ki har kavita bahut achhi hai. par anjan aur bebas par [ Bega and adiwasi antim chhor ke antim vaykti ] par ek manch ya kisi bhi tarike se unki awaj uthaye.
    pendra road bilaspur chhattisgarh
    09406246515

  47. mp se janm ka parivar ka sambndh he pahli bar es site pr aya achha laga best wishes ab jaipur me hoon

  48. Really u write fine. ur every words are so sweet.

  49. पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ….. ब्लॉग और आपको पढ़ कर बहुत अच्छा लगा….

    रिगार्ड्स….

  50. Hi, rchna g
    apka blog pda acha likte hai aur duniyadare ko bkhobe samjhte b h tbe syad shabdo s byan kar pate h.

    Mai b jaurnalism field ka ek chota sa studet ho aur har seek rha ho. Aur aap jai se gyane vidhawane logo k under m rahkar bhut kuch aur sekhana chahta ho. Kya aapka sahymg milega?
    Rahul tripathi
    MD/EDITOR THE NEWS 1
    email-rahultripathi959@gmail.com
    mo.9305029350
    thanku

  51. achhy or dimag chanchal karne waly laine

  52. Dear Madam ,
    I am inspired with your kaivta -Philosphy of Life.mp3

    कविता रचना बजाज
    By editor.h.b on Jan. 2 2008

    I want to publish your collection as CD if interested plz reply me or contact me on this no-9216333435

    RKKadian
    RKF WEBWORLD

  53. दायित्व-निर्वहन हेतु आप सबमें से प्रत्येक का आह्वान

    नागरिकों/ग्रामीणों/पत्रकारों/सम्पादकों/विधायिका/कार्यपालिका/न्यायपालिका व अन्य सबमें से प्रत्येक!
    आषा है आप सक्रिय सहभागिता निभायेंगे। मानवजन्म से ईष्वर की अपेक्षाएँ अत्यधिक होती हैं। मैंने (सुमित कुमार राय, जैव-प्रौद्योगिकी स्नातकोत्तर, आंग्लभाषा से हिन्दी स्वतंत्र अनूदक, भोपाल) अपने मन में सूचनाधिकार, जनहितयाचिका, स्टिंग आॅपरेषन्स आदि द्वारा आमूल परिवर्तन हेतु कुछ योजनाएँ तैयार की हैं, सूचनाधिकार-प्रयोग तो आरम्भ भी कर दिया है किन्तु इन पुनीत बहुउद्देष्यीय परियोजनाओं में आप सबमें से प्रत्येक की सक्रिय सहभागिता हो, तो क्रांति लाना कोई कठिन कार्य नहीं, आपकी सहभागिता निम्नांकित रूपों में हो सकती है(सबके लिए बौद्धिक मार्गदर्षन हेतु मैं सदैव उपलब्ध रहूँगा)ः-
    उक्त में से कोई
    प्रथम- सूचनाधिकार-प्रयोग करके
    द्वितीय- जनहितयाचिका दायर करके
    तृतीय- स्टिंग आॅपरेषन करके
    चतुर्थ- अन्य प्रकारों द्वारा(उदाहरणार्थ किसी विषय पर परिणाम-मूलक चर्चा करके अथवा आप जिन प्रकारों से भी कर्म हेतु इच्छुक हों

    सुमित 91-9425605432 विस्तार हेतु(अथवा यदि आप करने को इच्छुक तो हैं परन्तु अभी भी अपनी भूमिका स्पष्ट न हो पायी हो, तो) सम्पर्क करें

  54. Bahut acha aur vyavasthith blog hai.

    D Singh

  55. Hi I found your site by mistake when i was searching Google for this issue, I have to say your site is really helpful I also love the theme, its amazing!. I dont have that much time to read all your post at the moment but I have bookmarked it and also add your RSS feeds. I will be back in a day or two. thanks for a great site.

  56. A great template. Where did you get it?

  57. […] और पंकज सुबीर ने, संपादन किया ब्लागर रचना बजाज और श्रीमती अर्चना चाव जी ने। छापने का […]

  58. hi, rachna ji aap ki kavita muje bahut acchi lagi.

    bhagawan kare ke aap isi tarah se kavita likhte rahe aur logo ka pyar milta rahe.

    vijaysinghitm@gmail.com

  59. aap itna mast likhti hai man se likhti hai ya kahi se copy peast karti hai..
    or aap ka orkut me profile hai….????????

