हिसाब……….

जिसको सपना था मान लिया,
वो सच की ही बुनियाद रहा..

साँसों को जीना कहा गया,
असली जीवन बरबाद रहा…

सुख दुख के आने जाने से,
कुछ उजड़ा, कुछ आबाद रहा…

जुड़ गया, मिला जिससे, उससे,
दिल का ऐसा उन्माद रहा…..

जो प्रेम गीत लब पर मेरे,
मेरे दिल की फ़रियाद रहा…….

पाने खोने का किया हिसाब,
कुछ भूल गये, कुछ याद रहा़….
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Published in: on सितम्बर 20, 2013 at 9:15 पूर्वाह्न  Comments (2)