  60. mujhe apki post pasand hai….sidhe dil ki bat hoti hai apki kavita me

  61. hello rachana g.. achi but bin mange koi shiksha de us shiksha ki koi kaddar nai…. vese ajj ke jamene main dhekha hai koi app se jayda dimaag rakhta hai to uski kaddar hoti hai .. agar app main aur dusare main same baat hogi to app ki kaddar kam to ho jayegi…. mera to manana hai ki adik koshish karo to har chij mil jati hai.. to shikhsha kudh try karo mann bana ke to achi samajh ati hai…

  62. har chah main umeed na rahen to acha hota hai.. khudh pe vishvaas rakhen … yeh main thinking sunate dhekha hun to shear kar diya

  63. hai rachana ji myne pahli bar aap ka site khola aap ke kament bhut achee lage aap bhut achi sayar hai

  64. Rachanaji,

    AAP KA NAM HI RACHNA HAI KAUR AAP SHABDO KE MAYAZAL MAI UTAKAR USI-MAI RACHNA KAR RAHI RAHO. AAJ HI DEEPAK-JI NE AAPKE BLOG KAU PADNE KE LIYE KAHA. MAI NISHIT RUP SE AAPKE EAS AMULYA PRYAS KAU GAMBHIRTA PRADAN KARUNGA.

    umesh dwivedi

  65. मित्रों, आप सभी के इतने स्नेह के प्रति आभारी हूं.. आप सभी का धन्यवाद की आपने मेरे ब्लॊग की कई पोस्ट पढकर समग्र रूप मे यहां पर टिप्पणी की.. धन्यवाद!

  66. rachna ji mene aap ki rachnaye padi hai dil or dimang ko kafi rahat pahuchi or socha kuch log to hai jo aaj bhi samaj ke un logo ke bare mai sochte hai jo desh v samaj ki mukhy dhara se dur hai aap ki lekhni ke liye aap ko koti koti naman……..

    “हर नये दिन, नई उमंग के साथ,
    एक नई जिन्दगी का कर आगाज़!
    आसमाँ को न देख हसरत से,
    उड! के तुझमे ताकत-ए-परवाज़!!”
    ——– Umesh Nex’

  67. ईन दो पंक्तियौँ मे आपने बहुत कुच्छ कह डाला जो आज के बुद्दीजिवी लाखो पन्नौ मे भी नही कह पाते ह

  68. आपकी कविताएँ पढ़ के बहुत अच्छा लगा
    विश्वास है आप से बहुत कुछ सिखने को मिलेगा

  69. Overall the best. keep it up….. good poetres and esssy…. i appriciate it…..
    i am waiting ur next post at ur blog

  70. Thanks a lot Umesh, pyarelal, Pranay and Sanjay for your kind words…. I am happy to know that you all liked my blog…🙂

  71. अच्छा प्रयास है, और सफलता का विशेष कारण बोलचाल की भाषा में लिखना जो सब के लिए अकसर निजी हो जाता है। शुभ कामनाओं के साथ

  72. Bahut shukriya Rakesh!

  73. rachana ji today i had gone through your blog.aapko aasha se adhik badi poet paya.i will go through all your write ups then i will give you more remarks.in last may god give you stength to share such good poetry for people and society. namakar. aapka fan sanjeev kaura from chandigarh kaura)sanju@yahoo.com (face book id)

  74. बहुत सुंदर .
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena69.blogspot.in/

  75. Rachana Aunty.. U are Simply Best ..
    – Priti Mahajan🙂🙂

  76. Hello Priti ! Nice to see you here.. and thank you!🙂

    Sanjeev, thank you🙂

  77. r achna ji urdu mein jo WAH WAH HAI hindi mein woh hai SADHUWAAD wahi hai aap ke liye.

  78. Thank you Dr. Gupta !

  79. बहित सुन्दर भाषा का प्रयोग बहुत बडियाँ


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